जोधपुर में माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन एंड एक्सपो में बोले गृहमंत्री
माहेश्वरी समाज का देश-विदेश की विकास यात्रा में अमूल्य योगदानस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 10 January 2026 05:09:44 PM
जोधपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जोधपुर में माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन एंड एक्सपो-2026 को संबोधित करते हुए कहा हैकि आज उन्हें एक ऐसे समाज केबीच उपस्थित होने की खुशी है, जिसने इस देश को सिर्फ देने केलिए ही अनुकरणीय कार्य किए हैं। उन्होंने कहाकि माहेश्वरी समाज से निकले रत्नों ने भारत को हर क्षेत्रमें आभूषण पहने हुए व्यक्ति की तरह चमकाने का काम किया है। उन्होंने कहाकि देश और विदेश में बहुत बड़े पदों पर पहुंचने और संस्थानों में उच्च स्वीकृति प्राप्त करने के बावजूद यदि कोई समाज अपने मूल से इतना गहराई से जुड़ा रहा है तो वह माहेश्वरी समाज ही है, इस समाज ने देश को जब जिस प्रकार की आवश्यकता पड़ी, उसी प्रकार से खुदको प्रस्तुत किया है। अमित शाह ने उल्लेख कियाकि जब मुगलों केसाथ युद्ध चल रहे थे, तब राजाओं-महाराजाओं के युद्ध के खजाने को भरने का कार्य माहेश्वरी समाज ने ही किया, इसी प्रकार जब अंग्रेजों से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी जा रही थी तो महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम का बहुत बड़ा हिस्सा आर्थिक रूपसे माहेश्वरी समाज के सेठों ने वहन किया था।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि इसका पूरा लेखा-जोखा भले ही उपलब्ध न हो, मगर दुनिया जानती हैकि माहेश्वरी समाज के सेठों ने इस आंदोलन को संचालित करने में बड़ा योगदान दिया। उन्होंने कहाकि मुगलों के खिलाफ संघर्ष से लेकर, स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी केबाद देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में माहेश्वरी समाज का योगदान अमूल्य रहा। गृहमंत्री ने कहाकि आज़ादी केबाद देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ना था, आत्मनिर्भर बनना था, उद्योगों के क्षेत्रमें पूरी दुनिया की रणनीति को पीछे छोड़कर आगे निकलना था, इस दिशामें भी माहेश्वरी समाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कहाकि चाहे मैन्युफैक्चरिंग का क्षेत्र हो, ट्रेडिंग हो, वेल्थ जेनरेशन हो या फिर टेक्नोलॉजी को अपनाना हो, सभी क्षेत्रों में माहेश्वरी समाज ने सदैव एक प्रगतिशील और दूरदर्शी समाज का परिचय दिया है। उन्होंने कहाकि इससे माहेश्वरी समाज ने यह सिद्ध किया हैकि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं। अमित शाह ने कहाकि गुजरात में मारवाड़ियों केलिए एक प्रसिद्ध कहावत हैकि जहां न पहुंचे रेलगाड़ी, वहां पहुंचे मारवाड़ी।
अमित शाह ने कहाकि इस कहावत की तरह ही माहेश्वरी समाज ने हर क्षेत्रमें, दुनिया के कोने-कोने तक फैलकर न केवल राजस्थान और भारत को जीवित रखा है, बल्कि उन्हें मजबूत और समृद्ध बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहाकि हमारे समाजों ने कभी देश को विभाजित नहीं किया, ये संकुचितता के नहीं, बल्कि संगठन के द्योतक हैं। उन्होंने कहाकि अगर देश का हर समाज अपने लोगों को आगे बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प ले ले तो आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य अपनेआप पूरा हो जाएगा। गृहमंत्री ने कहाकि माहेश्वरी समाज ने सेवा के संकल्प को चरितार्थ किया है, 1000 से अधिक प्रभुजनों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना, आवास देना, रहने की समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना, यह सब दर्शाता हैकि ‘अपना घर’ की कल्पना माहेश्वरी समाज के डीएनए में ही बसी हुई है। अमित शाह ने कहाकि माहेश्वरी समाज 1891 से आजतक संगठित होकर अपने समाज केलिए तो कल्याण का काम कर ही रहा है, मगर देश और बाकी समाजों की भी हमेशा चिंता की है। उन्होंने कहाकि माहेश्वरी समाज ही एक ऐसा समाज है, जिसके हाथ में तलवार और तराजू दोनों अच्छे लगते हैं। उन्होंने कहाकि माहेश्वरी समाज से आनेवाले स्वतंत्रता सेनानियों की सूची इतनी लंबी हैकि नाम गिनते-गिनते थक जाएंगे।
गृहमंत्री अमित शाह ने जिक्र कियाकि 550 वर्ष केबाद रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं, निर्माणकार्य पूरा हो गया है, प्राणप्रतिष्ठा हो चुकी है और ऊपर भगवा ध्वज लहरा रहा है। उन्होंने कहाकि राम मंदिर आंदोलन में सबसे पहली आहुति देने वाले दोनों भाई माहेश्वरी समाज से थे। उन्होंने कहाकि इस देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में भी माहेश्वरी समाज का बलिदान और योगदान बहुत बड़ा रहा है। उन्होंने माहेश्वरी समाज के युवाओं का आह्वान कियाकि वे देश को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें। अमित शाह ने कहाकि स्वदेशी हमारा जीवन मंत्र होना चाहिए और स्वभाषा हमारे व्यवहार में आनी चाहिए। उन्होंने कहाकि माहेश्वरी समाज हमेशा से जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर रहा है। गृहमंत्री ने कहाकि उत्पादन कार्य से जुड़े उद्यमी न सिर्फ अपना काम जारी रखें, बल्कि दुनिया में सबसे आगे बढ़ें, साथ ही ऐसी चीजों का भी उत्पादन शुरू करें, जो अभी भारत में नहीं बन रहीं। उन्होंने कहाकि आत्मनिर्भर भारत की यह संकल्पना ही हमें दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बना सकती है। अमित शाह ने यह भी कहाकि हमारा आग्रह हैकि हर ट्रेडर तय कर लेकि यदि मेरे देश में बनी हुई चीज उपलब्ध है तो मैं उसी का व्यापार करूंगा, स्वदेशी ही आत्मनिर्भरता का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है।
गृहमंत्री ने कहाकि स्वदेशी केसाथ स्वभाषा भी आवश्यक है दुनिया में प्रगति केलिए जो भाषा बोलनी पड़े, वह बोलें, जो सीखनी पड़े, सीखें, इसमें कोई विरोध नहीं है, मगर घर में बच्चों केसाथ मातृभाषा और हिंदी में ही बोलें। उन्होंने कहाकि यदि हम बच्चों केसाथ स्वभाषा में बातचीत करेंगे और उन्हें अपनी मातृभाषा सिखाएंगे तो वे स्वयं अपने इतिहास से, अपने मारवाड़ से और राजस्थान के दैदीप्यमान इतिहास से गहराई से जुड़ जाएंगे, इससे वे एक पीढ़ी आगे बढ़ जाएंगे। अमित शाह ने कहाकि भारतीय भाषाओं का उपयोग ही समाज और संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है, जरूरत पड़ने पर विदेशी भाषा अवश्य बोलें, लेकिन अपने बच्चों से अपनी मातृभाषा में ही बात करने का आग्रह करें, यह देश को आगे ले जाने केलिए बहुत जरूरी है। इस अवसर पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और बड़ी संख्या में माहेश्वरी समाज के लोग उपस्थित थे।