स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम के एग्ज़िट पोल में भाजपा को 200 सीट
पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के शासन का पतन निश्चित हुआWednesday 29 April 2026 07:07:01 PM
दिनेश शर्मा
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों से संचालित टीएमसी की ममता बनर्जी सरकार के घोर अत्याचारी शासन के खिलाफ बंगाली मानुष की अस्मिता आखिर जाग उठी है। इसबार मौका मिलते ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वहां की जनता ने तृणमूल कांग्रेस के पंद्रह साल के शासन को उखाड़कर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंप देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम के एग्ज़िट पोल में भारतीय जनता पार्टी स्वीप करती दिख रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों पर दो चरणों में हुए चुनाव में भाजपा के करीब 190 से ज्यादा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल करने का अनुमान है। सत्ता के बहुमत केलिए 148 नंबर चाहिएं। चुनाव परिणाम एग्जिट पोल एजेंसियां भी यह मान रही हैंकि ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने की लाख कोशिशों के बावजूद पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सामने अपने शासन से हाथ धो रही हैं। असम में भाजपा की हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार पहले भी से ज्यादा प्रचंड बहुमत से फिर आ रही है। पुद्दुचेरी में भी भाजपा आती दिख रही है, जबकि तमिलनाडू और केरलम में इसबार हंग असेंबली का अनुमान है।
स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम का असम और बंगाल चुनाव पर खास फोकस रहा है, जिनके परिणाम 4 मई को देश के सामने होंगे। पश्चिम बंगाल के दोनों चरणों में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है, जिसमें महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी दिखाई दी है। दूसरे चरण में हिंसा हुई है, जहां कुछ बूथों पर पुर्न मतदान होगा। चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षाबलों की सख़्त निगरानी के कारण हिंसा की कुछ घटनाओं को छोड़कर सभी जगह चुनाव शांति से निपटे हैं। पश्चिम बंगाल में माना जा रहा हैकि इसबार भारी बहुमत से भाजपा सरकार बनाने जा रही है। गौरतलब हैकि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए केलिए स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम का एग्ज़िट पोल 200 था, जो किसी भी एग्ज़िट पोल एजेंसी ने नहीं किया था, जिसमें एनडीए ने 202 सीटें जीतीं। पश्चिम बंगाल के चुनाव-2026 में भी भाजपा केलिए स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम का एग्ज़िट पोल 190 से 200 है। बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के परिणाम पर हमारा यह एग्ज़िट पोल सामाजिक, राजनीतिक, जनसामान्य मतदाताओं से लगातार बातचीत और सोशल मीडिया, प्रिंट और टीवी मीडिया पर विश्लेषण के आकलन पर आधारित है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर देश और राजनीतिक दिग्गजों की खास नज़र थी। पश्चिम बंगाल में भारी बहुमत से भाजपा की सरकार बनने जा रही है। दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार विधानसभा चुनाव केबाद पश्चिम बंगाल में भाजपा जबरदस्त स्वीप करती दिख रही है। तमिलनाडू केरलम में भी जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में टीएमसी के पक्ष में सीमावर्ती बांग्लादेश की पूरी दिलचस्पी रही है। पश्चिम बंगाल के कम से कम आठ जिले ऐसे हैं, जिनपर बांग्लादेश के घुसपैठिए मुसलमानों का पूरा प्रभाव है। कहा जाता हैकि ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की संख्या यहां बहुत ज्यादा हो चुकी है और अब तो वह बंगालियों और स्थानीय हिंदुओं पर खुलकर सामाजिक धार्मिक और आर्थिक अत्याचार करते हैं। इस चुनाव में उन्हें सुरक्षा मिलने और भयमुक्त वोट देने एवं खासतौर से महिलाओं को बीजेपी के पक्ष में वोट करने का मौका मिला है और यही वो वोट है, जो इसबार बंपर वोटिंग से टीएमसी को 15 साल की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा रहा है।
