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'भारत अपनी रक्षा आवश्‍यकताएं पूरी करने में सक्षम'

ऑपरेशन सिंदूर स्वदेशी रक्षा उपकरणों की क्षमताओं का शानदार उदाहरण

रक्षामंत्री ने किया अत्याधुनिक एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस का भूमि पूजन

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Friday 19 June 2026 07:01:18 PM

aluminium extrusion press installed in nagpur

नागपुर। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हैकि जो देश अपनी आवश्‍यकताओं को पूरा करने में सक्षम होता है, वह अपने हितों की रक्षा करने में सबसे ज्‍यादा आत्‍मविश्‍वास केसाथ आगे बढ़ता है। राजनाथ सिंह ने यह बात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस केसाथ यंत्र इंडिया लिमिटेड की इकाई आयुध निर्माणी अंबाझरी नागपुर में अत्याधुनिक 10000 टन एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस के भूमि पूजन पर कही। राजनाथ सिंह ने कहाकि यह एक्सट्रूज़न प्रेस भारत की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आयात पर निर्भर रहने के बजाय महत्‍वपूर्ण सामग्रियों का स्‍वेदश में निर्माण किया जा रहा है। उन्‍होंने कहाकि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भविष्य केलिए तैयार रहने हेतु सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं पर देश का स्‍वयं नियंत्रण स्‍थापित करना अत्‍यंत जरूरी है।
रक्षामंत्री ने कहाकि यह एक्सट्रूज़न प्रेस एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है, आधुनिक लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और उन्नत अंतरिक्ष कार्यक्रमों केलिए ऐसी धातुओं की आवश्यकता होती है, जो हल्की और मजबूत हों तथा अत्‍यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों का भी सामना कर सकें। उन्होंने कहाकि ऐसी धातुएं विशेष प्रक्रियाओं से उत्पादित की जाती हैं और यदि धातु की गुणवत्ता उत्कृष्ट होगी तो वह हर स्थिति में प्रभावी सिद्ध होगी। उन्होंने कहाकि एक्सट्रूज़न प्रेस देश में अपनी तरह की सबसे उन्नत सुविधाओं में एक होगा, यह रक्षा प्रणालियों और प्लेटफार्मों, एयरोस्पेस, विमानन संरचनाओं, मिसाइल कार्यक्रमों, रेलवे और परिवहन क्षेत्रों तथा रणनीतिक औद्योगिक अनुप्रयोगों केलिए आवश्यक बड़े और जटिल एल्यूमीनियम मिश्र धातु प्रोफाइल के निर्माण में सहायक होगा। रक्षामंत्री ने कहाकि यह परियोजना एल्यूमीनियम एक्सट्रूज़न के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद करेगी, साथही स्वदेशी उत्पादन से रणनीतिक क्षेत्रों में भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगी।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में देश में निर्मित रक्षा उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर राजनाथ सिंह ने रक्षाबलों के कर्मियों की वीरता को और निखारने केलिए मजबूत हार्डवेयर के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। रक्षामंत्री ने कहाकि आज युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और शत्रु की पहचान पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गई है, लेकिन पारंपरिक और उससे जुड़े साधनों का महत्‍व आजभी उतना ही है, जितना 1947 में था और 2047 तकभी ये काफी हदतक बना रहेगा। उन्होंने कहाकि एक मजबूत सैन्य औद्योगिक आधार का महत्व लंबे समय तक बना रहेगा और एक्सट्रूज़न प्रेस भविष्य की राष्ट्रीय आवश्यकता को पूरा करने का कदम है। राजनाथ सिंह ने कहाकि सरकार के निरंतर प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं, क्योंकि घरेलू रक्षा उत्पादन जो 2014 में 46,000 करोड़ रुपये था, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहाकि देश 2014 में 1000 करोड़ रुपये से कम मूल्य के हथियार और उपकरण निर्यात कर रहा था, जो अब बढ़कर सर्वकालिक उच्चस्तर 38424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
राजनाथ सिंह ने कहाकि यह केवल संख्या में वृद्धि नहीं, बल्कि भारत की क्षमताओं में वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि हम अगले 2-3 वर्ष केलिए निर्धारित लक्ष्य-3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात को समय से पहले हासिल करने केलिए तैयार हैं। रक्षामंत्री ने कहाकि बदलते समय और उभरती प्रौद्योगिकियों को ध्यान में रखते हुए प्रणाली को अधिक मजबूत और चुस्त बनाने केलिए आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण किया गया था और वाईआईएल उसी परिवर्तन का परिणाम है। उन्होंने कहाकि निगमीकरण केबाद हमारा उद्देश्‍य थाकि सार्वजनिक क्षेत्रकी नई रक्षा इकाईयों को पर्याप्त परिचालन स्वायत्तता मिलेगी और उन्हें नवाचार, जोखिम लेने, अनुसंधान और निर्यात के क्षेत्रमें बढ़ने के अवसर प्राप्‍त हों। राजनाथ सिंह ने अनुसंधान एवं विकास और पूंजी निवेश को आजकी प्रतिस्पर्धी दुनिया में किसी औद्योगिक इकाई को बढ़ावा देने वाला प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहाकि दीर्घकालिक प्रगति और प्रतिस्पर्धा केलिए अनुसंधान विकास अत्यंत जरूरी है और नवाचार को अपनाने वाले संगठन ही भविष्य का नेतृत्व करते हैं।
रक्षामंत्री ने कहाकि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को कुशल मशीनरी की स्थापना और आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता केलिए नवीनतम प्रौद्योगिकी और उन्नत उत्पादन प्रणालियों में निवेश आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि इससे यह सुनिश्चित होगाकि कॉर्पोरेट संस्थाएं राष्ट्रीय अपेक्षाओं पर खरी उतरेंगी और वैश्विक मानकों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएंगी। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्रके रक्षा उपक्रमों से बदलते समय केसाथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ने केलिए जहां भी आवश्यक हो, सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने और उन्हें अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहाकि दुनिया भारत के रक्षा क्षेत्र के विकास को स्‍वीकार कर रही है, और ऑपरेशन सिंदूर को नए भारत की प्रौद्योगिकीय और अनूठी क्षमताओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहाकि डीपीएसयू और निजी क्षेत्र केबीच बढ़ता सहयोग देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि ये एक्सट्रूज़न प्रेस नागपुर और पूरे क्षेत्र को रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की प्राप्ति का महत्वपूर्ण केंद्र बनाएगा।

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