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'आंतरिक शांति ही बाहरी सद्भाव की नींव'

आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवक 'सेवा के मौन शिल्‍पकार'

उपराष्ट्रपति के आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पर उद्गार

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Friday 29 May 2026 05:48:22 PM

vice president and sri sri ravi shankar

बेंगलुरु। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45 वर्ष पर आयोजित वैश्विक समारोह में भाग लिया और शांति, सद्भाव, सेवा एवं आध्यात्मिक जागरुकता के मूल्यों को विश्वभर में फैलाने केलिए संगठन की प्रशंसा की। उपराष्ट्रपति ने कहाकि आर्ट ऑफ लिविंग आंदोलन ने महाद्वीपों, संस्कृतियों और पीढ़ियों में लाखों लोगों के जीवन को छुआ है, इसके लगभग 180 देशों में केंद्र हैं। उपराष्ट्रपति ने कहाकि साढ़े चार दशक पहले ‘आंतरिक शांति ही बाहरी सद्भाव की नींव है’ के सिद्धांत पर स्थापित यह आंदोलन करुणा, सहनशीलता और आनंद को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख मानवीय और आध्यात्मिक शक्ति के रूपमें विकसित हुआ है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि भक्ति का गहरा अर्थ है, भक्ति केवल समर्पण नहीं है, बल्कि स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र और मानवता केप्रति समर्पण है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर की प्रशंसा करते हुए कहाकि संघर्ष और अनिश्चितता से भरे इस संसार में गुरुदेव ज्ञान, जागरुकता, शांति और सद्भाव के मूल्यों से मानवता को प्रेरित करते रहते हैं। उन्होंने कहाकि गुरुदेव की सरलता, विनम्रता और करुणा ने विश्वभर में लाखों लोगों को प्रभावित किया है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि ध्यान, सेवा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संबंधी पहलों और अंतरधार्मिक संवाद से आर्ट ऑफ लिविंग ने सामाजिक परिवर्तन में आध्यात्मिकता की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित किया है, ध्यान और एकाग्रता के महत्व पर बल देते हुए बतायाकि एकाग्र मन असाधारण उपलब्धियां प्राप्त कर सकता है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि गुरुदेव ने समाज के समक्ष प्रेरणादायक आदर्श प्रस्तुत किया है, जिसमें युवा प्राचीन और आधुनिक को साथ लेकर चल सकते हैं। उन्होंने संगठन की सेवा उन्मुख पहलों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहाकि आध्यात्मिकता लोगों को दूसरों केसाथ शांतिपूर्वक रहना सिखाती है और जीवन को सार्थक व परिपूर्ण बनाती है।
सीपी राधाकृष्णन ने रॉक सत्संग और भजन क्लबिंग जैसी पहलों पर कहाकि ये प्रयास भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को समकालीन रूपमें पुनर्जीवित कर रहे हैं, जो विश्वभर की युवा पीढ़ी केसाथ प्रतिध्वनित होते हैं। उपराष्ट्रपति ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के नशामुक्त भारत अभियान की भी प्रशंसा की और कहाकि युवाओं को हानिकारक व्यसनों के बजाय आत्मसंयम और सकारात्मक मूल्यों से निर्देशित होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा पर कहाकि देश आज इतिहास के एक अद्वितीय मोड़ पर खड़ा है, आत्मविश्वास से भरपूर, महत्वाकांक्षी और वैश्विक स्तरपर नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सभ्यतागत ज्ञान योग, स्वास्थ्य, स्थिरता और 'वसुधैव कुटुंबकम' पर दिया गया, जो आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के प्रचारित मूल्यों केसाथ पूरी तरह मेल खाता है।
उपराष्ट्रपति ने आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों की प्रशंसा करते हुए उन्हें सेवा के मौन शिल्‍पकार बताया, जिन्होंने इस मिशन को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाया है। उन्होंने कहाकि एक व्यक्ति का रूपांतरण भी पूरे परिवार को सशक्त बनाता है और अंततः पूरे समुदायों को शक्ति प्रदान करता है। उपराष्ट्रपति ने आर्ट ऑफ लिविंग परिसर में गणपति मंदिर में प्रार्थना भी की और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन का एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के सदस्य, भारत और विदेश के हजारों भक्त एवं स्वयंसेवक उपस्थित थे।

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