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रामनाथ गोयनका की विरासत से पीढ़ियां प्रेरित!

पत्रकारिता में राष्ट्रीय विकास के मुद्दों को अधिक महत्व दें-राधाकृष्णन

सत्यनिष्ठ व गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता केलिए रामनाथ गोयनका सम्मान प्रदान

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 3 January 2026 02:36:27 PM

ramnath goenka award presented for journalism

चेन्नई। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सत्यनिष्ठा और गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता करने वाले प्रतिभागियों को रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान प्रदान किए हैं। उपराष्ट्रपति ने रामनाथ गोयनका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें निडर पत्रकारिता की एक महान हस्ती बताया, जिन्होंने ईमानदारी, बौद्धिक साहस और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखा। उन्होंने उन्हें 'भारतीय लोकतंत्र का विवेक रक्षक' कहा, जिनकी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है। उपराष्ट्रपति ने जिक्र कियाकि रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान साहित्य, विचारों और निडर अभिव्यक्ति की स्थायी शक्ति का उत्सव मनाता है, यह इन पुरस्कारों का तीसरा संस्करण है। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संपूर्ण क्रांति के दौर से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को स्मरण करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि इमरजेंसी के दौरान रामनाथ गोयनका ने पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखा और बिना किसी डर के प्रेस सेंसरशिप का विरोध किया। उन्होंने इमरजेंसी में प्रकाशित प्रतिष्ठित खाली संपादकीय को मौन की शक्ति और पत्रकारिता की नैतिक शक्ति के शक्तिशाली प्रदर्शन के रूपमें उजागर किया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने समाचार पत्रों से राष्ट्रीय विकास के मुद्दों को अधिक से अधिक महत्व देने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव भी दियाकि नियमित रूपसे कम से कम दो पृष्ठ रचनात्मक चर्चा केलिए समर्पित किए जाएं, जो राष्ट्रीय चेतना और नागरिकों को सूचित करने की प्रक्रिया को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहाकि जब सच्चाई को दृढ़ विश्वास केसाथ कायम रखा जाता है तो उसमें अपनी नैतिक शक्ति होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि भारत की प्रगति समावेशी होनी चाहिए, जिसमें सभी भाषाएं और सांस्कृतिक परंपराएं एकसाथ आगे बढ़ें। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक, भाषाई और बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में रखने में प्रधानमंत्री के नेतृत्व को स्वीकार किया। उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं और परंपराओं को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलों का जिक्र किया, जिसमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देना शामिल है। इसबार रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान समारोह चेन्नई में हुआ।
संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहाकि यह पहल डिजिटल और एआई संचालित उपकरणों से भारत की पांडुलिपियों और ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करने केलिए परंपरा को प्रौद्योगिकी केसाथ एकीकृत करती है। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि साहित्य हमेशा समाज के दर्पण और सभ्यतागत मूल्यों के मशाल वाहक के रूपमें काम करता रहा है, ऐसे में तेजीसे हो रहे आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक बदलाव के दौरमें लेखकों और बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि उनकी भूमिका रचनात्मकता से आगे बढ़कर सामाजिक सद्भाव, संवैधानिक मूल्यों और नैतिक चर्चा को बढ़ावा देने तक फैली हुई है। उन्होंने कहाकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला बनी हुई है और यह तब सबसे अच्छी तरह फलती-फूलती है, जब इसे जिम्मेदारी, सहानुभूति और जवाबदेही केसाथ उपयोग किया जाता है। वेदों और उपनिषदों से लेकर महाकाव्यों, भक्ति और सूफी कविता और आधुनिक साहित्य तक भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहाकि बहुलता, बहस और स्वतंत्र अभिव्यक्ति केप्रति सम्मान भारत की सभ्यतागत भावना में गहराई से निहित है।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि विकसित भारत को न केवल आर्थिक ताकत और तकनीकी प्रगति से, बल्कि सामाजिक समावेश, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों से भी परिभाषित किया जाता है। उन्होंने कहाकि साहित्य और पत्रकारिता सूचित बहस, रचनात्मक असहमति और लोकतांत्रिक सतर्कता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुरस्कृत प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि उनके योगदान भारत के बौद्धिक परिदृश्य को समृद्ध करते हैं और विचारों और समाज केबीच बंधन को मजबूत करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि उनकी रचनाएं पाठकों, विशेष रूपसे युवा पीढ़ी को गहराई से सोचने, जिम्मेदारी से कार्य करने और दुनिया केसाथ रचनात्मक रूपसे जुड़ने केलिए प्रेरित करेंगी। कार्यक्रम में प्रख्यात कन्नड़ लेखक और भारत की सम्मानित साहित्यिक हस्तियों में से एक डॉ चंद्रशेखर कंबारा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया, जबकि अरुणाचल प्रदेश की सुबी ताबा को सर्वश्रेष्ठ फिक्शन पुरस्कार, शुभांशी चक्रवर्ती को सर्वश्रेष्ठ नॉन-फिक्शन पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ डेब्यू पुरस्कार नेहा दीक्षित को प्रदान किया गया।

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