डॉ जितेंद्र सिंह ने इसका श्रेय नए भारत में विस्तारित अवसरों को दिया
सिविल सेवा परीक्षा-25 के सफल प्रतिभागियों का अभिनंदन समारोहस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 18 April 2026 07:04:45 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक लोक शिकायत विभाग में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा हैकि उनकी हिस्सेदारी अब 31 प्रतिशत से अधिक हो गई है और कुल सफल उम्मीदवारों के एक तिहाई की ओर लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहाकि यह बदलाव इस एक दशक में प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और समान अवसर प्रदान करने के कारण अवसरों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। डॉ जितेंद्र सिंह ने ये उद्गार 'शेयर इंडिया स्माइल फाउंडेशन' की ‘मिशन आईएएस’ पहल के अंतर्गत सिविल सेवा परीक्षा 2025 के सफल प्रतिभागियों के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने सफल उम्मीदवारों को बधाई दी और उनसे कहाकि वे वर्ष 2047 की विकसित भारत की यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर लोकसेवा में प्रवेश कर रहे हैं और उनका प्रतिबद्धता, विनम्रता और सेवा भावना केसाथ योगदान का आह्वान किया। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि सत्यनिष्ठा लोकसेवा का मूल मंत्र है और इसे व्यवहार और धारणा दोनों में बनाए रखें। उन्होंने सिविल सेवकों को जमीनीस्तर पर बने रहने और अपने पूरे करियर में निरंतर सीखते रहने केलिए प्रोत्साहित किया। कार्मिक राज्यमंत्री ने कहाकि सिविल सेवाओं की बदलती लैंगिक संरचना भारत के विकसित होते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य के सबसे उत्साहजनक संकेतकों में से एक है। उन्होंने कहाकि लगभग एक दशक पहले सफल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत थी, जबकि अब यह 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो एक निर्णायक परिवर्तन का संकेत है।
राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि नवीनतम सिविल सेवा परीक्षा-2025 के आंकड़ों के अनुसार 958 अनुशंसित उम्मीदवारों में से 299 महिलाएं हैं, जो कुल का 31 प्रतिशत से अधिक हैं। उन्होंने कहाकि यह निरंतर वृद्धि न केवल युवा महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाती है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों में संसाधनों, सूचनाओं और अवसरों तक बेहतर पहुंच को भी दर्शाती है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि सिविल सेवा अब चुनिंदा अभिजात वर्ग या सीमित भौगोलिक क्षेत्रों तकही सीमित नहीं है, बल्कि आजके उम्मीदवार विविध पृष्ठभूमियों से आ रहे हैं, जिनमें दूर-दराज़ और वंचित क्षेत्र भी शामिल हैं और अक्सर उन्हें पारंपरिक कोचिंग सहायता नहीं मिलती है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि डिजिटल प्लेटफॉर्म, सूचना की उपलब्धता और स्व-अध्ययन उपकरणों के प्रसार ने पारंपरिक प्रणालियों पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है।
सिविल सेवा परीक्षा परिदृश्य में व्यापक बदलावों का जिक्र करते हुए राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि क्षेत्र, लैंगिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि में स्पष्ट बदलाव आया है। उन्होंने कहाकि छोटे शहरों और विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के उम्मीदवार अब शीर्ष रैंक हासिल कर रहे हैं, जो एक अधिक समावेशी और प्रतिनिधि प्रणाली को दर्शाता है। राज्यमंत्री ने अपनी योग्यता को पहचानने और उसे करियर विकल्पों केसाथ जोड़ने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे सुधारों ने विद्यार्थियों को मजबूरी के बजाय रुचि और क्षमता के आधार पर विषयों का अध्ययन करने केलिए सुगमता और स्वतंत्रता प्रदान की है। डॉ जितेंद्र सिंह ने प्रतिभा सेतु मंच का जिक्र किया, जो साक्षात्कार चरण तक पहुंचने वाले लेकिन अंतिम चयन में शामिल न हो पानेवाले उम्मीदवारों को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के संभावित नियोक्ताओं से जोड़ता है।
राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि इससे यह सुनिश्चित होता हैकि प्रतिभा व्यर्थ न जाए और उत्पादक रूपसे योगदान देती रहे। राज्यमंत्री ने सिविल सेवकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास में हुए बदलावों के बारे में भी बात की, जिनमें कैडर आवंटन से पहले केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क और मिशन कर्मयोगी से निरंतर सीखना शामिल है। उन्होंने कहाकि आज के सुशासन में अधिकारियों को जनता, मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व से सीधे जुड़ना आवश्यक है, जिससे अनुकूलन और संचार कौशल अनिवार्य हो गए हैं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद मनोज तिवारी, फाउंडेशन के वरिष्ठ सदस्य और मीडिया एवं शिक्षा जगत के विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।