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'हरियाणा प्रगतिशील और समृद्ध कृषि प्रधान राज्य'

दीनबंधु छोटू राम ने एक मजबूत कृषि ढांचे की नींव रखी-उपराष्ट्रपति

मुरथल में दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि का दीक्षांत

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Monday 6 April 2026 06:46:00 PM

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मुरथल (हरियाणा)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल में दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने दीनबंधु छोटू राम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सत्यनिष्ठा, सामाजिक न्याय और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बताया। उन्होंने कहाकि दीनबंधु छोटू राम ने अपना जीवन किसानों और वंचित समुदायों के उत्थान केलिए समर्पित कर दिया और उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाने एवं उनके सम्मान को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपराष्ट्रपति ने उनके योगदानों को रेखांकित करते हुए कहाकि सहकारी संस्थाओं और न्यायसंगत भूमि प्रथाओं पर उनके जोर ने एक मजबूत कृषि ढांचे की नींव रखी। उन्होंने कहाकि इन प्रयासों ने हरियाणा को एक प्रगतिशील और समृद्ध कृषि प्रधान राज्य के रूपमें उभरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसने भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाई है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त कीकि स्वर्ण पदक विजेताओं में लगभग 64 प्रतिशत महिलाएं हैं और कुल स्नातक छात्रों में महिलाओं की संख्या लगभग 50 प्रतिशत है। उन्होंने इसे हाल के वर्षों में महिला केंद्रित विकास से आए परिवर्तनकारी बदलावों का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहाकि जागरुकता अभियानों और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पहलों से हरियाणा में जेंडर अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो सामाजिक परिवर्तन और समावेशिता का एक प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की परिकल्पना का उल्‍लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने जिक्र कियाकि आत्मनिर्भर भारत का आह्वान नवोन्‍मेषण, आत्मविश्वास और स्वदेशी समाधानों का आह्वान है। उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को याद करते हुए कहाकि जब दुनिया इस संकट से जूझ रही थी, तब कई देशों और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने टीके विकसित किए, जिनमें से कुछ ने अधिक लाभ के लिए उनका पेटेंट कराने की कोशिश की।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि भारत ने टीके विकसित किए और उन्हें अपनी जनता को नि:शुल्‍क उपलब्ध कराया, साथही 100 से अधिक देशों को भी इनकी आपूर्ति की। उन्होंने कहाकि यह भारत की भावना और महानता को दर्शाता है। उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और हरित प्रौद्योगिकियों के परिवर्तनकारी प्रभाव की चर्चा की। उन्होंने छात्रों से इन उभरते क्षेत्रों को जिज्ञासा और जिम्मेदारी केसाथ अपनाने तथा अपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण के साधन के रूपमें करने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से मादक पदार्थों का दृढ़तापूर्वक त्याग करने और स्वास्थ्य, उद्देश्य व सकारात्मकता का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को नशामुक्त समाज के राजदूत बनने केलिए प्रोत्साहित किया। उपराष्‍ट्रपति ने छात्रों से कहाकि जीवन में सफलता केवल उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और विफलताओं से उबरने की क्षमता से भी परिभाषित होती है। उन्होंने कहाकि जो लोग धैर्य केसाथ कठिनाइयों और अन्याय को सहते हैं, वे अंततः विजयी होते हैं। उन्होंने छात्रों को धैर्य धारण करने और जीवन की चुनौतियों का साहस तथा सकारात्मकता के साथ सामना करने की सलाह दी।
उपराष्ट्रपति ने मानसिकता को उपनिवेशवाद से मुक्त करने के महत्व पर भी बल दिया और कहाकि सच्ची शिक्षा को विचारों को मुक्त करना चाहिए, भारत की विरासत में विश्वास पैदा करना चाहिए और इसकी बौद्धिक परंपराओं में गर्व की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने चरित्र और ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए छात्रों को अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान प्राप्त मूल्यों को आगे बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से उत्कृष्टता केलिए प्रयास करने, समाज में सार्थक योगदान देने और मजबूत एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया। दीक्षांत समारोह में हरियाणा के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आशीष कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा सरकार के मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह, छात्र-छात्राएं और अभिभावक उपस्थित थे।

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