स्वतंत्र आवाज़
word map

रक्षामंत्री का जर्मन उद्योगपतियों को संबोधन

'भारत-जर्मनी के बीच विश्वसनीयता और साझा हितों की साझेदारियां'

म्यूनिख में रक्षा निवेशक शिखर सम्मेलन में उद्योगपतियों को आमंत्रित किया

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 23 April 2026 05:44:29 PM

defence minister's address to german industrialists

म्यूनिख (जर्मनी)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के उद्योग जगत को विशेष रूपसे विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रमें भारत केसाथ मिलकर विकास और उत्पादन करने केलिए आमंत्रित किया है। उन्होंने विश्वसनीयता और साझा हितों पर आधारित साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया और भू-राजनीतिक समीकरणों में मौजूदा बदलावों, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, तीव्र तकनीकी परिवर्तन और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के मद्देनज़र इन्हें अपरिहार्य बताया। राजनाथ सिंह आज म्यूनिख में रक्षा निवेशक शिखर सम्मेलन में भारतीय और जर्मन रक्षा उद्योग के दिग्गजों को संबोधित कर रहे थे। रक्षामंत्री की यह यूरोपीय राष्ट्र की पहली यात्रा का अंतिम दिन था। उन्होंने कहाकि राष्ट्र और उद्योग अपनी निर्भरताओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं, अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रहे हैं और ऐसे विश्वसनीय साझेदारों की तलाश कर रहे हैं, जो मजबूती, निरंतरता और आपसी विश्वास सुनिश्चित कर सकें।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि इस परिदृश्य में भारत एक विस्तारित बाजार, युवा कुशल कार्यबल और तेजीसे विकसित हो रहे औद्योगिक इकोसिस्टम केसाथ स्थिरता, पूर्वानुमानशीलता और कानून के शासन केप्रति दृढ़ता प्रदान करता है। उन्होंने कहाकि अनिश्चित दुनिया में दीर्घकालिक निवेश के निर्णयों केलिए ये महत्वपूर्ण कारक हैं। ‘रीआर्म यूरोप और आत्मनिर्भर भारत’ पहलों केतहत मौजूद अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने दोहरायाकि भारतीय कंपनियां उन्नत रडार और सेंसर प्रौद्योगिकी, मल्टीसेंसर, एआई सक्षम मानवरहित हवाई प्रणाली, सोनोबॉय और उच्चशक्ति निम्न आवृत्ति वाले पानी के नीचे के ट्रांसमीटरों सहित क्षेत्रोंमें सह विकास और सह उत्पादन केलिए जर्मन कंपनियों केसाथ जुड़ने के इच्छुक हैं। रक्षामंत्री ने 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की परिवर्तनकारी यात्रा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि यह लक्ष्य एक स्पष्ट दृष्टिकोण, सशक्त नीतिगत दिशा और 1.4 अरब लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं से समर्थित है। उन्होंने कहाकि हम मजबूत व्यापक आर्थिक आधार और स्पष्ट नीतिगत दिशा केसाथ दुनिया की सबसे तेजीसे बढ़ती और स्थिर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं।
राजनाथ सिंह ने भारत की आत्मनिर्भरता पहल को अंतर्मुखी नहीं, बल्कि साझेदारी के नए रास्ते खोलने वाला बताया। उन्होंने कहाकि हम आत्मनिर्भरता को विश्वसनीय साझेदारों के सहयोग से भारत में ही डिजाइन, विकास और उत्पादन करने की क्षमता के रूपमें देखते हैं, हम एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, जहां भारत रक्षा उपकरणों का केवल खरीदार नहीं, बल्कि डिजाइन, विकास और उत्पादन में भागीदार होगा, यह बदलाव वैश्विक उद्योग केलिए नए अवसर पैदा करता है। रक्षामंत्री ने कहाकि आजकी परस्पर जुड़ी और एकदूसरे पर निर्भर दुनिया में साझेदारी वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है और भारत-जर्मनी साझेदारी पारस्परिक लाभ, साझा विकास और दीर्घकालिक मूल्य सृजन प्रदान करती है। रक्षामंत्री ने बतायाकि भारत रक्षाक्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानता है और इसे अपनी औद्योगिक एवं तकनीकी