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नागपुर में मध्यम कैलिबर गोला बारूद निर्माण शुरू

'स्वदेशी हथियार भारत के शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक साबित होंगे'

भारत को गोला बारूद के निर्माण का वैश्विक हब बनाएंगे-रक्षामंत्री

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 19 January 2026 02:56:05 PM

medium-caliber ammunition manufacturing begins in nagpur

नागपुर। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गोला बारूद निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करके भारत को इस क्षेत्रमें वैश्विक उत्पादन का हब बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। रक्षामंत्री नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में मध्यम कैलिबर गोला बारूद निर्माण सुविधा का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने उस समय को याद किया जब गोला बारूद की कमी ने देश की रक्षा तैयारियों को बाधित किया था, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार ने इस क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को महसूस किया है। उन्होंने बतायाकि यह संयंत्र पूरी तरह से स्वचालित है और इसमें 30 मिमी गोला बारूद का निर्माण होता है, जिसका उपयोग भारतीय सेना और नौसेना बड़े पैमाने पर करती है। उन्होंने पिनाका रॉकेट निर्माण संयंत्र का भी दौरा किया और पिनाका रॉकेटों की पहली खेप आर्मेनिया को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षाक्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में निजी क्षेत्रके उल्लेखनीय योगदान की प्रशंसा करते हुए कहाकि गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय गोला बारूद निर्माण के कारण देश गोला बारूद उत्पादन में लगातार प्रगति कर रहा है। रक्षामंत्री ने विशेष रूपसे 2021 में भारतीय सेना को निजी क्षेत्र के निर्मित पूर्णतः भारतीय गोला बारूद मल्टीमोड हैंड ग्रेनेड सौंपे जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहाकि सोलर ग्रुप के निर्मित नागास्त्र ड्रोन का ऑपरेशन सिंदूर में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया, इसने आतंकवादी ठिकानों पर सटीक प्रहार करके अपनी रणनीतिक क्षमता साबित की। उन्होंने नागास्त्र के अधिक उन्नत संस्करणों के विकास पर विश्वास व्यक्त कियाकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर ये स्वदेशी हथियार देश के शत्रुओं केलिए अत्यंत घातक साबित होंगे। राजनाथ सिंह ने कहाकि सोलर कंपनी के 'भार्गवस्त्र' काउंटर ड्रोन सिस्टम का सफल परीक्षण निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि इस संयंत्र में विकसित पिनाका मिसाइलों का निर्यात शुरू हो चुका है, जो देश की निर्यात क्षमता को और मजबूत करने में रक्षा उद्योग की क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने खुशी जताई किकि भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि तेजीसे निर्यातक बनने की ओर अग्रसर है। रक्षामंत्री ने कहाकि युद्ध लगातार जटिल हो रहे हैं, इसके लिए भारत को भी युद्ध स्तरपर तैयार रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहाकि युद्ध के नए तरीके सामने आ रहे हैं, युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना जैसे क्षेत्र भी संघर्ष के नए आयाम बन गए हैं, सीमा सुरक्षा व नवीनतम हथियारों एवं प्रौद्योगिकियों का महत्व बढ़ गया है। उन्होंने कहाकि युद्ध की प्रकृति चाहे जोभी हो, एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी, ऐसे में विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी समय की मांग है। राजनाथ सिंह ने कहाकि सरकार रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्रकी भूमिका को आगामी समय में 50 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहाकि निजी क्षेत्र की क्षमताएं और नवाचार इसकी पूर्ण क्षमता को स्पष्ट रूपसे प्रदर्शित करते हैं और विश्वास व्यक्त कियाकि यह लक्ष्य जल्द ही प्राप्त हो जाएगा। उन्होंने कहाकि सरकार निजी क्षेत्र को मजबूत करने और घरेलू विक्रेताओं को बढ़ावा देने केलिए हर संभव प्रयास कर रही है, हम कई क्षेत्रों में स्वदेशी सामग्री बढ़ाने में सफल रहे हैं, इससे निजी क्षेत्र का मनोबल भी बढ़ा है।
रक्षामंत्री ने आत्मनिर्भरता में नरेंद्र मोदी सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप प्राप्त परिणामों का उल्लेख करते हुए घरेलू रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तरपर पहुंच गया है, इसमें 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान निजी क्षेत्र का है, जो दर्शाता हैकि निजी उद्योग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक बन रहे हैं। उन्होंने कहाकि निजी क्षेत्रकी बढ़ती भागीदारी के कारण भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 24000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने रक्षा विनिर्माण प्रणाली में सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों के अनूठे और प्रभावी संयोजन की ओर इशारा करते हुए इसे देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहाकि हमारे पास सक्षम और अनुभवी सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान हैं, साथही मजबूत और तेजीसे बढ़ती निजी कंपनियां भी हैं, इस तालमेल को और गहरा करने केलिए निजी क्षेत्रकी क्षमताओं को बढ़ाने, उन्हें आधुनिक बनाने, नई तकनीक, अवसर और जिम्मेदारियां प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि वे सार्वजनिक क्षेत्र केसाथ मिलकर आगे बढ़ सकें। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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