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देश में सनातन चेतना का उत्सव है-अमित शाह

'गीता प्रेस का भारतीय संस्कृति को अमर करने का मजबूत प्रयास'

ऋषिकेश में गीता प्रेस की मासिक पत्रिका 'कल्याण' का विमोचन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 22 January 2026 02:50:27 PM

monthly magazine 'kalyan' of gita press was launched in rishikesh

ऋषिकेश। गृहमंत्री अमित शाह ने ऋषिकेश में गीता प्रेस की मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक का विमोचन किया और कहाकि गत 100 वर्ष से राष्ट्र को अपनी संस्कृति के आधार पर आगे बढ़ने केलिए प्रेरित करने वाली कल्याण पत्रिका हर दौर में भारतीयता की आवाज़ बनी और इसके सभी अंक आनेवाले समय में अपनी विरासत का अध्ययन एवं अनुसंधान करने वालों केलिए बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत बनेंगे। उन्होंने गुजराती भाषा में गीता प्रेस के 'आरोग्य अंक' का भी विमोचन किया। उन्होंने कहाकि गीता प्रेस ने कल्याण पत्रिका से बताया हैकि सभ्यताएं तलवारों से नहीं, बल्कि शब्द और ज्ञान से खड़ी होती हैं। अमित शाह ने कहाकि सनातन चेतना का उत्सव देशभर में दिखाई दे रहा है और कल्याण पत्रिका ने हर संकट में भारतीय संस्कृति के दीप को जलाए रखने का कार्य किया है। उन्होंने कहाकि कल्याण एक पत्रिका मात्र नहीं है, बल्कि भारतीयों केलिए आध्यात्मिक जगत का पथप्रदर्शक है। उन्होंने कहाकि सनातन धर्म से आकांक्षा रखने वाला दुनिया की समस्याओं के समाधान केलिए भारतीय संस्कृति की ओर देख रहा है और इस भूमि से प्रेम करने वाला भारत और दुनिया का कोईभी व्यक्ति गीता प्रेस से अनजान नहीं हो सकता।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि हनुमान प्रसाद पोद्दार ने गीता प्रेस के जरिए लगभग 103 वर्ष से सनातन धर्म की लौ को ताकत देने का अनुकरणीय कार्य किया है, उन्होंने करोड़ों लोगों को भक्ति के माध्यम से आध्यात्म की ओर प्रेरित किया और इस रास्ते पर चलते हुए मोक्ष तक का रास्ता प्रशस्त किया। अमित शाह ने कहाकि हनुमान प्रसाद पोद्दार ने सबकुछ छोड़कर अपना पूरा जीवन गीता प्रेस को समर्पित कर दिया, उन्होंने गीता प्रेस के जरिए हर व्यक्ति और परिवार के हृदय में भारतीय संस्कृति केप्रति अटूट श्रद्धा जागृत करने का कार्य किया है। अमित शाह ने कहाकि गीता प्रेस मुनाफे केलिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों का निर्माण करने केलिए चलती है, स्वावलंबी तरीके से सद्साहित्य को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने का काम गीता प्रेस ने किया है। उन्होंने कहाकि कल्याण एक प्रकार से ज्ञान की सनातन ज्योति को हर वाचक तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। अमित शाह ने कहाकि भारत की संस्कृति को अमर करने केलिए बहुत सारे महत्वपूर्ण प्रयासों में से सबसे मज़बूत प्रयास का नाम कल्याण पत्रिका है। उन्होंने कहाकि कल्याण ने अपने 100 साल में सनातन धर्म के अनुयायियों की सज्जनशक्ति को संगठित करने का कार्य किया है।
अमित शाह ने कहाकि ने कहाकि जो भारत को जानते हैं, वो गीता प्रेस के अतुलनीय योगदान का मूल्यांकन नहीं कर सकते। गृहमंत्री ने कहाकि कल्याण जैसी पत्रिका का 100 वर्ष पूरा करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, अपनी शुरूआत से आजतक निरंतर कल्याण का एकएक शब्द, वाक्य और अंक, सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को समर्पित रहा है। उन्होंने कहाकि गीता प्रेस ने आदि शंकराचार्यजी के उपनिषदों की मीमांसा को लोगों तक पहुंचाकर एक बहुत बड़ा कार्य किया है। अमित शाह ने कहाकि गीता प्रेस ने चार पीढ़ियों से निरंतर हर पीढ़ी केलिए वही साहित्य बिना किसी प्रकार से डाइल्यूट किए लोकभोग्य बनाने का काम किया है। अमित शाह ने कहाकि कल्याण ने अबतक सनातन समर्पित 100 विशेषांक प्रकाशित किए हैं, वर्ष 1932 के अंक में भगवान श्रीकृष्ण को श्रद्धा की दृष्टि से, राजनीतिज्ञ, तत्वज्ञानी और सभी दुष्टों का दमन करने वाले महापुरुष के रूपमें एकही अंक में कल्याण ने लोगों के सामने रखने का काम किया है। उन्होंने कहाकि कल्याण ने योग अंक 1936 में प्रकाशित किया था, जिसमें योग की व्याख्या, स्वरूप और प्रणालियों पर विस्तार से प्रकाश डालने का काम किया गया था, स्वतंत्रता केबाद कल्याण का पहला प्रकाशित होने वाला अंक नारी अंक था। उन्होंने कहाकि कल्याण का हिंदू संस्कृति अंक उस समय आया, जब 1950 में पाश्चात्य असर से हमारे देश की नीतियां गढ़ी जा रही थीं।
