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आईएएस में महिला प्रतिनिधित्व का कीर्तिमान!

डॉ जितेंद्र सिंह का 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षुओं के साथ संवाद

आईएएस इतिहास में अबतक की सबसे अधिक महिला-पुरुष भागीदारी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 27 May 2026 06:33:32 PM

a record-breaking milestone for women's representation in the ias

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच में महिला अधिकारियों के लगभग 41 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का कीर्तिमान करते हुए कहा हैकि भारत की सिविल सेवाओं का बदलता स्वरूप देश में होरहे परिवर्तन को दर्शाता है, क्योंकि आईएएस के इतिहास में अबतक की सबसे अधिक महिला-पुरुष भागीदारी में से एक है। उन्होंने कहाकि यह दर्शाता हैकि अवसरों तक पहुंच पारंपरिक सामाजिक और क्षेत्रीय सीमाओं से परे विस्तारित हो रही है और युवा भारतीय आकांक्षा, प्रौद्योगिकी और जवाबदेही से प्रेरित एक नई शासन संस्कृति को आकार दे रहे हैं। डॉ जितेंद्र सिंह विनय मार्ग नई दिल्ली में सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (सीएसओआई) में 2024 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं से बातचीत कर रहे थे।
कार्मिक राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश करने वाले अधिकारी इतिहास में एक अद्वितीय स्थान रखते हैं, क्योंकि जब भारत 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वे अपने करियर के शिखर पर नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इस क्षण को एक सौभाग्य और एक जिम्मेदारी दोनों बताते हुए कहाकि भारत के शासन की भावी दिशा काफी हदतक सिविल सेवकों की इस पीढ़ी से निर्धारित की जाएगी। यह संवाद सहायक सचिव पाठ्यक्रम का हिस्सा था, जिसके तहत 2024 बैच के 184 आईएएस अधिकारियों को केंद्र में नीति निर्माण, समन्वय तंत्र और प्रशासनिक कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने केलिए 4 मई से 25 जून 2026 तक आठ सप्ताह की अवधि केलिए भारत सरकार के 49 मंत्रालयों और विभागों से जोड़ा गया है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि सहायक सचिव पाठ्यक्रम ने आईएएस अधिकारियों को मिलने वाले प्रारंभिक प्रशासनिक अनुभव में मौलिक परिवर्तन ला दिया है। उन्होंने कहाकि इस कार्यक्रम ने अधिकारियों की एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने में मदद की है, जो सेवा की शुरुआत से ही अधिक आत्मविश्वासी, नीति उन्मुख और संस्थागत रूपसे जुड़ी हुई है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि महिला अधिकारियों का लगभग 41 प्रतिशत प्रतिनिधित्व भारत में हो रहे व्यापक सामाजिक परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्चशिक्षा और पेशेवर क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति यह दर्शाती हैकि अवसर और पहुंच का किस प्रकार तेजीसे लोकतंत्रीकरण हो रहा है। डॉ जितेंद्र सिंह ने सिविल सेवा चयन के बदलते क्षेत्रीय स्वरूप के बारेमें कहाकि जिन राज्यों का प्रतिनिधित्व पहले सीमित था, वे अब बड़ी संख्या में सफल उम्मीदवार दे रहे हैं, जबकि कई पारंपरिक रूपसे प्रभावशाली क्षेत्रों में करियर संबंधी प्राथमिकताएं उभरते क्षेत्रों और वैश्विक अवसरों की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने कहाकि ये बदलाव एक अधिक महत्वाकांक्षी और गतिमान भारत के उदय का संकेत देते हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि वर्तमान बैच के 78 अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं, साथही चिकित्सा, कानून, प्रबंधन और मानविकी के पेशेवर भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहाकि ऐसे समय में जब सरकारी कार्यक्रम अधिक डेटा आधारित, डिजिटल और नवाचार उन्मुख हो रहे हैं, शासन केलिए तकनीकी समझ और अंतर्विषयक सोच की आवश्यकता बढ़ी है।
आईएएस प्रशिक्षुओं से बातचीत में डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि आधुनिक शासन व्यवस्था अब कठोर पदानुक्रम और एकतरफा संवाद से नहीं चलती। उन्होंने अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहाकि स्‍थायी ज्ञान की तुलना में अनुकूलन, पुरानी बातों को भूलने और विकसित होने की क्षमता अब कहीं अधिक मूल्यवान है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि पिछले एक दशक में प्रशासन का स्वरूप काफी बदल गया है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों की भागीदारी पर अधिक जोर दिया गया है। ‘अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार’ के शासन दर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहाकि प्रौद्योगिकी का उपयोग न केवल कार्यकुशलता केलिए, बल्कि नागरिकों और संस्थानों केबीच विश्वास बढ़ाने केलिए भी किया जाना चाहिए। डॉ जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों से मिशन कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों का पूरा उपयोग करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शासन, डेटा विश्लेषण और सार्वजनिक संवाद सहित उभरते क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहाकि भविष्य के प्रशासकों से तकनीकी दक्षता केसाथ सहानुभूति, संवेदनशीलता और नैतिक सार्वजनिक आचरण की अपेक्षा की जाएगी।
डॉ जितेंद्र सिंह ने प्रशिक्षु अधिकारियों केसाथ जिला प्रशासन, शासन संबंधी चुनौतियों, नेतृत्व की जिम्मेदारियों और सिविल सेवकों से जनता की बदलती अपेक्षाओं पर भी विचार विमर्श किया। उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्षता बनाए रखने, नागरिकों केलिए सुलभ रहने और दिखावे के बजाय सार्थक जनहितकारी परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने केलिए प्रोत्साहित किया। डॉ जितेंद्र सिंह ने भारत@2047 को महज एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन बताते हुए कहाकि इस पीढ़ी के अधिकारी आनेवाले दशक में भारत के उत्थान के प्रमुख वाहक बनेंगे। उन्होंने उनसे विनम्रता, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य की व्यापक भावना केसाथ लोकसेवा करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की संयुक्त सचिव (प्रशिक्षण) छवि भारद्वाज, लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) की संयुक्त निदेशक शनमुगा प्रिया मिश्रा और एलबीएसएनएए के उपनिदेशक क्रांति कुमार पति भी शामिल थे।

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