रक्षामंत्री ने लखनऊ में किया 'नौसेना शौर्य वाटिका' का उद्घाटन
आईएनएस गोमती की कलाकृतियां एवं हथियार प्रणालियां प्रदर्शितस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 30 May 2026 05:44:33 PM
लखनऊ। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ में 'नौसेना शौर्य वाटिका' का संयुक्त रूपसे उद्घाटन किया। दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में 19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह खुला संग्रहालय भारतीय नौसेना की भावना, वीरता और पराक्रम को समर्पित है, इसमें आईएनएस गोमती की कलाकृतियों और हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया है, जिसे 34 वर्ष की सेवा केबाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त कर दिया गया था। रक्षामंत्री ने नौसेना शौर्य वाटिका को न केवल एक पर्यटन स्थल बताया, बल्कि एक प्रेरणा का प्रतीक भी कहा, जो आनेवाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत की याद दिलाएगा। उन्होंने कहाकि यह पार्क देश की सुरक्षा और संरक्षा की निरंतर याद दिलाता रहेगा, जिसे वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदानों से सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहाकि यह केवल एक वास्तुशिल्प डिजाइन या संरचनात्मक शिल्प कौशल का उत्पाद नहीं है, यह हमारे सैनिकों केप्रति हमारे मन में मौजूद कृतज्ञता की भावना को पुनर्जीवित करता है। उन्होंने कहाकि भारत के युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह है और इसका उद्देश्य इस उत्साह को और जागृत करना है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्र में भारतीय नौसेना की मजबूत उपस्थिति और परिचालन तत्परता की सराहना करते हुए कहाकि वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल केबीच वैश्विक शांति और समृद्धि की कुंजी समुद्री मार्गों की सुरक्षा में निहित है। उन्होंने भारतीय सेना और वायुसेना केसाथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना के असाधारण योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि अरब सागर में हमारी नौसेना की दुर्जेय स्थिति ने शत्रु के मन में निरंतर भय का भाव पैदा किया, परिणामस्वरूप पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों तकही सीमित रही। रक्षामंत्री ने सशक्त सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग से राष्ट्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने पर सरकार के विशेष जोर को रेखांकित किया। उन्होंने कहाकि भारतीय रक्षाबलों की बढ़ती ताकत नरेंद्र मोदी सरकार के निरंतर प्रयासों और रणनीतिक योजना का परिणाम है। राजनाथ सिंह ने कहाकि भारत को सही मायने में शक्तिशाली तभी माना जा सकता है, जब हमारे रक्षा बलों को अपने हथियारों केलिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े, यही कारण हैकि हमारे प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि मेक इन इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारों, इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस और एडीआईटीआई (आईडेक्स केसाथ नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी) जैसी पहलों से हम अत्याधुनिक हथियारों का स्वदेशी निर्माण कर रहे हैं और उन्हें विभिन्न मित्र देशों को निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि भारत हमेशा से हथियारों और उपकरणों का आयातक देश रहा है, हालांकि, आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है और हमारा रक्षाक्षेत्र पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर अग्रसर है। रक्षामंत्री ने कहाकि इस एक दशक के निरंतर प्रयासों का फल मिल रहा है, क्योंकि घरेलू रक्षा उत्पादन, जो 2014 में मात्र 46,000 करोड़ रुपये था, बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के एक और रिकॉर्ड को छूने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहाकि रक्षा निर्यात 2014 में 1000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर आज लगभग 40000 करोड़ रुपये हो गया है। इस सफलता को हासिल करने में उत्तर प्रदेश की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहाकि जहां राज्य के सैनिक देशभर के सैनिकों केसाथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण तंत्र को महत्वपूर्ण रूपसे मजबूत कर रहा है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि राज्य स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार एवं वाणिज्य, सड़कों, राजमार्गों और हवाई अड्डों जैसे अन्य क्षेत्रोंमें भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी देश के वीर सैनिकों की अनुकरणीय सेवाओं की प्रशंसा करते हुए कहाकि उनकी सुरक्षा ही प्रत्येक नागरिक को चैन की नींद सोने देती है। उन्होंने कहाकि विकास योजनाएं केवल एक सुरक्षित और मजबूत राष्ट्र में ही आगे बढ़ सकती हैं, जो अपने सैनिकों से संरक्षित हो। उन्होंने कहाकि रक्षाकर्मियों के कल्याण केप्रति सम्मान और प्रतिबद्धता वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित थे। नौसेना शौर्य वाटिका में नौसेना युद्धपोत पर लगी एके 726 तोप, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों केलिए जेडआईएफ 101 लॉंचर, सतह से सतह पर मार करने वाली और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आईएनएस गोमती का रडार, टॉरपीडो लॉंचर, लंगर, जहाज के मस्तूल जैसे कलाकृतियां प्रदर्शित हैं।
नौसेना शौर्य वाटिका में टीयू 142 एम का एक वॉकथ्रू संग्रहालय भी है, जो एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान है और अब सेवा में नहीं है। नौसेना शौर्य संग्रहालय के द्वितीय चरण केतहत निर्मित इस पार्क में भोजनालय, स्मारिका दुकान, उन्नत प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रणाली जैसी कई पर्यटक सुविधाएं हैं। आईएनएस गोमती का नाम जीवंत गोमती नदी के नाम पर रखा गया है और इसे 16 अप्रैल 1988 को तत्कालीन रक्षामंत्री ने मझगांव डॉक लिमिटेड में सेवामुक्त किया गया। गोदावरी श्रेणी के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट में तीसरा जहाज आईएनएस गोमती पश्चिमी बेड़े का सबसे पुराना युद्धपोत भी था, जब इसे सेवामुक्त किया गया था। अपनी सेवा के दौरान ऑपरेशन कैक्टस, पराक्रम और रेनबो में भाग लिया, कई द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भी हिस्सा लिया। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उल्लेखनीय साहस और उत्कृष्ट योगदान केलिए एक बार 2007-08 में और फिर 2019-20 में प्रतिष्ठित यूनिट प्रशस्तिपत्र से सम्मानित हुआ।