देशभर के कारीगरों की कलाकृतियों और कौशल का प्रदर्शन
स्वदेशी उत्पादों को ख़रीदकर उन्हें बढ़ावा दें-किरेन रिजिजूस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Sunday 12 July 2026 04:14:33 PM
देहरादून। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विकास निगम के सहयोग से देहरादून के परेड ग्राउंड में छठे 'लोक संवर्धन पर्व' का आयोजन किया है। इस पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने किया। आयोजन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास भी उपस्थित थे। किरेन रिजिजू ने इस अवसर पर कहाकि भारत सरकार किसी धर्म लिंग या समुदाय से बिना किसी भेदभाव के ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहाकि 'लोक संवर्धन पर्व' कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों केलिए अपनी प्रतिभा, पारंपरिक शिल्प कौशल और उत्पादों को प्रदर्शित करने के राष्ट्रीय मंच के रूपमें उभरा है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी में इस आयोजन और देशभर के कारीगरों की कलाकृतियों एवं कलाकौशल के शानदार प्रदर्शन करने एवं राज्य के स्नेह और आतिथ्य का अनुभव भी करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। किरेन रिजिजू ने कहाकि 'लोक संवर्धन पर्व' केवल अल्पसंख्यकों केलिए ही नहीं, बल्कि सभी भारतीयों केलिए एक उत्सव है, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और इसके साथही स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने केलिए समर्पित है। प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए किरेन रिजिजू ने नागरिकों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को खरीदकर उन्हें प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। प्रदर्शनी में देशभर के हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय व्यंजनों का व्यापक रूपसे प्रदर्शन किया गया है।
किरेन रिजिजू ने कहाकि ऐसी पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हुए पारंपरिक आजीविकाओं को मजबूत करती है। उन्होंने कहाकि मानसून केबाद वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केसाथ परामर्श करके उत्तराखंड के अंदरूनी क्षेत्रों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहाकि शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और बाज़ार पहुंच से अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण केलिए मंत्रालय पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों के प्रति गर्व की एक नई भावना पैदा की है। उन्होंने कहाकि एक समय था, जब आयातित सामानों को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था, आज लोग गर्व से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों का चयन करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं। किरेन रिजिजू ने कहाकि लोक संवर्धन पर्व इस बदलती मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें देशभर के कारीगरों केलिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करते हुए हमारी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया जाता है।
पुष्कर सिंह धामी ने कहाकि पहलीबार लोक संवर्धन पर्व का आयोजन करना उत्तराखंड केलिए गौरव की बात है। उत्तराखंड इस प्रमुख कार्यक्रम के आयोजन केलिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ सहयोग करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य भी बन गया है। उन्होंने खुशी व्यक्त कीकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड में व्यापक रूपसे यात्रा की है और वे देवभूमि उत्तराखंड के दूरदराज के क्षेत्रों से भी अच्छी तरह परिचित हैं, यह उत्सव उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को विभिन्न राज्यों की समृद्ध कारीगर विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल से परिचित कराएगा, हमारे कारीगरों को भी अपने कौशल का प्रदर्शन करने का मंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहाकि उत्तराखंड सरकार विभिन्न केंद्रित पहलों के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण केलिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उल्लेख कियाकि आर्थिक रूपसे कमजोर अल्पसंख्यक छात्रों को पहली कक्षा से पीएचडी स्तर तक छात्रवृत्ति दी जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में विकासकार्य किए जा रहे हैं, मुख्यमंत्री हुनर योजना में पात्र लाभार्थी उद्यमिता और स्वरोज़गार को बढ़ावा देने केलिए 20 लाख रुपये तकके सावधि ऋण का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहाकि हाउस ऑफ हिमालय और वन डिस्ट्रिक्ट टू प्रोडक्ट्स स्कीम जैसी पहलों के माध्यम से भी हम उत्तराखंड के अद्वितीय स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्पों को देशभर के बाजारों में ले जा रहे हैं।
लोक संवर्धन पर्व को भारत सरकार के अल्पसंख्यककार्य मंत्रालय में सचिव डॉ श्रीवत्स कृष्ण और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव एसपी रॉय ने भी संबोधित किया। सचिव डॉ श्रीवत्स कृष्ण ने बतायाकि 2024 में लोक संवर्धन पर्व की शुरूआत से लेकर दो वर्ष से भी कम समय में देश के कोने-कोने में इसका आयोजन किया जा रहा है, जिससे कारीगरों और उद्यमियों केलिए एक जीवंत मंच उपलब्ध हुआ है। उन्होंने कहाकि देहरादून का आयोजन 'देवभूमि उत्तराखंड' में इस उत्सव का पहला पड़ाव है, जहां लगभग 90 महिला कारीगरों सहित लगभग 150 कारीगर अपनी शिल्प कौशल और नारीशक्ति की भावना का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि लोक संवर्धन पर्व प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो समावेशी विकास को बढ़ावा देता है और देशभर के कारीगरों को सशक्त बनाता है। समारोह में गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। उत्तराखंड सरकार ने छठे लोक संवर्धन पर्व के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक लिफाफा जारी किया।
लोक संवर्धन पर्व में भारतभर से पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र और विरासत शिल्प को प्रदर्शित करने वाले लगभग 150 प्रदर्शनी स्टॉल हैं। लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखंड की कला और शिल्प के हैं, जो स्थानीय कारीगरों को अपनी शिल्प कौशल का प्रदर्शन करने केलिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। शेष स्टॉल विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विविध कलात्मक परंपराओं को दर्शाते हैं, जिनमें उत्तराखंड हस्तशिल्प, अजरख ब्लॉक प्रिंट, लाख कंगन, लकड़ी के बर्तन, पीतल के बर्तन, टेराकोटा, बेंत और बांस के उत्पाद, हथकरघा वस्त्र और कई अन्य पारंपरिक कलाकृतियों सहित प्रसिद्ध शिल्प प्रदर्शित किए गए हैं। उत्सव में ज्योति नूरां, किशन महिपाल, विवेक नौटियाल, माया उपाध्याय, पांडवास और परमीश वर्मा द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें दर्शकों को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत का शानदार अनुभव मिलेगा, खाने-पीने के स्टॉल लगाए गए हैं, जहां उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी और कुमाऊंनी व्यंजनों केसाथ देश के लोकप्रिय व्यंजन भी शामिल हैं।
लोक संवर्धन पर्व 15 जुलाई 2026 तक चलेगा। यहां सुबह 11:30 बजे से रात 9 बजे आया जा सकता है। उत्सव में कुशल कारीगरों के लाइव शिल्प प्रदर्शन देखने, खरीदार-विक्रेता से बातचीत करने और उद्यमिता और डिजिटल विपणन सत्रों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। ये सत्र कारीगरों और उद्यमियों केलिए बाज़ार तक पहुंच और व्यापार के अवसरों को बेहतर बनाने केलिए हो रहे हैं। यह पहल मंत्रालय के नए ज़ोश को दर्शाती है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम के सहयोग से अबतक पांच लोक संवर्धन पर्व आयोजित किए हैं। इससे 550 से अधिक कारीगरों, बुनकरों और खानपान के विशेषज्ञों को फ़ायदा हुआ है। इससे उद्यमिता, बाजार पहुंच और आर्थिक समावेशन केलिए बेहतर अवसरों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और कारीगरों को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई है।