उपराष्ट्रपति की ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के स्पीकर केसाथ मुलाकात
'भारत ब्रिटेन की मित्रता और मजबूत संसदीय संबंधों के लिए फलदायी'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 16 January 2026 05:57:44 PM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की आज संसद भवन दिल्ली में ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के स्पीकर लॉर्ड मैकफॉल ऑफ अलक्लुइथ पीसी से मुलाकात हुई, यह मुलाकात भारत में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के दौरान हुई है। राज्यसभा में स्पीकर लॉर्ड मैकफॉल ऑफ अलक्लुइथ पीसी का स्वागत करते हुए उपराष्ट्रपति ने सम्मेलन में उनकी भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहाकि उनकी उपस्थिति भारत ब्रिटेन केबीच अनवरत मित्रता और मजबूत संसदीय संबंधों को उजागर करती है। उन्होंने कहाकि उनकी यह भारत यात्रा फलदायी और सुखद होगी, इससे उन्हें भारत की संसदीय परंपराओं, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों से गहराई से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उपराष्ट्रपति ने उनसे वार्ता करते हुए कहाकि भारत और ब्रिटेन का एक लंबा और दीर्घकालिक इतिहास है, जिसमें सदियों से विकसित होती संसदीय परंपराएं भी शामिल हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्पीकर लॉर्ड मैकफॉल ऑफ अलक्लुइथ पीसी से वार्ता में कहाकि भारत की संसदीय प्रणाली ने वेस्टमिंस्टर मॉडल से प्रेरणा ली है और साथही देश के अनूठे लोकतांत्रिक ढांचे को प्रतिबिंबित करने केलिए स्वाभाविक रूपसे विकसित हुई है। उपराष्ट्रपति ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए विधि के शासन, संसदीय विशेषाधिकार और कार्यपालिका की प्रभावी लोकतांत्रिक निगरानी केप्रति दोनों संसदों की साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने उत्तरदायित्व केसाथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर बल दिया और चेतावनी दीकि इसका उपयोग विघटनकारी गतिविधियों केलिए नहीं किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि ये साझा सिद्धांत आपसी ज्ञानवर्धन केलिए एक ठोस आधार बनाते हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल संबंधों की आधारशिला के रूपमें संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर दिया और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों केलिए आदान प्रदान कार्यक्रमों केप्रति भारत की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि भारत ने कई अंतर संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की है और उनमें भाग लिया है। उन्होंने कहाकि संयुक्त कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ज्ञान साझाकरण पहलों केलिए रास्ते तलाशना फलदायी होगा। उपराष्ट्रपति ने कहाकि डिजिटल नवाचार ने वैश्विक स्तरपर संसदीय कामकाज को बदल दिया है और भारत ने भी अपने संसदीय कामकाज के हिस्से के रूपमें ई-संसद प्रणाली, लाइव स्ट्रीमिंग और डिजिटल रिकॉर्ड को एकीकृत किया है। उपराष्ट्रपति ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स के डिजिटल पहलों को लागू करने के अनुभवों में रुचि व्यक्त की, विशेष रूपसे सुलभता बढ़ाने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के संबंध में। उन्होंने विधायी मसौदा तैयार करने में सहयोग, समिति की चर्चाओं को सुगम बनाने और नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने केलिए प्रौद्योगिकी के उपयोग से होने वाले संभावित लाभों पर प्रकाश डाला, जिससे दोनों देशों को पारस्परिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रमंडल सांसदों को विचारों का आदान-प्रदान करने, एकदूसरे से सीखने और लोकतांत्रिक मानकों को बनाए रखने केलिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है।
उपराष्ट्रपति ने सुझाव दियाकि भारत ब्रिटेन संसदीय और बहुपक्षीय मंचों के भीतर प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने केलिए मिलकर काम कर सकते हैं, इनमें महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देना, विधायी कार्रवाई से जलवायु परिवर्तन केप्रति लचीलापन मजबूत करना, शिक्षा के क्षेत्रमें समन्वय स्थापित करना, विशेष रूपसे उच्चशिक्षा को सॉफ्ट पावर के एक उपकरण के रूपमें उपयोग करना और शासन को अधिक समावेशी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने केलिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना शामिल है। उपराष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक मूल्यों केप्रति भारत की अटूट और साझा प्रतिबद्धता को दोहराया, जो दोनों देशों केबीच निरंतर सहयोग केलिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि यह यात्रा दोनों देशों केबीच संबंधों को और मजबूत करेगी और संयुक्त पहलों को प्रेरित करती रहेगी, जो राष्ट्रमंडल और विश्व केलिए एक आदर्श के रूपमें कार्य कर सकती हैं। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी इस अवसर पर उपस्थित थे।