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पूर्वोत्तर में तेल गैस मिनरल्स के अकूत भंडार!

केंद्र, असम और नागालैंड केबीच ऐतिहासिक उत्खनन समझौता

गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ समझौते पर हस्ताक्षर

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 12 June 2026 11:54:23 AM

historic exploration agreement between the centre, assam, and nagaland.

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में तेल गैस मिनरल्स के अकूत भंडार की खोज केलिए गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार केबीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इस मौके पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंता बिस्वा सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, केंद्र, असम एवं नागालैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। गृहमंत्री ने इस अवसर पर कहाकि इस समझौते से तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण और खनिज के खनन की संभावना बनेगी, साथही पूर्वोत्तर सहित पूरे देश के सामने रखी गई समृद्ध उत्तर-पूर्व की संकल्पना की राह में बहुत बड़ी बाधा दूर हुई है। अमित शाह ने कहाकि पूर्वोत्तर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से आगे बढ़ रहा है और आशा हैकि असम एवं नागालैंड परस्पर सहयोग के जरिए तेल गैस मिनरल्स उत्खनन में कोई बाधा नहीं बनेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रीय संपदा है। गृहमंत्री ने कहाकि नागालैंड के मुख्यमंत्री ने बताया हैकि छह फील्ड्स के अलावा नागालैंड में तेल की खोज केलिए राज्य सरकार पूरी तरह सहमत है। उन्होंने कहाकि असम सरकार भी इससे सहमत है, क्योंकि यह सभी केलिए ‘विन-विन सिचुएशन’ है। गृहमंत्री ने कहाकि इस समझौते से पूरे नॉर्थ-ईस्ट में खनिजों के खनन का रास्ता साफ होगा।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि नॉर्थ-ईस्ट में न केवल तेल और गैस, बल्कि खनिजों का असीम भंडार है। उन्होंने कहाकि इस एमओयू से हमारी 1000-1500 बैरल प्रतिदिन की दोहन क्षमता के दस गुना से अधिक बढ़ने की संभावना है। गृहमंत्री ने विश्वास जतायाकि नागालैंड में उपलब्ध तेल और गैस का उत्खनन होने पर इस क्षेत्रमें विदेशों पर हमारी निर्भरता काफी हदतक कम हो सकेगी। उन्होंने कहाकि समझौते के अभाव और कुछ चुनौतियों के कारण लंबे समय तक दोनों राज्यों का आर्थिक विकास प्रभावित हुआ था, लेकिन यह समझौता असम और नागालैंड के आर्थिक विकास केलिए बड़ा राजमार्ग खोलेगा। उन्होंने कहाकि सहकारी संघवाद का इस त्रिपक्षीय समझौते से बड़ा उदाहरण कुछ नहीं हो सकता। गृहमंत्री ने कहाकि वर्ष 2019 केबाद अलग-अलग प्रकार के 12 समझौते हुए हैं, जिससे पूर्वोत्तर में शांति सुनिश्चित हुई और हिंसा में करीब 80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। उन्होंने कहाकि नॉर्थ-ईस्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर जिस गति से बढ़ा है, वह इन समझौतों के बिना संभव नहीं था। गृहमंत्री ने कहाकि नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में नॉर्थ-ईस्ट में पर्यटन एवं निवेश बढ़ा है और औद्योगिक शांति के कारण निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ा है। उन्होंने जिक्र कियाकि पूर्वोत्तर में 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून से मुक्त हो चुका है और एक-दो राज्य को छोड़कर अगले साल पूरे नॉर्थईस्ट से अफस्पा को समाप्त कर दिया जाएगा।
अमित शाह ने कहाकि ऊर्जा के बिना किसी देश का विकास संभव नहीं है, अमेरिका, ईरान और इजराइल के संघर्षों के कारण हम और पूरी दुनिया गहरे संकट से गुजर रही है। उन्होंने कहाकि यह त्रिपक्षीय समझौता इस वैश्विक संकट में भारत केलिए कितनी जल्दी मददगार साबित होगा, यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन समय आने पर इससे भारत को काफी सुकून मिलेगा और हम अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। गृहमंत्री ने कहाकि इस समझौते से खनिजों के खनन की संभावनाएं बढ़ी हैं और छह फील्ड्स के अलावा नागालैंड में हर जगह एक्सप्लोरेशन की संभावना में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे दोनों राज्य न केवल समृद्ध होंगे, बल्कि आपसी सद्भाव भी बढ़ेगा और विकास को नई गति मिलेगी। गृहमंत्री ने उम्मीद जताईकि नॉर्थईस्ट के सारे विवाद, चाहे वह सीमा से जुड़ा हो या कानून व्यवस्था से धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहाकि अलग-अलग समूहों केसाथ समझौते हो चुके हैं, पचास से अधिक सीमा विवाद हम सुलझा चुके हैं और आज एक नई शुरुआत हो रही है। अमित शाह ने कहाकि यह उत्तर-पूर्व के स्वर्णिम भविष्य केलिए आशा और विश्वास को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहाकि यह समझौता भारत सरकार, असम और नागालैंड राज्य सरकारों की पहचाने गए रुचि वाले क्षेत्रमें पेट्रोलियम की खोज और उत्पादन गतिविधियों केलिए एक स्थिर, सुरक्षित और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत सरकार, असम और नागालैंड केबीच इस एमओयू के जरिए क्षेत्रमें खनिज तेल से जुड़े कामकाज को सुविधाजनक बनाने का एक समन्वित ढांचा स्थापित किया गया है जैसे-परिचालन संबंधी निरंतरता, कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा, हितधारकों केबीच प्रभावी समन्वय। यह ढांचा खोज और उत्पादन गतिविधियों को सहायता प्रदान करेगा, अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्यों में योगदान देगा। गृह मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, असम और नागालैंड की सरकारों केसाथ यह पहल की थी। इस समझौते से इलाके में चल रहे और भविष्य के हाइड्रोकार्बन ऑपरेशंस केलिए ज़्यादा निश्चितता और स्थिरता मिलने की उम्मीद है। यह एमओयू सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने वाले हितधारकों केबीच सहकारी संघवाद और रचनात्मक जुड़ाव की भावना को रेखांकित करता है। गौरतलब हैकि भारत सरकार देशभर में सहयोगी और पारदर्शी तरीकों से खोज व उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने केलिए प्रतिबद्ध है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।

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