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भारत और उत्तर मैसीडोनिया के रिश्तों में गर्मजोशी

संसद जनता की आज़ादी और उसके अधिकारों की रक्षक-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मैसीडोनिया की असेम्‍बली में संबोधन

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Wednesday 22 July 2026 02:30:38 PM

president droupadi murmu's address to the assembly of macedonia

स्‍कोप्‍ये/ नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इन दिनों मध्य और पूर्वी यूरोप देशों के दौरे पर हैं। राष्ट्रपति ने उत्तर मैसीडोनिया की असेम्‍बली को संबोधित किया। उन्होंने कहाकि भारत, उत्तर मैसीडोनिया गणराज्य को कोई दूर का देश नहीं, बल्कि एक सुस्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य निर्माण में एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारत और उत्तर मैसीडोनिया के संबंधों की शुरुआत दो हजार वर्ष से पहले हुई थी। उन्होंने कहाकि यहां के योद्धाओं और व्यापारियों की भारत की ऐतिहासिक यात्राओं से व्यापार, दर्शन और कला केलिए महत्वपूर्ण मार्ग खोले, जिससे भारत और उत्तर मैसीडोनिया की सभ्यताएं आपस में जुड़ती गईं। राष्ट्रपति ने जनप्रतिनिधियों से कहाकि लोकतंत्र केवल शासन चलाने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि भारत और उत्तर मैसीडोनिया को जोड़ने वाला एक साझा विश्वास है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि हमारी संसदें जनता की आज़ादी की रक्षक हैं, कानून बनाने वाली संस्थाएं हैं और हमारी राष्ट्रीय चेतना का दर्पण हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि यही कारण हैकि संसदीय कूटनीति बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहाकि संसद सदस्यों केबीच आपसी बातचीत और संवाद से ऐसा संस्थागत विश्वास बनता है, जो राजनीतिक दौर बदलने केबाद भी कायम रहता है। उन्होंने उत्तर मैसीडोनिया के सांसदों से आग्रह कियाकि वे नई दिल्ली और स्कोप्‍ये केबीच यात्रा करें और संसदीय कार्यप्रणाली एवं लोकनीति निर्माण विषयक सर्वश्रेष्‍ठ कार्यपद्धतियों को साझा करें। राष्ट्रपति ने उल्‍लेख कियाकि विश्‍व की राजनीतिक और आर्थिक ताकत का केंद्र बदल रहा है, इस दौर में भारत दक्षिण पूर्वी यूरोप को हाशिए पर पड़े क्षेत्र केतौर पर नहीं, बल्कि विकास और नवाचार का एक उभरता हुआ क्षेत्र मानता है। राष्ट्रपति ने कहाकि उत्तरी मैसेडोनिया इस बदलाव के केंद्र में है, यह भूमध्यसागर को मध्य यूरोप तथा पूर्व को पश्चिम से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारत व्यापार और निवेश के नए मौकों के जरिए द्विपक्षीय स्तरपर और पूरे क्षेत्रमें अपने जुड़ाव को बढ़ाने केलिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपति ने कहाकि कोईभी देश अकेले प्रगति नहीं कर सकता। उन्‍होंने कहाकि भारत की प्राचीन सभ्यतागत जीवन दृष्‍टि 'वसुधैव कुटुंबकम' के शाश्वत सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है-पूरा विश्‍व एक परिवार है। उन्होंने कहाकि आज जब विश्‍व संघर्षों और आर्थिक विभाजन का सामना कर रहा है, तब यह जीवन दृष्‍टि हमें दीवारें खड़ी करने के बजाय आपसी सहयोग और विश्वास के पुल बनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहाकि इतिहास से जुड़े और उज्ज्वल भविष्य की साझा दृष्टि रखने वाले दो लोकतांत्रिक देशों के रूपमें हमें मिलकर ऐसा मार्ग प्रशस्त करना चाहिए, जो हमारे लोगों केलिए शांति और समृद्धि लाए। इस अवसर पर उत्तर मैसीडोनिया की राष्ट्रपति डॉ गोर्डाना सिलजानोव्स्का दावकोवा भी उपस्थित थीं।
उत्‍तर मैसिडोनिया की संसद में संबोधन से पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत-उत्‍तर मैसिडोनिया व्‍यापारिक मंच में उद्घाटन भाषण दिया। इसमें उत्‍तर मैसिडोनिया सरकार के सदस्य, भारत और उत्‍तर मैसिडोनिया के बिजनेस लीडर्स और दोनों देशों के उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। राष्ट्रपति ने कहाकि यह उत्तर मैसिडोनिया में किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। यह दोनों देशों के साझा हित के सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने केप्रति भारत की गहरी रुचि को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि भारत और उत्‍तर मैसिडोनिया केबीच आर्थिक और वाणिज्‍यिक संबंध एक ऐसा नया क्षेत्र है, जिसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहाकि दोनों देशों केबीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसकी मौजूदा मात्रा उन संभावनाओं का केवल एक छोटासा हिस्सा है, जिन्हें अभी हासिल किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने कहाकि व्यापार से आगे बढ़कर आर्थिक साझेदारी की ओर बढ़ने केलिए हमें एक-दूसरे के यहां निवेश अवश्‍य बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहाकि नए निवेश केलिए कई क्षेत्रों में गुंजाइश है, जिनमें डिजिटल नवाचार और एआई, फार्मास्युटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा, कृषि प्रसंस्करण और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिसन शामिल हैं। उन्होंने उत्‍तर मैसिडोनिया को अगले वर्ष भारत में होनेवाले वर्ल्ड ऑडियो विज़ुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (वेव्‍स) में भाग लेने केलिए आमंत्रित किया। राष्ट्रपति ने स्टार्टअप्‍स, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और टेक्नोलॉजी कंपनियों केबीच साझेदारियों को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहाकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रोंमें भी सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहाकि दोनों देशों के उद्योग जगत को आगे आकर लाभकारी परियोजनाओं की पहचानकर लंबे समय तक चलने वाले व्यापारिक संबंध बनाने में पहल करनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहाकि दोनों देशों के वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों, निवेश एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों से आग्रह कियाकि वे आपस में संपर्क बनाएं और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आपसी दौरों को प्रोत्‍साहित करें। उन्होंने कंपनियों से यह आग्रह भी कियाकि वे केवल तत्काल होने वाले व्यापारिक सौदों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रौद्योगिकी अंतरण, संयुक्त उद्यम, स्थानीय स्तरपर मूल्य संवर्धन और रोज़गार सृजन पर आधारित दीर्घकालिक भागीदारियों में निवेश करें। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त कियाकि यह व्यापार मंच नए विचारों को जन्म देगा और भारत तथा उत्तर मैसिडोनिया केबीच सहयोग के नए अवसर एवं रास्ते खोलेगा।

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