दिल्ली में सुनियोजित एवं समावेशी शहरी विकास का ऐतिहासिक फैसला
दिल्लीवासियों का 24 अप्रैल से राहत सम्मान अधिकार का नया अध्यायस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 8 April 2026 01:00:09 PM
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण 2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी केबाद ‘जहां है, जैसा है’ आधार पर करने की परिकल्पना की गई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्लीवासियों के जीवन सुगमता वाला एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कहा हैकि दिल्ली में कॉलोनियों को ‘जहां है, जैसा है’ आधार पर नियमित करने के वर्तमान निर्णय से दिल्लीवासियों को अपनी संपत्तियों के पंजीकरण केलिए आगे आने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने बतायाकि केंद्र सरकार ने दिल्लीवासियों को स्वामित्व अधिकार देने केलिए 2019 में पीएम-उदय योजना लागू की थी, इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा, बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी। मनोहर लाल खट्टर ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य केलिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी प्रेस वार्ता में उपस्थित थीं। उन्होंने कहाकि हमने इन परिवारों की चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं, इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया था और 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण हो चुका है। उन्होंने कहाकि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहाकि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी, इसके लिए एक सुनियोजित समयसीमा निर्धारित की गई है, इसके तहत 7 दिन के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिन के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिन के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा। ज्ञातव्य हैकि अक्टूबर 2019 में केंद्र सरकार ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम-2019 को अधिसूचित किया था, जिसमें प्रधानमंत्री-दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29 अक्टूबर 2019 को शुरू की गई।
जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व, हस्तांतरण या गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं। जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है, जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे, उनमें आरक्षित और अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम-1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं। सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों केलिए हस्तांतरण विलेख जारी किए जाते हैं और निजी भूमि पर संपत्तियों केलिए अधिकार पर्ची जारी की जाती है। पीएम-उदय कार्यक्रम डीडीए ने प्रबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया सुविधा उपलब्ध है। पीएम-उदय केतहत 31 मार्च 2026 तक लगभग 40000 हस्तांतरण विलेख व अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं। योजना केप्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर जांच की गई है, यह देखा गया हैकि संपत्ति हस्तांतरण विलेख या अधिकार पर्ची जारी होने केबाद भी अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों को तैयार करनी थीं और एमसीडी को अनुमोदित करनी थीं।
हालांकि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण 2019 के विनियमों में अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है। लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन केलिए पात्र नहीं हो जाते। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार-1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं। इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा। बीस वर्ग मीटर तकके सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा, यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। दस वर्ग मीटर तक के स्टोरों केलिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है, नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर लागू होगा। अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा। एमसीडी या स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे। राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख या अधिकार पर्ची जारी करेगा।
आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल https://mcdonline.nic.in/swagam पर लॉग इन करेंगे। अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे। चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)। यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया। यदि हां → केस आईडी दर्ज करें, यदि सीडी/एएस जारी किया गया है →आवेदन पत्र खुल जाएगा। यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने केलिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया। स्वगम पोर्टल पर 24 अप्रैल 2026 से उन मामलों केलिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जिनमें संपत्ति हस्तांतरण विलेख या अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी है। पुनर्निर्माण या पुनर्विकास के मामलों में पहुंच के मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई (6 मीटर आंतरिक सड़कें, 9 मीटर अप्रोच मार्ग) प्राप्त करने केलिए मार्ग के अधिकार में कमी के 50 प्रतिशत के बराबर भूमि को छोड़ना होगा। एफएआर की गणना मूल भूखंड क्षेत्र के आधार पर की जाएगी, लेकिन समर्पण केबाद कम किए गए भूखंड के भीतर इसका उपयोग किया जाएगा। यदि मौजूदा एफएआर अनुमत सीमा से अधिक हो जाता है तो दंडात्मक शुल्क (अतिरिक्त एफएआर शुल्क का 3 गुना) लागू होगा। विभिन्न एजेंसियों-डीडीए, एमसीडी, जीएनसीटीडी के संयुक्त समन्वय से उपग्रह चित्रों का उपयोग करके लेआउट योजनाएं तैयार की जाएंगी, हालांकि लेआउट योजनाओं की अनुपस्थिति नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगी। यह संशोधन स्वामित्व आधारित ढांचे से हटकर एक व्यापक ढांचे की ओर बदलाव का प्रतीक है, जो एमसीडी, डीडीए और जीएनसीटीडी के सरलीकृत, एकीकृत दृष्टिकोण से अनधिकृत कॉलोनियों के स्वामित्व और नियमितीकरण दोनों को सक्षम बनाता है।