ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं की महत्ता का उल्लेख किया
गोवा में सीपीए इंडिया रीजन के नए जोन-VII का सम्मेलनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 10 April 2026 11:48:26 AM
पणजी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधि निर्माताओं से कहा हैकि वे अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी केसाथ जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरें। उन्होंने कहाकि चुने हुए जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी हैकि वे जनता की अपेक्षाओं को पूरा करें, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाएं और पारदर्शी, समावेशी तथा जवाबदेह शासन सुनिश्चित करें। उन्होंने यहभी कहाकि जनता का विश्वास बनाए रखने केलिए दूरदर्शिता, समर्पण और जनकल्याण केप्रति मजबूत प्रतिबद्धता आवश्यक है, ये गुण एक विकसित, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण केलिए जरूरी हैं। ओम बिरला ने ये बातें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन सात के प्रथम सम्मेलन के गोवा में उद्घाटन के दौरान कहीं।
युवा विधि निर्माताओं की भूमिका पर ओम बिरला ने कहाकि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की अहम भूमिका है। उन्होंने कहाकि भविष्य के नेताओं के रूपमें युवाओं को नई नीतियां बनाने, सभी वर्गों के विकास को आगे बढ़ाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि युवाओं की ऊर्जा, नई सोच और जनसेवा केप्रति समर्पण देश को समृद्ध, आत्मनिर्भर और न्यायपूर्ण बना सकता है तथा आनेवाली पीढ़ियों केलिए स्थायी विकास सुनिश्चित कर सकता है। विधायी संस्थाओं की बदलती भूमिका पर उन्होंने कहाकि जनकल्याण और अच्छे शासन केलिए राज्यों के विधानमंडलों केबीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बहुत जरूरी है। उन्होंने कहाकि संसदीय लोकतंत्र को दुनिया की सबसे बेहतर शासन प्रणाली माना जाता है। उन्होंने बतायाकि 1952 से हर चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ना भारत के मजबूत और जीवंत लोकतंत्र का प्रमाण है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहाकि जनप्रतिनिधियों को विज्ञान और तकनीकी शक्ति का उपयोग करके लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहाकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के दौरमें भी मानवीय संवेदनशीलता उतनी ही जरूरी है। उन्होंने विधि निर्माताओं से कहाकि वे जनता से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझें और सहानुभूति केसाथ उनका समाधान करें। उन्होंने कहाकि जो प्रतिनिधि नीतियों और कानूनों पर चर्चा में सक्रिय रहते हैं, वे अपने राज्यों में मजबूत नेता बनकर उभरते हैं, विधि निर्माताओं को प्रक्रियाओं की जितनी अधिक जानकारी होगी, उनकी भागीदारी उतनी ही प्रभावी होगी। ओम बिरला ने गोवा के पर्यटन, समृद्ध संस्कृति और ऊर्जा की सराहना की। उन्होंने सीपीए जोन-VII में शामिल राज्य-महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा की लोकतांत्रिक परंपरा और प्रगतिशील सोच की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि जनता की अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत विधायी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
ओम बिरला ने कहाकि सीपीए इंडिया रीजन के नए जोन-VII के अंतर्गत आनेवाले राज्यों के सामने अलग-अलग चुनौतियां हैं, लेकिन सहयोग और मिलकर काम करने की भावना से इन चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। उन्होंने कहाकि विशेष रूपसे तटीय विकास जैसे क्षेत्रोंमें राज्य एक-दूसरे से सीख सकते हैं और सर्वोत्तम तरीकों को अपनाकर आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहाकि भारत को आगे बढ़ाने केलिए सहयोग, नवाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन बहुत आवश्यक है। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत, महाराष्ट्र विधानपरिषद के सभापति राम शिंदे और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में गोवा विधानसभा के अध्यक्ष डॉ गणेश गांवकर ने स्वागत भाषण दिया और उपाध्यक्ष जोशुआ डिसूजा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।