श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापित कर दर्शन पूजन किया
'दिव्य भव्य श्रीराम मंदिर भारत के पुनर्जागरण का पावन प्रतीक'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 19 March 2026 04:16:13 PM
अयोध्या। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पर प्रभु श्रीराम की असीम कृपा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत्सर 2083 के शुभारंभ के दिन नवरात्र के प्रथम दिवस पर आज अयोध्या पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना समारोह में भाग लिया। राष्ट्रपति ने श्रीराम मंदिर में ‘बालक राम और राजा राम’ का दर्शन पूजन किया। राष्ट्रपति ने समारोह में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहाकि प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्यानगरी में जन्म लिया वहां आना वे अपना परम सौभाग्य मानती हैं। राष्ट्रपति ने देश-विदेश में रहने वाले भारतवासियों और रामभक्तों को नए वर्ष की आत्मिक बधाई दी और कहाकि रामनवमी के दिन हमसब प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाएंगे, ‘नवमी तिथि, मधुमास पुनीता’ यानी रामनवमी की अग्रिम बधाई! उन्होंने कहाकि स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया: जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। राष्ट्रपति ने कहाकि अयोध्या यानी अवधपुरी और आसपास की लोकभाषा में संतकवि तुलसीदास ने श्री रामचरितमानस की रचना की थी, जिसमें प्रभु श्रीराम सीताजी से कहते हैंकि यद्यपि सबने वैकुंठ का बखान किया है, वह वेद पुराणों में वर्णित है, जग प्रसिद्ध है, लेकिन वैकुंठ भी मुझे अवधपुरी जितना प्रिय नहीं है: जद्यपि सब बैकुंठ बखाना। बेद पुरान बिदित जगु जाना॥ अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ॥ यह अयोध्या नगरी सभी रामभक्तों केलिए सर्वाधिक प्रिय है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि श्रीराम रावण युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात माता सीता और लक्ष्मण केसाथ प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन का अत्यंत कलात्मक रेखाचित्र भारत के संविधान की हस्तलिखित मूलप्रति में शोभायमान है, यह रेखाचित्र मूल अधिकार के अत्यंत महत्वपूर्ण भाग तीन के आरंभ में दिखाई देता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त कीकि इसके विषय में जानकारी और जागरुकता प्रसारित की जा रही है और जनमानस को संवैधानिक आदर्शों एवं पवित्र सांस्कृतिक प्रतीकों केसाथ जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने कहाकि श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन, यहां रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों केलिए खोला जाना, मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण की तिथियां भारतीय इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। उन्होंने जिक्र कियाकि प्राण प्रतिष्ठा के मर्मस्पर्शी अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, उसमें यह भाव व्यक्त किया थाकि यह हम सभीका सौभाग्य हैकि हमसब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के एक नए कालचक्र के शुभारंभ के साक्षी बन रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे, इक्कीसवीं सदी में हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहाकि माता शबरी से प्रभु श्रीराम का भावपूर्ण मिलन, निषादराज से उनका स्नेह संबंध, युद्ध में कोल भील वानर आदि का सहयोग लेना, जटायु, जाम्बवंत, गिलहरी सभीको सम्मान, स्नेह और प्रेरणा प्रदान करना ऐसे अनेक प्रसंग एक सर्वस्पर्शी तथा सर्वसमावेशी जीवन दर्शन को अपनाने का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि आजके संदर्भ में सामाजिक समावेश, आर्थिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा हेतु भी बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय लक्ष्य तय किए गए हैं और उन्हें कार्यरूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहाकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का आदर्श वाक्य है-रामो विग्रहवान् धर्म: अर्थात प्रभु श्रीराम धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं, धर्म के व्यापक अर्थ के आधार पर निजी और सामूहिक जीवन को संचालित करके ही हम प्रभु श्रीराम की सच्ची पूजा अर्चना कर पाएंगे। उन्होंने कहाकि श्रीराम मंदिर व परिसर की भव्यता बढ़ती ही जा रही है, माता अन्नपूर्णा, मां दुर्गा, प्रभु श्रीराम परिवार, रामलला का दर्शन करके मैं कृत-कृत्य हूं। उन्होंने प्रार्थना कीकि प्रभु श्रीराम, सभी देवी-देवताओं एवं दैवी विभूतियों की कृपा देशवासियों पर बनी रहे और सबकी कृपा से हम आधुनिक विश्व में राम राज्य जैसी व्यवस्था स्थापित कर सकें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि द्वितीय तल गर्भगृह में श्रीराम यंत्र की स्थापना और पूजन करने का अवसर मिलना मुझपर प्रभु श्रीराम की असीम कृपा का प्रमाण है, यह मेरी विनम्र मान्यता है, यह श्रीराम यंत्र कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य द्वारा प्रदत्त है। उन्होंने कहाकि श्रीराम मंदिर कला और शिल्प की अनुपम अभिव्यक्तियों से समृद्ध है, ऐसा लगता है मानो स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने यहां विद्यमान निर्माण शिल्प से जुड़ी संस्थाओं, शिल्पकारों और श्रमिकों को कुशलता प्रेरणा प्रदान की हो। उन्होंने कहाकि अयोध्या धाम धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है, सनातन चेतना और ऊर्जा का यह मंदिर परिसर भारत के पुनर्जागरण के पावन प्रतीक के रूपमें सदैव पूजनीय बना रहेगा। राष्ट्रपति ने कहाकि भारत का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक सभी आयामों पर हो रहा है, देवभक्ति और देशभक्ति का मार्ग एक ही है, प्रभु श्रीराम को सही अर्थों में नमन करना और भारत माता की वंदना करना एक ही है। उन्होंने कहाकि जिस हृदय से ‘नमामि रामम् रघुवंश-नाथम्’ का भाव प्रसारित होता है, उसी हृदय से ‘वन्दे मातरम्’ के राष्ट्रीय गीत का गायन होता है। उन्होंने उल्लेख कियाकि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा हैकि पुण्यभूमि भारत के आकर्षण से प्रभु श्रीराम ने यहां अवतरण किया था, साकेत में प्रभु श्रीराम कहते हैंकि इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया। राष्ट्रपति ने कहाकि आज साकेत यानी प्रभु श्रीराम की अयोध्या नगरी में हमसब यह संकल्प लेंकि भारत माता के गौरव को विश्व के शिखर पर ले जाएंगे।