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'कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का योगदान अमूल्य'

राष्ट्रपति मुर्मु ने वैश्विक सम्मेलन में महिला किसानों को प्रोत्साहित किया

यूएन ने वर्ष 2026 को घोषित किया है 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष'

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Thursday 12 March 2026 05:57:20 PM

global conference on the role of women in agri-food systems

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर नई दिल्ली में तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने महिला किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहाकि बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि संबंधी विभिन्न गतिविधियों में महिलाएं बड़ी और अनुकरणीय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहाकि वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के समुचित इस्‍तेमाल और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन सहित कई क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं, कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अमूल्य योगदान है। राष्ट्रपति ने उल्लेख कियाकि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है, ये लड़कियां शैक्षणिक दृष्टि सेभी उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जोर देकर कहाकि सरकार, समाज और कृषि क्षेत्रके हितधारकों का यह दायित्व हैकि वे इन होनहार लड़कियों को कृषि और अनाज उत्पादन के क्षेत्रमें नेतृत्व प्रदान करने केलिए हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दें। उन्होंने कहाकि नेतृत्व मातृत्व का अंतर्निहित गुण है, हालांकि मातृत्व को अक्सर घर की चारदीवारी तकही सीमित माना जाता है, हमें इस मानसिकता को दूर करना होगा और महिला किसानों को नेतृत्व प्रदान करने केलिए सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। राष्ट्रपति ने कहाकि संयुक्तराष्ट्र ने वर्ष 2026 को 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' घोषित किया है। उन्होंने कहाकि इस घोषणा में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिला-पुरुष आधारित असमानताओं को दूर करने और महिला नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने केलिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है। राष्ट्रपति ने कहाकि कृषि, विशेषकर कृषि-खाद्य प्रणालियों में कार्यरत महिलाओं के नेतृत्व को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहाकि भारत महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के विचार केसाथ आगे बढ़ रहा है और कृषि क्षेत्रमें नीति निर्माण, निर्णय लेने और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भूमिका अधिक होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि इस क्षेत्रमें सभी स्तरों पर महिलाओं की अधिक भागीदारी महिला-पुरुष समानता को बढ़ावा देने वाली कृषि वृद्धि को प्रोत्साहित करेगी।
राष्ट्रपति ने कहाकि महिला किसानों को भूमि के औपचारिक स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान, वित्तीय संसाधन जैसी सहायता प्रणालियों से संबंधित मामलों में मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बातपर खुशी जताईकि पिछले एक दशक में भारत ने कृषि क्षेत्रमें महिलाओं को सशक्त बनाने केलिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहाकि महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने वाली पहलों ने कृषि में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। राष्ट्रपति ने कहाकि लोग, पृथ्‍वी, समृद्धि, शांति और साझेदारी को समान महत्व देने पर वैश्विक सहमति है। उन्होंने हितधारकों से आग्रह कियाकि जन आयाम पर विचार और कार्य में महिला-पुरुष समानता को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहाकि कृषि सहित क्रियाकलापों के हर क्षेत्रमें महिलाओं और पुरुषों के प्रभावी समावेशन से हम न केवल सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे, बल्कि धरती को कहीं अधिक संवेदनशील और सामंजस्यपूर्ण स्थान बनाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि इस वैश्विक सम्मेलन के प्रतिभागी प्रगति को गति देने और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के मार्ग प्रशस्‍त करेंगे।
कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन-2026 का आयोजन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह (सीजीआईएआर) और पादप किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवी एंड एफआरए) ने संयुक्त रूपसे किया है। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य महिला-पुरुष भागीदारी को मुख्यधारा में लाने केलिए नीतिगत ढांचों और इकोसिस्‍टम को मजबूत करने पर विचार विमर्श करना और टिकाऊ एवं समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को उजागर करना है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भारत और यूएन के कृषि विशेषज्ञ, प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में महिला किसान भी उपस्थित थीं।

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