चुनावी मुद्दों की बात करें तो भाजपा का सबसे पहले राष्ट्रवादी हिंदुत्व और रोहिंग्या बांग्लादेशी घुसपैठ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, यूसीसी, रोज़गार, भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुख रहा, जिसका चुनाव में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त असर देखने को मिला है। महिलाओं ने इसमें भाजपा के पक्ष में जबरदस्त मतदान किया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के बंगाली मानुष पर भयंकर अत्याचार और बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्याओं की पश्चिम बंगाल में जबरदस्त घुसपैठ के मुद्दे ने ममता बनर्जी की टीएमसी का भारी नुकसान किया है। सर्वण, ओबीसी, दलित और जनसामान्य ने पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा एनडीए को फिरसे अपनी पहली पसंद बनाया है। कांग्रेस और लेफ्ट का यहां पूरी तरह खेल खत्म होता नज़र आ रहा है। ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल की जनता को लुभाने की रणनीतियां विफल और एक केबाद एक ध्वस्त होती गई हैं। विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के छिछले आरोप, गालीगलौज, वोटरों को धमकियां, हत्या और गंभीर नोकझोक उनके खिलाफ गई है। ममता बनर्जी को बंगाली मानुष की उपेक्षा की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
भाजपा की भारी सफलता में प्रमुख रूपसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का मुख्य रूपसे प्रचंड प्रचार अभियान है। बाकी इस चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा की संभावित सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा नेत्री स्मृति इरानी, बिहार की लोकगायिका और विधायक मैथिली ठाकुर, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती भाजपा के स्टार प्रचारक थे। टीएमसी की अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी की प्रमुख स्टार प्रचारक थीं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख स्टार प्रचारक थे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल टीएमसी का प्रचार कर रहे थे, जबकि एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी अपनी पार्टी के प्रचारक थे। टीएमसी के बाग़ी हुमायू कबीर टीएमसी के विरुद्ध प्रचार में थे।
भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव में सुरक्षा और पोलिंग के जो प्रबंध थे, वह अनुकरणीय थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले ही कह दिया थाकि चुनाव में किसी को भी गड़बड़ी करने का मौका नहीं दिया जाएगा और उसने वह कर दिखाया। टीएमसी के गुंडों को विश्वास थाकि उनकी धमकी के सामने कोई टीएमसी के खिलाफ मतदान करने नहीं आएगा, लेकिन सुरक्षाबलों ने उनकी कमर तोड़ दी और लोग निर्भय होकर मतदान करने आए। पश्चिम बंगाल का एक दुर्भाग्य पक्ष यह हैकि वहां का प्रशासन पूरी तरह ममता बनर्जी और बांग्लादेशी गुंडों रोहिंग्याओं के दबाव में चल रहा था और ममता बनर्जी को यह भरोसा थाकि यह सिंडिकेट ही उसे चुनाव जिताने केलिए काफी है, मगर चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी का यह पासा उलट दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह की रणनीतियों से पश्चिम बंगाल की टीएमसी की राजनीति भारी झटका लगा है, जिससे वह बंग्लादेश हिल गया है, जिसने पश्चिम बंगाल में तबाही मचाई हुई है और पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने केबाद ऐसे कड़े फैसले देखने को मिलेंगे कि जो सबक होंगे।
राजनीतिक विश्लेषक और एग्ज़िट पोल एजेंसियां पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टिकरण, एसआईआर और चुनाव आयोग की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को गेमचेंजर बता रहे हैं। दिख रहा थाकि इसबार पश्चिम बंगाल में जनता बदलाव चाहती है, जिससे उसने टीएमसी के हमलावरों की कोई परवाह नहीं की और केंद्रीय सुरक्षाबलों की सुरक्षा में निर्भय होकर मतदान किया। यही ट्रेंड लगातार सोशल मीडिया पर भी चल रहा था। सोशल मीडिया के अनुमानों को कोई नहीं हिला पाया है। चार मई को यह स्पष्ट हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में यह स्पष्ट रूपसे देखने को मिला हैकि इसमें टीएमसी के ग़ुंडो बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों ने भाजपा के कार्यकर्ताओं और वोटरों को मतदान करने से रोका और बूथों पर गड़बड़ी करने की पूरी कोशिश की, मगर इसबार मूल बंगालियों के उत्साह के सामने ममता बनर्जी का सोनार बांग्ला का झांसा नहीं चल पाया है और यह माना गयाकि भाजपा बंगाल में अपनी सरकार बनाने जा रही है।