'अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए करें'
उपराष्ट्रपति का पुदुचेरी विवि के दीक्षांत में स्नातकों का आह्वानस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 30 December 2025 02:36:45 PM
पुदुचेरी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती इंटरनेशनल सेंटर में पुदुचेरी विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में स्नातक विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने छात्रों को ‘विकसित भारत @2047’ का शिल्पकार बताते हुए देश के भविष्य को गढ़ने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहाकि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक सफलता का उत्सव नहीं, बल्कि यह एक गंभीर क्षण है, जो अधिक ज़िम्मेदारी की ओर बढ़ने का आभास कराता है। उन्होंने स्नातकों को याद दिलायाकि उनकी डिग्रियों केसाथ यह दायित्व भी जुड़ा हैकि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति केलिए करें।
पुदुचेरी को सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत की भूमि बताते हुए उपराष्ट्रपति ने सुब्रमण्यम भारती, भरथिदासन और श्री अरबिंदो जैसे महान कवियों और विचारकों के स्थायी प्रभाव को याद किया। उन्होंने कहाकि श्री अरबिंदो का दर्शन आजभी उच्चशिक्षा को दिशा देता है, जो ज्ञान, आध्यात्मिकता और कर्म का समन्वय करता है तथा ऐसे मस्तिष्क तैयार करता है, जो राष्ट्रीय प्रगति और वैश्विक सद्भाव में योगदान देने में सक्षम हों। उपराष्ट्रपति ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय को नैक के पांचवें मूल्यांकन चक्र में प्रतिष्ठित A+ ग्रेड प्राप्त करने पर बधाई दी और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों केसाथ किए गए 113 समझौता ज्ञापनों सहित इसके वैश्विक सहयोग की सराहना की। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में विश्वविद्यालय के 28 संकाय सदस्यों के शामिल होने को भी शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण बताया।
विकसित भारत @2047 की दिशा में भारत की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह दृष्टि एक समृद्ध, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण केलिए समग्र रोडमैप प्रदान करती है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक मौलिक परिवर्तन का संकेत है-रटंत विद्या से आलोचनात्मक सोच की ओर, कठोर विषय सीमाओं से बहुविषयक अध्ययन की ओर और परीक्षा केंद्रित दृष्टिकोण से समग्र विकास की ओर और स्नातकों से इसके भाव के दूत बनने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख पहलों-पीएम उषा, स्वयं, दीक्षा और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहाकि ये पहलें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाती हैं और इस विश्वास को दर्शाती हैंकि शिक्षा कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सभीका अधिकार होनी चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल कनेक्टिविटी से दुनिया में हो रहे तेज़ बदलावों को लेकर छात्रों को आगाह करते हुए उन्होंने तकनीकी उत्साह और नैतिक सजगता केबीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से यहभी आग्रह कियाकि वे मज़बूती से नशे को ना कहें और अपने दोस्तों को भी ऐसा करने केलिए प्रोत्साहित करें। प्राचीन तमिल ग्रंथ नालडियार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों को याद दिलायाकि ज्ञान असीम है, लेकिन उसे अर्जित करने का समय सीमित है। उन्होंने स्नातकों से सूचना के विशाल सागर में से वही चुनने और आत्मसात करने का आग्रह किया, जो मूल्यवान नैतिक और सार्थक हो। दीक्षांत समारोह में पुदुचेरी के उपराज्यपाल के कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन रंगासामी, पुदुचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पी प्रकाश बाबू और शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।