रणनीति के केंद्र में रखा है। उन्होंने कहाकि रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों केबीच सहयोग को प्रोत्साहित करता है, इससे स्टार्टअप उद्योगों का निर्माण होता है, विशिष्ट तकनीकों का विकास होता है और आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होती हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि रक्षा उद्योग का एक मजबूत आधार न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देता है, बल्कि आर्थिक स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी सहायक होता है। राजनाथ सिंह ने जर्मन उद्योगपतियों से कहाकि भारत सरकार ने इस एक दशक में कारोबारी सुगमता लाने और भारत को निवेश केलिए एक आकर्षक गंतव्य बनाने के कई संरचनात्मक सुधार किए हैं। उन्होंने कहाकि हमारी नीतियां पारदर्शी, पूर्वानुमानित और निवेशक हितैषी हैं, हमने अपने मानदंडों को उदार बनाया है, नियामक ढांचे को मजबूत किया है और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है। रक्षामंत्री ने कहाकिबाजार के रूपमें भारत की रक्षा संबंधी आवश्यकताएं काफी व्यापक हैं और आनेवाले दशक में इनमें वृद्धि जारी रहेगी, विनिर्माण केंद्र के रूपमें हम लागत प्रभावी उत्पादन, कुशल कार्यबल और आपूर्तिकर्ताओं के एक विशाल नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहाकि नवाचार केंद्र के रूपमें हमारा स्टार्टअप नेटवर्क, इंजीनियरिंग प्रतिभा और डिजिटल क्षमताएं नई प्रौद्योगिकियों के सह विकास केलिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में इसके केंद्र हैं, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया पहलों ने नवाचार और उद्यमिता केलिए अनुकूल वातावरण बनाया है। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहाकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भागीदार के रूपमें भारत केसाथ सहयोग जोखिमों को कम करने और मजबूती बढ़ाने में सहायक हो सकता है, यह कोई अल्पकालिक अवसर नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक प्रस्ताव है।
राजनाथ सिंह ने महत्वपूर्ण औद्योगिक साझेदारियों से भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को मजबूत करने की सराहना की, जिसमें सह विकास और सह उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहाकि दोनों देश विशेष रूपसे भू-राजनीतिक परिवर्तनों के जवाब में रक्षा उपकरणों केलिए सशक्त आपूर्ति श्रृंखला बनाने केलिए अपने उद्योगों केबीच तालमेल स्थापित कर रहे हैं। रक्षामंत्री ने कहाकि भारत जर्मनी केसाथ गहन और दीर्घकालिक साझेदारी की आशा करता है, यदि भारत-जर्मनी साझेदारी के पहले अध्याय प्रौद्योगिकी, उद्यम और संस्कृति से लिखे गए थे तो अगला अध्याय नवाचार, क्षमता और रणनीतिक सहयोग से लिखा जा सकता है। राजनाथ सिंह ने 22 अप्रैल को कील में टीकेएमएस पनडुब्बी निर्माण संयंत्र का दौरा किया, जो भारत जर्मनी केबीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। इस दौरे से उन्नत समुद्री क्षमताओं पर विचारों का आदान प्रदान करने और नौसेना प्रौद्योगिकी में सहयोग के अवसरों का पता लगाने का मौका मिला, जो भारत के रक्षाक्षेत्र के आधुनिकीकरण से जुड़ी प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इससे पहले रक्षामंत्री ने बर्लिन में अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस केसाथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसका उद्देश्य यूरोपीय राष्ट्र केसाथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना था। बैठक के दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग के रोडमैप और संयुक्तराष्ट्र शांतिरक्षा प्रशिक्षण में सहयोग केलिए कार्यांवयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर कर आदान प्रदान किया गया।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]