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'भगवान श्रीराम में आस्था भौगोलिक सीमाओं से परे'

सुरेंद्र कुमार पचौरी की पुस्तक के विमोचन पर उपराष्ट्रपति का संबोधन

'श्रीराम मंदिर ने भारतीयों के आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित किया'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 21 January 2026 04:07:46 PM

the book 'the cup of nectar: ​​ram janmabhoomi - challenge and response'

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारत सरकार में सचिव रहे सुरेंद्र कुमार पचौरी की पुस्तक ‘अमृत का प्याला: राम जन्मभूमि-चुनौती और प्रतिक्रिया’ का उपराष्ट्रपति एनक्लेव दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहाकि यह पुस्तक भगवान श्रीराम के जन्मस्थान को पुनः प्राप्त करने के सदियों पुराने संघर्ष का वर्णन करती है और ऐतिहासिक कथा को संतुलन, सहानुभूति और शैक्षिक संयम केसाथ प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहाकि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक निर्णायक क्षण का प्रतीक है, जहां आस्था, इतिहास, कानून और लोकतंत्र का गरिमा केसाथ समन्वय हुआ। उन्होंने यहभी कहाकि भले ही हजारों मंदिर कहीं और बने हों, लेकिन किसी अन्य का महत्व भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर बने मंदिर के बराबर नहीं हो सकता।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि भगवान श्रीराम राष्ट्र और भारत के धर्म की आत्मा हैं। उन्होंने कहाकि धर्म कभी पराजित नहीं हो सकता और सत्य हमेशा विजयी होता है। महात्मा गांधी के रामराज्य के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहाकि यह सभी केलिए न्याय, समानता और गरिमा का प्रतीक है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि भगवान श्रीराम के जन्मस्थान को स्थापित करने की लंबी प्रक्रिया को देखना पीड़ादायक था और ऐसी स्थिति अधिकांश अन्य देशों में असंभव होती। उन्होंने उल्लेख कियाकि यह स्वयं भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है, क्योंकि पूरे राष्ट्र के विश्वास के बावजूद भूमि केवल उचित कानूनी प्रक्रिया और प्रमाण केबाद ही आवंटित की गई। उन्होंने कहाकि यही कारण हैकि भारत को सही अर्थ में लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। वर्ष 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि न्यायालय का यह निर्णय लाखों भारतीयों के लंबे समय के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करता है और यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ को रेखांकित करता है। उन्होंने कहाकि श्रीराम मंदिर के निर्माण ने भारतीयों के आत्म सम्मान को पुनर्स्थापित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि इतिहास लेखन साहित्यिक कार्य की सबसे कठिन विधाओं में से एक है, क्योंकि इसके लिए भावनात्मक संतुलन और सच्चाई केप्रति निष्ठा की आवश्यकता होती है। लेखक की सराहना करते हुए उन्होंने कहाकि सुरेंद्र कुमार पचौरी ने बिना किसी सनसनीखेज या तोड़ मरोड़ के श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के सार को पुस्तक में सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि ऐतिहासिक दस्तावेजों में अंतर के कारण न्याय की लड़ाई लंबी चली। उन्होंने खुशी व्यक्त कीकि यह पुस्तक इस ऐतिहासिक आंदोलन के आधुनिक चरण का वर्णन करती है, साथही यहभी सुनिश्चित करती है कि आने वाली पीढ़ियां राष्ट्रीय आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने केलिए किए गए बलिदान और संघर्षों से अवगत रहें। पुस्तक में उद्धृत एएसआई निष्कर्षों का उद्धरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने पहले से मौजूद संरचना के प्रमाण की ओर इशारा किया और रेखांकित कियाकि न्यायिक निर्णय के पीछे यह पुरातात्विक आधार था।
उपराष्ट्रपति ने फैसला आने केबाद सार्वजनिक प्रतिक्रिया को असाधारण बताया, उन्होंने राष्ट्रीय स्तरपर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट द्वारा संचालित वित्तीय जनसहयोग अभियान को याद किया, जिसने श्रीराम मंदिर निर्माण केलिए विश्वभर के भक्तों से ₹3000 करोड़ से अधिक जुटाए। उन्होंने 1990 के दशक में शिला पूजन में अपनी माता की भागीदारी की व्यक्तिगत स्मृति को भी साझा किया। सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने सुनिश्चित कियाकि पवित्र स्थल का पुनरुद्धार भारत के परिपक्व लोकतंत्र और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति के रूपमें सामने आए। उपराष्ट्रपति ने 25 नवंबर 2025 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह को याद किया, जो राष्ट्र केलिए एक गहरा भावपूर्ण क्षण था। भगवान श्रीराम की सार्वभौमिक अपील को प्रतिबिंबित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि श्रीराम में श्रद्धा भौगोलिक सीमाओं से परे है, जो केवल अयोध्या और रामेश्वरम में ही नहीं, बल्कि फिजी और कंबोडिया के अंगकोर वाट जैसे स्थानों में भी प्रकट होती है।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि भगवान श्रीराम का जीवन और आदर्श मानवता को यह सिखाते हैंकि सच्ची महानता राज्यों पर शासन करने के बजाय सद्गुण में और लोगों के दिल जीतने में निहित है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह कियाकि वे अपने जीवन में इन शाश्वत आदर्शों का पालन करने का प्रयास करें। सीपी राधाकृष्णन ने सुरेंद्र कुमार पचौरी को उनकी पुस्तक केलिए बधाई दी और आशा व्यक्त कीकि यह पुस्तक व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचेगी। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के संग्रहालय और पुस्तकालय के कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, भारत के पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक विनोद राय, यूपीएससी के पूर्व अध्यक्ष दीपक गुप्ता, उपराष्ट्रपति के सचिव अमित खरे, हर्ष आनंद पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के आशीष गोसाईं और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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