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सीबीआई के बड़े घूसखोरों पर कड़ी कार्रवाई

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई हुई शर्मसार

प्रधानमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का तेज़ असर

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 25 October 2018 01:52:51 PM

cbi director alok verma and special director rakesh asthana

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार और कदाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का सीबीआई पर असर दिखाई दिया है। सीबीआई के घूसखोर शीर्ष अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिसके तहत सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्‍थाना की छुट्टी कर दी गई है, अब इन्हें कानून के सामने अपनी बेगुनाही सिद्ध करनी होगी। सीबीआई के और भी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है और माना जा रहा है कि देश की इस सबसे बड़ी जांच एजेंसी का विश्वास बहाल करने के लिए और भी अधिकारियों पर शिकंजा कस गया है। भारत सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सीबीआई की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी था, जिसके तहत सीवीसी की सिफारिश पर उन्हें हटाने की कार्रवाई की गई। सीबीआई निदेशक रहे आलोक वर्मा अपने बचाव में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और कहा है कि सीबीआई की स्वायत्तता खत्म करने की साजिश रची जा रही है, लेकिन यह उनका एक फेस सेविंग का दांव कहा जा रहा है। सामने आया है कि आलोक वर्मा, राकेश अस्‍थाना और सीबीआई में उनके गुर्गों ने जो खेल किया है, उससे पूरी सीबीआई शर्मसार है।
सीबीआई में घूसखोरी का घटनाक्रम ऐसे सामने आता है-केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी सीवीसी ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न आरोपों के संबंध में 24 अगस्त 2018 को मिली शिकायतों के बाद सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को 11 सितंबर 2018 को तीन अलग-अलग नोटिस (सीवीसी कानून 2003 की धारा 11 के तहत) भेजकर 14 सितंबर 2018 को आयोग के सामने संबंधित फाइलें और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। सीबीआई निदेशक को ये रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के कई मौके दिए गए और कई स्थगनों के बाद सीबीआई निदेशक ने 24 सितंबर 2018 को तीन सप्ताह के अंदर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आयोग को आश्वासन दिया था। लगातार आश्वासन और चेतावनी के बावजूद सीबीआई निदेशक आयोग के सामने रिकॉर्ड या फाइल प्रस्तुत करने में विफल रहे। सीवीसी ने पाया कि सीबीआई निदेशक गंभीर आरोपों के संबंध में आयोग को सहयोग नहीं कर रहे हैं, उन्होंने सीवीसी के निर्देशों के पालन में कभी रुचि नहीं दिखाई, बल्कि आयोग के कामकाज में जानबूझकर बाधा डालते रहे हैं।
सीबीआई में उभरे असाधारण और अभूतपूर्व हालात पर विचार करते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग ने डीपीएसई (सीबीआई) के कार्यकलाप पर अधीक्षण (सीवीसी कानून 2003 की धारा 8) की अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए भ्रष्टाचार रोक कानून 1988 के प्रावधानों के तहत सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को कामकाज, अधिकार, दायित्व और पहले से पंजीकृत मामलों में निरीक्षणात्मक भूमिका से मुक्त करने का आदेश जारी किया है, जो अगले आदेश तक लागू रहेगा। मीडिया को जानकारी दी गई है कि भारत सरकार उपलब्ध दस्तावेजों की जांच और मूल्यांकन के बाद इस बात से संतुष्ट हो गई है कि ऐसे असाधारण और अभूतपूर्व हालात पैदा हो गए हैं जिनमें सरकार को डीपीएसई कानून की धारा 4(2) के तहत मिली शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए। भारत सरकार ने अपने समक्ष उपलब्ध दस्तावेजों का मूल्यांकन किया और समानता, निष्पक्षता एवं नैसर्गिक न्याय के हित में सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को क्रमश:सीबीआई निदेशक और विशेष निदेशक के रूपमें उनके कामकाज, शक्ति, दायित्व और निरीक्षणात्मक भूमिका के निर्वहन पर रोक लगा दी है।
भारत सरकार की ओर से बताया गया है कि यह फैसला अंतरिम व्यवस्था के रूपमें लिया गया है और यह रोक मौजूदा असाधारण और अभूतपूर्व हालात पैदा करने वाले सभी मामलों में सीवीसी की जांच पूरी होने और सीवीसी और या सरकार के इस मामले में कानून के तहत उचित फैसला लेने तक बनी रहेगी। वर्णित पृष्ठभूमि के परिप्रेक्ष्य में कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने अनुमोदित किया है कि इस अंतरिम व्यवस्था की अवधि के दौरान तत्काल प्रभाव से सीबीआई निदेशक के दायित्वों और कार्यों का निर्वहन सीबीआई में संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव करेंगे। गौरतलब है कि यह पहला मौका है जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की साख पर सबसे बड़ा संकट आया है। सरकार ने सीबीआई के तेरह अफसरों के विरुद्ध तबादले, निलंबन और एफआईआर जैसी कड़ी कार्रवाई की है। विशेष सचिव सीबीआई राकेश अस्‍थाना के पास अत्यंत महत्वपूर्ण जांचें थीं, जिनमें उन्होंने मांस कारोबारी मुईन कुरैशी की अनैतिक सहायता के लिए घूस ली। राकेश अस्‍थाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अत्यंत विश्वासपात्र भी रहे हैं, लेकिन शिकायत की पुष्टि होने पर प्रधानमंत्री ने राकेश अस्‍थाना की एक सेकेंड में छुट्टी कर दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ नीति जगजाहिर है। प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के किसी सदस्य पर अभी तक भ्रष्टाचार का एक भी मामला नहीं है और एक राज्यमंत्री एमजे अकबर पर तीस साल पहले यौन शोषण का आरोप लगा था सो उन्होंने भी सरकार के राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सीबीआई देश की ऐसी जांच एजेंसी है, जिसपर देश के किसी भी मंत्री अधिकारी राजनेता, नौकरशाह, कारपोरेट, भारत सरकार के अधिकारी ‌के खिलाफ जांच और ट्रैप का अधिकार प्राप्त है। सीबीआई की कार्रवाई के कारण इनमें से कई का कैरियर समाप्त हो चुका है। सीबीआई में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद यह जांच एजेंसी पहलीबार घोर संदेह के दायरे में आ गई है, जिसपर भारत सरकार ने तत्काल कार्रवाई की और यह सिद्ध किया कि चाहे कोई कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो और कितने ही बड़े पद पर हो, उसके भ्रष्टाचार, कदाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई होगी और हुई। अब देखना है कि सीबीआई की कार्रवाई और कितनी आगे बढ़ती है एवं कितने और भ्रष्टाचारी एवं घूसखोर कानून की पकड़ में आते हैं।

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