अमित शाह ने कहाकि इस अंक के पीछे विचार रहा होगाकि जब देश आज़ाद होकर अपनी नीतियां बना रहा है, तब उनके मूल में हमारी भारतीय संस्कृति के विचार समाहित होने चाहिएं नकि विदेशी विचार होने चाहिएं। उन्होंने कहाकि कल्याण के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्यों को नीतियों के मूल में समाहितकर नीतियों को गढ़ा जा रहा है। अमित शाह ने कहाकि जब अंग्रेज़ों का शासन था, उस वक्त धर्म को अंधविश्वास कहना एक प्रकार से फैशन बन चुका था, उस वक्त हनुमान प्रसाद पोद्दार ने किसी प्रकार की आक्रामक भाषा का उपयोग किए बिना कल्याण नाम का ज्ञान का एक दीपक जलाया, इसका उद्देश्य लोगों का मंगल और जगत का कल्याण ही था। उन्होंने कहाकि विश्व के कल्याण की भावना को कल्याण में समाहित किया गया है, तर्क, शास्त्र और शांति से जितना विरोध हमारे मूल विचारों का होता था, पोद्दारजी ने उसका उत्तर दिया। उन्होंने कहाकि सनातन की रक्षा शोर से नहीं, बल्कि शास्त्र और तर्क से ही हो सकती है और गीता प्रेस ने कभी अपने प्रचार और धन एकत्रित करने केलिए कुछ नहीं किया, क्योंकि इसका उद्देश्य व्यक्ति केंद्रित नहीं, बल्कि विचार केंद्रित था।
गृहमंत्री ने उल्लेख कियाकि जब कल्याण शुरू हुआ तब महात्मा गांधी ने कहा थाकि कल्याण में कभी विज्ञापन मत छापना और आजतक कल्याण ने एकभी विज्ञापन नहीं छापा है। उन्होंने कहाकि आध्यात्मिक ग्रथों और पत्रिकाओं को बाज़ार के दबाव से मुक्त रहना चाहिए। अमित शाह ने कहाकि गीता प्रेस का उद्देश्य चरित्र और राष्ट्र निर्माण है, गीता प्रेस ने अनेक प्रकार के साहित्यों की रचना की है, जिससे राष्ट्र में एक चेतना की जागृति हुई है, गीता प्रेस ने करोड़ों संतों के अहर्निश प्रयास को रेखांकित कर लोगों को पढ़ने केलिए उपलब्ध कराया है, इसके कारण हम एकबार फिरसे सनातन धर्म केप्रति आकर्षण, आशा और भारतीय संस्कृति में विश्वास दृढ़ होता देख रहे हैं। गृहमंत्री ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 साल के कार्यकाल में देश के युवाओं में एक बहुत बड़ा गुणात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने जिक्र कियाकि 550 साल बाद रामलला का एक गगनचुंबी मंदिर अयोध्या में बन चुका है, औरंगजेब का तोड़ा गया काशी विश्वनाथ कॉरीडोर पूरी दुनिया को संदेश देता हैकि तोड़ने वालों से श्रद्धा की ताकत बहुत बड़ी होती है। हालही में सोमनाथ मंदिर को तोड़े हुए 1000 साल हुए हैं और भारत सरकार पूरा वर्ष सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष के रूपमें मनाने जा रही है। सोमनाथ को 16 बार तोड़ा गया और इसे 16 बार फिर से बनाया गया है और इसे तोड़ने वाले गज़नी, खिलजी आदि सब कहीं गुम हो गए, लेकिन सोमनाथ की सनातन की ध्वजा आज भी लहरा रही है।
अमित शाह ने इस अवसर पर यह भी उल्लेख करते हुए कहाकि कश्मीर से धारा 370 हट गई, महाकालेश्वर का कॉरिडोर बना, केदारनाथ का पुनर्रूद्धार किया गया, बद्रीधाम का स्ट्रेच पूरा हो चुका है। उन्होंने कहाकि देशभर में 35 से अधिक तीर्थों की पुनर्जागृति और महिमामंडन पर विचार हो रहा है। उन्होंने कहाकि मातृभाषा में शिक्षा का अब कोई विरोध नहीं हो रहा है। अमित शाह ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व में हर जगह हिंदी में बोलते हैं तो पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्होंने कहाकि भारत से चुराकर पूरी दुनिया में गई 642 से अधिक मूर्तियों को वापिस लाकर उनके पहले के स्थान पर पुनर्स्थापित करने का अतुलनीय कार्य हुआ है। अमित शाह ने कहाकि करोड़ों संतों ने विकट समय में धर्म, सत्व और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और गीता प्रेस और कल्याण जैसी पत्रिकाओं ने सनातन की लौ को हमेशा बचाकर रखा है। इससे पहले अमित शाह ने देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश में मोक्षदायिनी माँ गंगा के दर्शन पूजन किए और ऋषिकेश के गीता भवन में लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा अर्चनाकर भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी से सभीकी सुख समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और साधु संत महात्मा भी उपस्थित थे।

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