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ब्रह्माकुमारी का 'सशक्त भारत के लिए कर्मयोग'

राष्ट्रपति ने अखिल भारतीय सम्मेलन में किया अभियान का शुभारंभ

'हर नागरिक स्वार्थ से ऊपर उठकर सभी के कल्याण का ध्यान रखे'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 13 February 2026 04:41:01 PM

brahma kumaris campaign 'karma yoga for a strong india'

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा हैकि अपने सभी दायित्वों को निभाते हुए उच्च आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करना ‘कर्मयोग’ ही है। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त कीकि विश्वव्यापी आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी से जुड़े लाखों लोग नियमित रूपसे कर्मयोग का अभ्यास करके सार्थक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहाकि कर्मयोग से भारत का प्रत्येक नागरिक इसके सतत और समग्र विकास में योगदान दे सकता है, इससे न केवल भारत आर्थिक रूपसे प्रगति कर सकेगा, बल्कि एक ऐसा समाज भी निर्मित होगा, जो विश्व केलिए मूल्यआधारित जीवन का आदर्श बनेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उद्गार आज नई दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन में ब्रह्माकुमारी के राष्ट्रव्यापी अभियान 'सशक्त भारत केलिए कर्मयोग' की शुरुआत करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने गुरुग्राम में ओम शांति रिट्रीट सेंटर के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर कहाकि संतुलित और समग्र विकास केलिए भौतिक प्रगति केसाथ नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का एकीकरण जरूरी है। उन्होंने कहाकि आर्थिक प्रगति समृद्धि को बढ़ावा देती है और तकनीकी प्रगति नवाचार, दक्षता व प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहाकि ये एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखते हैं, हालांकि नैतिकता के बिना आर्थिक और तकनीकी विकास समाज में असंतुलन पैदा कर सकता है, उदाहरण केलिए अनैतिक आर्थिक प्रगति धन और संसाधनों के केंद्रीकरण, पर्यावरण क्षति व समाज के कमजोर वर्गों के शोषण का कारण बन सकती है। राष्ट्रपति ने कहाकि नैतिक मूल्यों के बिना प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवता केलिए विनाशकारी हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहाकि आध्यात्मिकता हमें मूलभूत मूल्य और नैतिक ढांचा प्रदान करती है, जो हमें कर्मयोग यानी नि:स्वार्थ सेवा का अभ्यास करने केलिए प्रेरित करती है।
द्रौपदी मुर्मू ने कहाकि आध्यात्मिकता सत्यनिष्ठा करुणा अहिंसा और दूसरों की सेवा जैसे सद्गुणों पर भी बल देती है। उन्होंने कहाकि ये सिद्धांत एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण केलिए आवश्यक हैं। द्रौपदी मुर्मू ने कहाकि जब हमारे विचार आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होते हैं तो हम स्वार्थ से ऊपर उठकर सभीके कल्याण का ध्यान रख पाते हैं, देश का नेतृत्व आध्यात्मिकता के आधार पर न्यायपूर्ण और निष्पक्ष प्रशासनिक निर्णय ले सकता है, ऐसे निर्णय किसी एक वर्ग के लाभ केलिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लाभ केलिए होते हैं। द्रौपदी मुर्मू ने कहाकि जब सरकारी कार्य न्यायपूर्ण होते हैं तो वे समाज में विश्वास और स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहाकि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग की शिक्षा देता है, यह केवल एक स्थान पर बैठकर आत्मचिंतन करने तक सीमित नहीं है और कर्मयोग इसका एक मूलभूत अंग है।

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