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असम से खदेड़ेंगे एक-एक घुसपैठिया-गृहमंत्री

'वोट बैंक की राजनीति देश के अस्तित्व पर सवालिया निशान बनी'

असम में विकास पहचान संस्कृति एवं सुरक्षा कार्यक्रमों का आयोजन

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Tuesday 30 December 2025 12:23:03 PM

inaugurated the world-class jyoti-bishnu antarjatik kala mandir

गुवाहाटी। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा हैकि असम से एक-एक घुसपैठिया खदेड़ेंगे। गुवाहाटी में ज्योति-बिष्णु अंतर्राष्ट्रीय कला मंदिर का उद्घाटन कर रहे थे। अमित शाह ने नवनिर्मित पुलिस आयुक्त कार्यालय भवन, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का लोकार्पण और तीन नए आपराधिक कानूनों पर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। एकही दिन में असम के विकास, पहचान, संस्कृति और सुरक्षा के सभी आयामों को कवर करते हुए कई कार्यक्रम हुए हैं। ₹111 करोड़ से निर्मित अत्याधुनिक पुलिस कमिश्नर कार्यालय का लोकार्पण हुआ, स्मार्ट पुलिस की अवधारणा से ₹178 करोड़ में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी केंद्रीय गृहमंत्री ने लोकार्पण किया। अमित शाह ने इस मौके पर कहाकि तीन नए आपराधिक कानून, जो असम में तीन साल के अंदर सेशन कोर्ट से सुप्रीमकोर्ट तक न्याय दिलाएंगे इसकी भी प्रदर्शनी के माध्यम से परिचय देने का काम हुआ है। उन्होंने कहाकि नागांव में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के बहुत बड़े स्मारक का लोकार्पण भी हुआ है।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि जिस क्षेत्रपर घुसपैठियों ने कब्जा जमाया था, उस 162 एकड़ भूमि को खाली कराकर यहां महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का स्मारक बनाना असम की संस्कृति के पुनरोदय का बहुत बड़ा प्रतीक है। उन्होंने कहाकि यहां ज्योति-बिष्णु सभागार का उद्घाटन किया गया है, ज्योतिप्रसाद अगरवाला और बिष्णु प्रसाद राभा, दो महान साहित्यकारों और कलाकारों की स्मृति में ₹291 करोड़ की लागत से 5000 लोगों के बैठने की क्षमता वाले सभागार का उद्घाटन असम के विकास का परिचायक है। गृहमंत्री ने कहाकि ज्योतिप्रसाद अगरवाला और कलागुरु बिष्णुप्रसाद राभा के बारेमें जितना कहा जाए उतना कम है। उन्होंने कहाकि ज्योतिप्रसाद अगरवाला ने असम की पहली फिल्म ‘जॉयमोती’ बनाई और असमिया सिनेमा की नींव डालने का काम किया। अमित शाह ने कहाकि ज्योतिप्रसाद अगरवाला ने संगीत, नाटक और साहित्य को देशभक्ति केसाथ जोड़कर असम की प्रजा में आज़ादी की ललक जगाने का काम भी किया।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि इन दो सेनानियों ने असम की जनता के मन में आत्मसम्मान और देशभक्ति को जागृत किया, जिसे आगे चलकर गोपीनाथ ने एक मजबूत आंदोलन केसाथ आगे बढ़ाया और असम को भारत का अहम हिस्सा बनाने केलिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को मजबूर कर दिया। अमित शाह ने कहाकि कलागुरु बिष्णुप्रसाद राभा ने कला के जरिए आजादी की क्रांति को बल दिया। उन्होंने कहाकि बिष्णुप्रसाद राभा ने आम लोग, मजदूर, किसान और आदिवासियों को अपने सहज, सरल और साहित्यिक शब्दों से आजादी के आंदोलन केसाथ जोड़ा। उन्होंने कहाकि विदेशी कुशासन, उससे उत्पन्न हुई ग़रीबी, असमानता और सामाजिक अन्याय के खिलाफ बिष्णुप्रसाद राभा ने जागरुकता फैलाई। गृहमंत्री ने कहाकि असम एक बहुत लंबे दु:स्वप्न जैसे कालखंड से बाहर आया है। उन्होंने कहाकि एक दशक पहले के असम में बम धमाके, ब्लॉकेड, गोलीबारी, हिंसक समूह और आंदोलन देखने को मिलते थे।
गृहमंत्री ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 साल के शासन में असम विकास के रास्ते पर देश केसाथ कदम मिलाकर चल रहा है। उन्होंने जिक्र कियाकि असम में सभी जगह घुसपैठियों ने कब्जा जमा लिया था, लेकिन मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के शासनकाल में 1 लाख 29 हजार बीघा जमीन को घुसपैठियों से खाली कराने का उल्लेखनीय कार्य किया गया है। अमित शाह ने कहाकि आज जो विपक्ष असम की कला, साहित्य और संस्कृति की बात करते है, उन्होंने ही घुसपैठियों को यहां बसाने केलिए 1983 में कानून लाने का काम किया था। उन्होंने कहाकि घुसपैठियों के आने केबाद असम की कला, संस्कृति, संगीत और भाषा जिंदा नहीं रह सकते। उन्होंने कहाकि विपक्ष ने वोटबैंक की राजनीति केलिए असम के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगा दिया था। अमित शाह ने कहाकि 10 साल से भाजपा की सरकार असम में है और असम की संस्कृति, भाषा और संगीत की रक्षा होगी।
गृहमंत्री अमित शाह ने उल्लेख कियाकि मोदी सरकार ने असम के हिंसक समूहों से समझौताकर यहां शांति प्रस्थापित की है। उन्होंने कहाकि इन समझौतों के कारण 10 हजार से अधिक युवा हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में वापस आए हैं और असम भी विकास के रास्ते पर तेजीसे चल रहा है। उन्होंने कहाकि असम में लाखों-करोड़ों रुपये के उद्योग लग रहे हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, काजीरंगा देश का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया है और लचित बरफूकन की गगनचुंबी प्रतिमा के माध्यम से उनकी स्मृति को युवाओं के हृदय में स्थापित करने का कार्य किया गया है। उन्होंने कहाकि असम आंदोलन के शहीदों का भी एक उचित स्मारक बनाकर उन्हें एक प्रकार से न्याय देने का काम किया गया है। कार्यक्रमों में असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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