'भारत यूरोप मुक्त व्यापार समझौते में युवाओं का भविष्य उज्ज्वल'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मीडिया को बजटसत्र के प्रारंभ से पूर्व संबोधनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 29 January 2026 05:29:55 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद परिसर में 2026 के बजटसत्र के प्रारंभ से पूर्व मीडिया से कहा हैकि राष्ट्रपति का अभिभाषण 140 करोड़ नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति, उनके परिश्रम का प्रमाण और युवाओं की आकांक्षाओं का सटीक प्रतिबिंब है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रपति ने सत्र और वर्ष 2026 की शुरुआत में ही सांसदों के समक्ष कई मार्गदर्शक बिंदु रखे हैं और आशा व्यक्त कीकि राष्ट्राध्यक्ष के रूपमें राष्ट्रपति की सरल शब्दों में व्यक्त अपेक्षाओं को सांसदों ने गंभीरता से लिया होगा, जिससे बजटसत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह बजटसत्र 21वीं सदी की पहली तिमाही के समापन और दूसरी तिमाही के प्रारंभ का प्रतीक है। उन्होंने कहाकि यह बजट सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने केलिए अगले 25 वर्ष महत्वपूर्ण हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि वर्ष की शुरुआत बेहद सकारात्मक है, एक आत्मविश्वासी भारत विश्व केलिए आशा की किरण और आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहाकि इस तिमाही की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ केबीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और आगे की आशाजनक दिशाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि यह समझौता महत्वाकांक्षी भारत, आकांक्षावान युवाओं और आत्मनिर्भर भारत केलिए मुक्त व्यापार है। प्रधानमंत्री ने दृढ़ विश्वास व्यक्त कियाकि भारत के निर्माता अपनी क्षमताओं को बढ़ाने केलिए इस अवसर का लाभ उठाएंगे। उन्होंने सभी उत्पादकों से आग्रह कियाकि भारत और यूरोपीय संघ केबीच हुआ समझौता, जिसे सभी समझौतों की जननी कहा जा रहा है केसाथ अब एक विशाल बाजार खुल गया है और भारतीय सामान वहां कम लागत पर पहुंचेंगे। उन्होंने उद्योग जगत प्रमुखों और निर्माताओं को आगाह कियाकि वे आत्मसंतुष्ट न हों, बल्कि गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करें।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पादों केसाथ इस खुले बाज़ार में प्रवेश करने से न केवल 27 यूरोपीय संघ देशों के खरीदारों से लाभ प्राप्त होगा, बल्कि उनका विश्वास भी जीता जाएगा, जिसका दशकों तक दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि राष्ट्र के ब्रांड के अनुरूप कंपनियों के ब्रांड नई प्रतिष्ठा स्थापित करेंगे। उन्होंने कहाकि 27 देशों केसाथ हुआ यह समझौता भारत के मछुआरों, किसानों, युवाओं और सेवा क्षेत्रमें कार्यरत उन लोगों केलिए अपार अवसर लेकर आया है, जो वैश्विक स्तरपर अवसर तलाशने के इच्छुक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि यह एक आत्मविश्वासपूर्ण, प्रतिस्पर्धी और उत्पादक भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने कहाकि यद्यपि राष्ट्रीय ध्यान स्वाभाविक रूपसे बजट की ओर जाता है, फिरभी इस सरकार की पहचान सुधार, क्रियांवयन और परिवर्तन रही है। उन्होंने कहाकि देश अब सुधार की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस सुधार यात्रा को गति देने में अपना सकारात्मक योगदान देने वाले सभी सांसदों केप्रति आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने कहाकि देश दीर्घकालिक लंबित समस्याओं से हटकर दीर्घकालिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है, जो पूर्वानुमान योग्य हैं और वैश्विक विश्वास का निर्माण करते हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि राष्ट्रीय प्रगति के उद्देश्य से लिया गया प्रत्येक निर्णय मानव केंद्रित रहेगा। उन्होंने रेखांकित कियाकि भारत प्रौद्योगिकी केसाथ प्रतिस्पर्धा करेगा, उसे आत्मसात करेगा और उसकी शक्ति को स्वीकार करेगा, लेकिन सरकार मानवकेंद्रित प्रणालियों पर कभी समझौता नहीं करेगी और संवेदनशीलता केसाथ प्रौद्योगिकी को संतुलित करने की दृष्टि से आगे बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आलोचक भी अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और उन्हें केवल कागजों तक सीमित न रखकर लोगों के जीवन तक पहुंचाने पर सरकार के फोकस को स्वीकार करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहाकि सुधार की राह पर अगली पीढ़ी के सुधारों के साथ यह परंपरा जारी रहेगी। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत का लोकतंत्र और जनसंख्या आज विश्व केलिए एक बड़ी उम्मीद है और भारत के पास शक्ति, लोकतंत्र केप्रति प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से लिए गए निर्णयों केप्रति सम्मान का संदेश देने का अवसर है, ऐसे संदेश जिनका वैश्विक स्तरपर स्वागत और स्वीकृति हो। नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह समय व्यवधान का नहीं, बल्कि समाधानों का है, बाधाओं का नहीं, बल्कि संकल्पों का है। उन्होंने सभी सांसदों से समाधानों के युग को गति देने, निर्णयों को सशक्त बनाने और अंतिम छोर तक सफल डिलीवरी सुनिश्चित करने में सहयोग करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने प्रशंसा में उल्लेख कियाकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, जो देश की पहली महिला वित्तमंत्री हैं, लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश कर रही हैं, यह भारत के संसदीय इतिहास में एक गौरवपूर्ण क्षण है।