बीकानेर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ जवानों से संवाद
'सांचू पोस्ट भारत के युद्ध इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 27 May 2026 12:51:12 PM
बीकानेर। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा हैकि सीमा प्रहरियों पर देश को गर्व है। उन्होंने बीकानेर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की सांचू पोस्ट पर जवानों से संवाद किया और महिला बैरकों का ई-उद्घाटन किया। गृहमंत्री ने कहाकि बीएसएफ की स्थापना के समय से ही सीमा प्रहरियों ने धूप, ठंड, बारिश, घने जंगल, बर्फीली चोटियों और 45 डिग्री तापमान से लेकर माइनस 45 डिग्री तापमान की परवाह किए बगैर देश की सीमाओं की सुरक्षा के दायित्व का कर्तव्यपरायणता, वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान की भावना केसाथ निर्वहन किया है। उन्होंने कहाकि 2000 से अधिक सीमा प्रहरियों का बलिदान न केवल बीएसएफ और भारत सरकार, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों पर बीएसएफ का ऋण है। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक, सीमा प्रबंधन सचिव व बीएसएफ के महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि सरकार ने तय किया हैकि जेंडर न्यूट्रल तरीके से हर काम में हमारे देश की बेटियों का सहयोग लिया जाएगा और उन्हें अवसर दिए जाएंगे। गृहमंत्री ने कहाकि पहले की सरकारों में बॉर्डर की सुरक्षा में बेटियों की भूमिका और उनके लिए आवश्यक सुविधाओं को लेकर कमी थी, मगर अब हमारी बेटियां बेटों से दो कदम आगे बढ़कर देश की सुरक्षा में आगे आ रही हैं। उन्होंने कहाकि हम 2030 तक सीमा सुरक्षा में तैनात बेटियों केलिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कर देंगे। अमित शाह ने बतायाकि राजस्थान में 79 बैरक स्वीकृत हुए हैं और लगभग 39 करोड़ रुपये के खर्च से उनमें से 67 बैरकों का कार्य पूरा हो चुका है, इनमें से 14 बैरकों का लोकार्पण हो गया है। गृहमंत्री ने कहाकि बीएसएफ जिन सीमाओं की चौकसी करती है, वहां लगभग 200 करोड़ रुपए की लागत से कुल 356 बैरक बनेंगे, इन बैरकों के बनने केबाद महिला जवानों केलिए यहां ड्यूटी करना और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। गृहमंत्री ने कहाकि शून्य घुसपैठ सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है, जो बॉर्डर सिक्योरिटी के ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ बीएसएफ, सेना, सीमांत नागरिक और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से ही हो सकता है।
अमित शाह ने कहाकि बीएसएफ के जवानों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सराहनीय प्रदर्शन किया। उन्होंने कहाकि जहां-जहां बीएसएफ ने मोर्चा संभाला, वहां वे पूरी दृढ़ता से डटे रहे, इतना ही नहीं सीमांत जिलों में रहने वाले लोगों का हौसला बनाए रखने में भी बीएसएफ ने बड़ा योगदान दिया। गृहमंत्री ने ऐतिहासिक सांचू चौकी का दौरा करने पर खुशी जाहिर करते हुए कहाकि 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय सांचू की आबादी 500 से अधिक थी और आरएसी की चौकी सांचू से लगभग 25 किलोमीटर पीछे रणजीतपुरा गांव में थी। उन्होंने जिक्र कियाकि जब तीन आरएसी और 13 ग्रेनेडियर के जांबाज जवानों को सूचना मिलीकि पाकिस्तान सांचू पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, तब उन्होंने भीषण हमलाकर सांचू को भारत की सीमा में सुरक्षित बनाए रखा और पाकिस्तान को यहां से पीछे हटना पड़ा। गृहमंत्री ने कहाकि 12वीं वाहिनी बीएसएफ का हिस्सा बन चुकी तीन आरएसी बड़े गर्व केसाथ हरवर्ष विजय उत्सव मनाती है, इसको सांचू दिवस नाम दिया गया है, यह पोस्ट भारत के युद्ध इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है।
