जैविक खेती और पर्यावरण की रक्षा जैसी पहलों से देश को दी प्रेरणा
सिक्किम विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधितस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 28 May 2026 12:48:13 PM
गंगटोक। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में कहाकि यह देशवासियों विशेष रूपसे सिक्किम के लोगों केलिए गर्व की बात हैकि सिक्किम अब पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि केलिए सिक्किम की सरकार और वहां के लोगों को बधाई दी। राष्ट्रपति ने कहाकि देश की समावेशी प्रगति केलिए पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास अनिवार्य है, यहां के युवाओं में अपार प्रतिभा है। उन्होंने सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्रों से जो सिक्किम केसाथ अन्य राज्यों से भी आते हैं, आग्रह कियाकि वे एकदूसरे के संपर्क में रहें और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की सामूहिक भावना केसाथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहाकि अपनी योग्यता और समर्पण के जरिए वे समाज के वंचित वर्गों के लोगों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं, ऐसा करके वे समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि सिक्किम विश्वविद्यालय पर शिक्षा और अनुसंधान का केंद्र होने के अलावा इस क्षेत्रकी भाषा, संस्कृति और पर्यावरण को संरक्षित करने का विशेष उत्तरदायित्व है। राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुईकि विश्वविद्यालय ने आधुनिक शिक्षा को स्थानीय परंपराओं, पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक दायित्व केसाथ एकीकृत किया है। उन्होंने कहाकि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने का यही सही मार्ग है, शिक्षा आत्मनिर्भरता केलिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह कियाकि वे शिक्षा के जरिए स्वयं को सशक्त बनाएं और देश एवं समाज की बेहतरी केलिए कार्य करें। उन्होंने उन्हें सलाह दीकि वे अपनी स्वयं की क्षमताओं पर पूरा भरोसा रखें, दूसरों के अनुभवों और ज्ञान से सीखें, अकेले रहकर नहीं, बल्कि सहयोग से प्रगति हासिल करें और अपने अल्पकालिक व दीर्घकालिक दोनों प्रकार के लक्ष्यों को निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने केलिए एक कार्यनीति बनाएं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि हम वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि छात्र दक्षता, समता और संधारणीयता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए अपने चुने हुए क्षेत्रों में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहाकि सिक्किम केलिए यह बड़े गर्व की बात हैकि वर्ष 2016 में यह भारत का पहला पूर्णतः जैविक राज्य बना, सिक्किम ने यह सिद्ध कर दियाकि विकास और प्रकृति का संरक्षण सचमुच साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहाकि प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने जैसी पहल से पूरे देश को प्रेरणा मिलती है। राष्ट्रपति ने कहाकि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास की स्वच्छता केसाथ प्रकृति और समाज केप्रति भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाए तो देश तेजीसे प्रगति कर सकता है।
राष्ट्रपति ने कहाकि सिक्किम अपनी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और जैव विविधता के कारण एक विशिष्ट पहचान रखता है, हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल, कंचनजंगा सिक्किम के लिए प्रकृति का एक अमूल्य उपहार है। उन्होंने उल्लेख कियाकि सिक्किम के लोग इस चोटी को अपनी रक्षा करने वाली देवी रूपमें पूजते हैं, उनमें प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन केप्रति उत्तरदायित्व की गहरी भावना स्पष्ट रूपसे दिखाई देती है। राष्ट्रपति ने मेधावी स्नातकों को पदक और डिग्रियां देकर सम्मानित किया। इससे पहले राष्ट्रपति ने गंगटोक में ‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ महिलाओं केलिए पिंक बसें और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केलिए संसाधन पुनर्प्राप्ति वाहन को भी हरी झंडी दिखाई। दीक्षांत समारोह में सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग भी उपस्थित थे।