राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्य नई पीढ़ी केलिए एक आदर्श हैं-प्रधानमंत्री
सेवानिवृत्त सांसदों को नए पुराने संसद भवन में सेवा का विशिष्ट गौरव!स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 18 March 2026 04:15:13 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्यों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त साथियों को सम्मानित करने का अवसर मिलने पर हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहाकि ऐसे अवसर सदन को दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक साझा भावना का संचार करने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहाकि चाहे सदस्य वापस लौटें या व्यापक सामाजिक सेवा में लग जाएं, उनका संचित अनुभव राष्ट्र केलिए अमूल्य संपत्ति बना रहेगा। उन्होंने कहाकि राजनीति के गतिशील क्षेत्रमें यात्रा कभी समाप्त नहीं होती, क्योंकि भविष्य में अनुभवी नेताओं केलिए हमेशा नए अवसर विद्यमान रहते हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि राजनीति में कोई विराम नहीं होता, राजनीतिक अनुभव व योगदान राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति है और उनका अनुभव एवं योगदान राष्ट्र के जीवन का सदा हिस्सा रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निवर्तमान सांसदों के उत्कृष्ट योगदानों पर प्रकाश डालते हुए सांसदों की नई पीढ़ी से कहाकि एचडी देवगौड़ा, मल्लिकाअर्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता उनके लिए आदर्श हैं। उन्होंने उपसभापति हरिवंश के मृदुभाषी स्वभाव और जटिल संकटों को संभालते हुए सदन का विश्वास बनाए रखने की क्षमता की प्रशंसा की। नरेंद्र मोदी ने कहाकि ऐसी समर्पित सेवा समाज को सौंपी गई जिम्मेदारियों केप्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने दोहराते हुए कहाकि समाज की जिम्मेदारियों केप्रति पूर्णतः समर्पित रहने के बारेमें इन वरिष्ठ नेताओं से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने सदन की बदलती परंपराओं जिक्र किया और कहाकि चौबीस घंटे चलने वाले मीडिया के माहौल ने भलेही सबको अधिक जागरुक बना दिया हो, लेकिन हास्य और बुद्धिमत्ता की विरासत संसदीय जीवन का एक अभिन्न अंग बनी हुई है। उन्होंने कहाकि प्रत्येक दो वर्ष में एक समूह के जाने से ज्ञान का निरंतर आदान प्रदान होता रहता है, जिससे सदन की समृद्ध विरासत आनेवाले सदस्यों के जरिए संरक्षित रहती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह संस्थागत निरंतरता एक महत्वपूर्ण लाभ है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ करती है। प्रधानमंत्री ने कहाकि यह विरासत एक सतत प्रक्रिया है, जो भारतीय संसदीय प्रणाली को समृद्ध बनाती है। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा के अनूठे संस्थागत महत्व को बताते हुए कहाकि संसदीय प्रणाली को द्वितीय मत की अवधारणा से असीम शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहाकि दोनों सदनों केबीच निर्णयों का आदान प्रदान विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण नया आयाम जोड़ता है, जिससे देश केलिए अधिक परिष्कृत परिणाम सुनिश्चित होते हैं। उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक विरासत राष्ट्रीय निर्णय लेने में पारदर्शिता और पूर्णता की भावना को बढ़ावा देती है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह द्वितीय मत हमारे लोकतंत्र में एक विशाल योगदान है, जिसे हमें संजोकर रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहाकि सेवानिवृत्त सांसदों को यह विशिष्ट गौरव प्राप्त हैकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पुराने और नए दोनों संसद भवनों में सेवा की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि नए सदन में ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनना उनके सार्वजनिक सेवा करियर में एक नया और महत्वपूर्ण स्मृति के रूपमें रहेगा। नरेंद्र मोदी ने सदन को एक महान खुला विश्वविद्यालय बताया, जो सदस्यों को राष्ट्रीय जीवन की जटिलताओं की अनूठी शिक्षा प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने कहाकि यहां व्यतीत छह वर्ष राष्ट्र केप्रति योगदान और आत्मविकास केलिए अमूल्य हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि संसदीय अनुभव के वर्षों के दौरान सदस्यों की दूरदृष्टि और क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहाकि राष्ट्र निर्माण में उनका अमूल्य योगदान औपचारिक व्यवस्था के भीतर या स्वतंत्र सामाजिक कार्य के माध्यम से निरंतर महसूस किया जाता रहेगा। प्रधानमंत्री ने एकबार फिर सेवानिवृत्त प्रतिनिधियों की लंबी और समर्पित सेवा की सराहना करते हुए उनकी प्रतिबद्धता केलिए उन्हें धन्यवाद दिया।