गृहमंत्री ने कहाकि पूरे राजस्थान के रेगिस्तान में एक पार्श्व सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया है, लगभग 1096 किलोमीटर लंबी पार्श्व सड़क और 520 किलोमीटर लंबी अक्षीय सड़क बीएसएफ के जवानों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने केसाथ ही कनेक्टिविटी को दुरुस्त करेंगी। गृहमंत्री ने कहाकि यहां न्यू डिजाइन फेंसिंग यानि बाड़ लगाने का काम भी चल रहा है और राजस्थान की लगभग 180 चौकियों पर पाइपलाइन से पीने का पानी पहुंचाने का काम पूरा हो चुका है। अमित शाह ने कहाकि अब हमें बीएसएफ की परंपरागत ड्यूटी को नए नजरिए से देखना पड़ेगा, सीमा सुरक्षा केसाथ ही अवैध तस्करी, घुसपैठ पर नज़र और सीमापार की गतिविधियों पर दिनरात पैनी नज़र रखकर हमें अपनी तैयारियों को और पुख्ता करना होगा। गृहमंत्री ने कहाकि भारत सरकार ने कुछ साल पहले बीएसएफ का कार्यक्षेत्र सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक करने का निर्णय किया था। उन्होंने कहाकि हमारी जिम्मेदारी हैकि सीमा से 50 किलोमीटर के अंदर यदि किसी गांव में कोई अवैध निर्माण होता है तो हम सिविल प्रशासन को सूचित करें, 50 किलोमीटर के दायरे में यदि कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी परिवर्तन हो रहा है तो उसके प्रति सजग रहकर राज्य सरकार को आगाह करें।
गृहमंत्री ने कहाकि हमारी जिम्मेदारी हैकि ड्रोन और अन्य उपकरणों से नारकोटिक्स और हथियारों की स्मगलिंग होती है तो उसे कठोरता से बंद करने के सभी जरूरी उपाय करें। गृहमंत्री ने कहाकि भारत सरकार ड्रोनरोधी संयंत्र लगाने की शुरुआत अगले 6 माह में कर लेगी, परंतु यह जानना जरूरी हैकि ड्रोन जब भारत की भूमि पर उतरता है तो उसे रिसीव कौन करता है? कौन ड्रोन में लाई गई सामग्री को देश विरोधी कार्यों केलिए उपयोग करता है? इसपर हमारी पैनी नज़र होनी चाहिए। इसके न्यूट्रलाइजेशन केलिए सिविल अधिकारियों और जिला पुलिस से हमारा बेहतरीन संपर्क होना चाहिए और हमें परिणामलक्षी कार्रवाई करनी चाहिए। अमित शाह ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना केतहत सीमांत गांवों का विकास हो रहा है, बीएसएफ को वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम केतहत इनका नेतृत्व करना चाहिए और राज्य सरकार और भारत सरकार की जनकल्याण योजनाओं का सीमांत गांवों में 100 प्रतिशत सैचुरेशन सुनिश्चित का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहाकि हमें सीमांत गांवों की आनेवाली पीढ़ियों को जागरुक करना पड़ेगा, तभी बीएसएफ, सेना और जागरुक नागरिक मिलकर एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बना सकते हैं।
गृहमंत्री ने कहाकि सरहदपार से पैदा होने वाले खतरों पर हमारी नज़र होनी ही चाहिए, साथही हमारी सरहद के अंदर जिन लोगों का उपयोगकर आंतरिक खतरा होता है, उसपर भी हमारी नज़र होनी चाहिए और उसके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। अमित शाह ने कहाकि पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी बीएसएफ की है, इन दोनों सीमाओं पर हमें चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना है। उन्होंने कहाकि किसीभी खतरे से निपटने केलिए बीएसएफ़, सेना, सीमांत नागरिक और स्थानीय प्रसाशन चारों को संयुक्त रूपसे कार्य करना है, इसीलिए इसे चतुष्कोणीय ग्रिड का नाम दिया है। अमित शाह ने कहाकि बॉर्डर सिक्योरिटी एकांत ड्यूटी नहीं, हम सबका क्षेत्रीय उत्तरदायित्व है। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों के वृक्षारोपण योगदान को सराहा और कहाकि जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के बढ़ते तापमान को देखते हुए इतनी बड़ी संख्या में लगाए गए वृक्ष आनेवाले समय में बहुत उपयोगी सिद्ध होंगे। गृहमंत्री ने इस मौके पर खेजड़ी का पौधा लगाया। उन्होंने कहाकि खेजड़ी का वृक्ष रेगिस्तान केलिए कल्पवृक्ष की तरह होता है।