स्वतंत्र आवाज़
word map

भारत ने वैश्विक बौद्ध चिंतन बढ़ाया-शेखावत

भारत मंडपम नई दिल्ली में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन

सम्मेलन में बौद्ध भिक्षु, विद्वान और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि आए

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 25 January 2026 01:03:37 PM

2nd global buddhist summit at bharat mandapam, delhi

नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा हैकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पदभार संभालने केसाथ ही भारत ने बौद्ध भिक्षुओं, गुरुओं, विद्वानों और चिंतकों को एक अंतर्राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की सक्रिय जिम्मेदारी निभाई है, जिससे शांति सद्भाव केप्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने ये उद्गार भारत मंडपम दिल्ली में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए। उन्होंने वैश्विक स्‍तरपर बौद्ध चिंतन आधारित संवाद को बढ़ावा देने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित किया। गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहाकि भारत सरकार ज्ञान भारतम के अंतर्गत प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु विश्व की सबसे बड़ी पहलों में से एक का क्रियांवयन कर रही है।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहाकि यह महत्वपूर्ण पहल अपनी समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने तथा उसे विश्व केसाथ साझा करने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रतिनिधियों एवं नागरिकों से राय पिथोरा सांस्कृतिक केंद्र दिल्ली में प्रदर्शित भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्‍स ऑफ द अवेकन्ड वन’ का भ्रमण करने का आग्रह किया। उन्होंने 127 वर्ष बाद भारत वापस लाई गई पिपरहवा धरोहरों का स्मरण करते हुए उन्हें भारत की प्राचीन सभ्यता और शाश्वत आध्यात्मिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूपमें वर्णित किया। वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का इस 24-25 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) ने भारत मंडपम नई दिल्ली में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजन किया। शिखर सम्मेलन में केंद्रीय संसदीयकार्य एवं अल्पसंख्यक कार्यमंत्री किरेन रिजिजू, वरिष्ठ गणमान्य नागरिकों, बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
‘सामूहिक ज्ञान, एकजुट आवाज़, पारस्परिक सहअस्तित्व’ विषय पर सम्मेलन में विश्वभर से लगभग 200 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख बौद्ध संगठनों के नेता, प्रतिष्ठित भिक्षु, विद्वान तथा धम्म के अनुयायी शामिल थे। इस शिखर सम्मेलन ने समकालीन और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों पर बौद्ध दृष्टिकोण से संवाद करने हेतु एक साझा मंच प्रदान किया। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुद्ध धर्म के समावेशी और सार्वभौमिक स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहाकि यह केवल बौद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए है। उन्होंने कहाकि जैसे-जैसे विश्वभर में साधक अधिक से अधिक धर्म का रुख कर रहे हैं, भारत पर करुणा, अहिंसा, सद्भाव और सह अस्तित्व के अपने सिद्धांतों को संरक्षित करने, साझा करने और उनके अनुसार जीवन जीने की विशेष जिम्मेदारी है। द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन ने बुद्ध की भूमि तथा सामूहिक ज्ञान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पारस्परिक समझ के वैश्विक पथप्रदर्शक के रूप में की भारत की भूमिका की पुनः पुष्टि की।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]