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राष्ट्रपति के चार वर्ष के कार्यकाल पर स्मृति पुस्तकें

उपराष्ट्रपति एवं एल मुरुगन ने राष्ट्रपति को भेंट किया पुस्तकों का सेट

'राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु का कार्यकाल एक मील का पत्थर'

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Wednesday 29 July 2026 01:04:03 PM

commemorative books on the president's four-year term

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यकाल के चार साल पूरे होने पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ एल मुरुगन ने स्मृति पुस्तकों के पहले सेट का विमोचनकर उन्हें राष्ट्रपति को भेंट किया। ये पुस्तकें हैं-'राष्ट्रपति भवन : राष्ट्र का भवन' (राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यकाल के प्रथम वर्ष पर आधारित), 'सेवा और संवेदना' (कार्यकाल के द्वितीय वर्ष पर आधारित), 'समावेशी सहभागिता' (कार्यकाल के तृतीय वर्ष पर आधारित), 'भारतीयता का उत्सव' (कार्यकाल के चतुर्थ वर्ष पर आधारित)। ये किताबें सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग ने प्रकाशित की हैं। ओडिया भाषा में भी एक किताब आमा राष्ट्रपति आमा गौरव भी जारी की गई, यह राष्ट्रपति पर लिखे लेखों का संग्रह है। राष्ट्रपति ने इस मौके पर राष्ट्रपति भवन में कई पहले शुरू कीं। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहाकि उनका निरंतर प्रयास रहा हैकि राष्ट्रपति भवन भारत की समृद्ध परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय आदर्शों का एक जीवंत प्रतीक बना रहे। राष्ट्रपति ने कहाकि इन पुस्तकों के शीर्षक समावेशी लोकतंत्र में हमारे विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने भरोसा जतायाकि तस्वीरों पर आधारित ये किताबें पाठकों को राष्ट्रपति भवन की परंपराओं, कामकाज और कई पहलुओं से परिचित कराएंगी। उन्होंने कहाकि इनकी असली अहमियत इस बातमें हैकि ये देशवासियों को अपनी विरासत पर गर्व करते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ने केलिए प्रेरित करती हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 25 जुलाई 2026 को अपने कार्यकाल के चार वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। उन्होंने कहाकि जब उन्होंने 25 जुलाई 2022 को भारत के राष्ट्रपति का पद संभाला तो यह उनके लिए सम्मान से कहीं ज़्यादा एक ज़िम्मेदारी का काम था। उन्होंने कहाकि इन चार वर्ष में उन्होंने इसी ज़िम्मेदारी की भावना से अपने कर्तव्यों का पालन किया है। उन्होंने कहाकि जबभी वह राष्ट्रपति भवन में या अलग-अलग राज्यों की यात्राओं के दौरान लोगों खासकर युवाओं से मिलती हैं तो वह उन्हें नैतिक मूल्यों से जुड़े रहने और देश तथा समाज के विकास केलिए काम करने केलिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहाकि वह महिलाओं से आत्मनिर्भर बनने और आत्मविश्वास केसाथ तरक्की की राह पर आगे बढ़ने का आग्रह करती हैं। आदिवासियों से बातचीत करते हुए वह उनसे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अनुरोध करती हैं, जबभी वह विदेश यात्रा पर जाती हैं तो उन देशों में भारतीय समुदाय से मिलती हैं और उन्हें भारत की विकास यात्रा में योगदान देने केलिए प्रोत्साहित करती हैं। झारखंड के राज्यपाल के तौरपर अपना कार्यकाल याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह मौका उनके लिए खासतौर पर व्यक्तिगत महत्व रखता है। उन्होंने बतायाकि राज्यभर में अपनी व्यापक यात्राओं के दौरान हर वर्ग के लोगों ने द्रौपदी मुर्मु के राज्यपाल के कार्यकाल केबारे में बहुत गर्मजोशी और सम्मान केसाथ बात की।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि उन्होंने देखाकि नागरिक द्रौपदी मुर्मु के उस गरिमामयी रूप को प्यार से याद करते हैं, जिसके साथ उन्होंने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाईं, लोगों केसाथ उनका गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव और जनजातीय समुदायों, वंचितों, युवाओं केप्रति उनकी सहानुभूति और सच्ची चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहाकि इस तरह की सद्भावना केवल पद से नहीं कमाई जा सकती, यह चरित्र करुणा और लोगों केप्रति समर्पण से कमाई जाती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई कई पहलों का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने ऐतिहासिक मुगल गार्डन का नाम अमृत उद्यान करने, देहरादून में राष्ट्रपति निकेतन और राष्ट्रपति तपोवन को जनता केलिए खोलने, राष्ट्रपति भवन को दिव्यांगजनों केलिए अधिक अनुकूल बनाने के प्रयासों और सर एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह भारत के अंतिम गवर्नर जनरल भारतरत्न चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगाने का ज़िक्र किया। उन्होंने कहाकि ये पहल राष्ट्रीय संस्थानों को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करने और राष्ट्रपति पद की संस्था को लोगों के करीब लाने के सचेत प्रयास को दर्शाती हैं। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि सेवा और संवेदना उन सेवाओं के मूल्यों और सहानुभूति को उजागर करती है, जो राष्ट्रपति मुर्मु के सार्वजनिक जीवन की पहचान रहे हैं, जबकि समावेशी सहभागिता इस बात में उनके विश्वास को दर्शाती हैकि भारत का विकास समावेशी व सबकी भागीदारी केसाथ होना चाहिए।
सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि भारतीयता का उत्सव भारत की सभ्यता के शाश्वत मूल्यों और इसकी अद्भुत सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाता है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रपति ने लगातार भारत की सांस्कृतिक समृद्धि, स्थानीय परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को उजागर किया है, जो विविधता का जश्न मनाते हुए भी देश को एकजुट रखती हैं। राष्ट्रपति द्वारा ओल चिकी लिपि में संथाली भाषा में भारत के संविधान को जारी किए जाने को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहाकि इस पहल ने जनजातीय समुदाय के सदस्यों को गर्व की भावना से भर दिया और भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने केप्रति देश की प्रतिबद्धता को फिरसे दोहराया। राष्ट्रपति भवन में पुस्तक विमोचन में सूचना और प्रसारण तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्यमंत्री डॉ एल मुरुगन भी मौजूद थे। उन्होंने कहाकि ये पुस्तकें देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं और ये आनेवाली पीढ़ियों केलिए संदर्भ पुस्तकों के रूपमें अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहाकि राष्ट्रपति के तौरपर द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल इन किताबों में एक 'मील का पत्थर' के तौरपर दर्ज है।

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