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स्वदेशी प्रक्षेपण यान विक्रम-1 का अंतरिक्ष आगमन

प्रधानमंत्री ने दी स्काईरूट एयरोस्पेस टीम को बधाई और शुभकामनाएं

भारत में निजी अंतरिक्ष उद्योग की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ा

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 18 July 2026 05:14:28 PM

vikram-1 launch successfully under mission aagaman

हैदराबाद/ नई दिल्ली। भारत के पहले स्वदेशी प्रक्षेपण यान विक्रम-1 ने आज श्रीहरिकोटा सतीश धवन स्पेस सेंटर से अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान सफलतापूर्वक भरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर विक्रम-1 की स्काईरूट एयरोस्पेस टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ी छलांग बताया। उन्होंने कहाकि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं केलिए एक नए आयाम का द्वार खोलता है और नवाचार, प्रौद्योगिकी व उद्यमशीलता में देश की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त कीकि यह उपलब्धि अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने और निडर होकर नवाचार केलिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहाकि यह चार चरणों वाला रॉकेट तेज़ीसे और मांग के अनुसार प्रक्षेपण सेवाएं प्रदान करने केलिए डिज़ाइन किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहाकि यह मिशन हमारे युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता की भावना को उजागर करता है, यह दिखाता हैकि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधार नवाचार और उद्यम केलिए नए अवसर कैसे खोल रहे हैं।
मिशन आगमन के तहत विक्रम-1 का प्रस्तावित प्रक्षेपण केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की बढ़ती क्षमता, आत्मविश्वास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का भी प्रतीक है। विक्रम-1 भारत की बढ़ती प्राइवेट सेक्टर लॉंच क्षमताओं को दिखाता है। ज्ञातव्य हैकि भारत सरकार के दूरदर्शी सुधारों के चलते देश का अंतरिक्ष क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्रमें महत्वपूर्ण सुधारों से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और नवाचार के नए अवसरों को प्रोत्साहित करने वाले कई अहम कदम उठाए हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस के भारत के पहले निजीतौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 के प्रक्षेपण की तैयारी इस परिवर्तन का प्रतीक है। भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 ने पूरी स्पेस वैल्यू चेन को निजी क्षेत्र केलिए खोल दिया है, जिससे नवाचार, निवेश और उद्यमिता को नई गति मिली है। भारतीय उद्योग उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों और डाउनस्ट्रीम सेवाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इन सुधारों का प्रभाव आंकड़ों में भी स्पष्ट है। वर्ष 2014 में केवल एक स्पेस स्टार्टअप वाला भारत 2026 तक 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स का देश बन चुका है, जो निजी भागीदारी और नवाचार के तेजीसे बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।
स्काईरूट एयरोस्पेस का प्रक्षेपण यान विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौरपर विकसित ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान है, जो 350 किलोग्राम तकके पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है। ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान उपग्रहों को पृथ्वी की निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करते हैं, जिससे संचार, नौवहन, पृथ्वी अवलोकन और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसी सेवाओं को बढ़ावा मिलता है। विक्रम-1 को पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर, भरोसेमंद सॉलिड-फ्यूल बूस्टर और 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से बनाया गया है। इसरो के नेतृत्व में आरंभ हुई भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब एक सशक्त और आत्मनिर्भर अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के रूपमें विकसित हो रही है, जो नरेंद्र मोदी सरकार के सुधारों की सफलता को रेखांकित करती है। निरंतर नीतिगत समर्थन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और तकनीकी नवाचार के बल पर भारत वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूपमें अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है और भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

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