'ऑपरेशन सिंदूर नागरिक सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण'
एलबीएसएनएए मसूरी में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का संबोधनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 29 November 2025 04:08:46 PM
मसूरी (उत्तराखंड)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने युवा नागरिक सेवकों से कहा हैकि वे राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझने और वीर सैनिकों की तरह ही कठिन परिस्थितियों केलिए सदैव तैयार रहें। रक्षामंत्री ने कहाकि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रशासनिक मशीनरी ने सशस्त्र बलों केसाथ मिलकर महत्वपूर्ण सूचनाओं का संचार किया और जनता का विश्वास जीता। रक्षामंत्री ने लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी (एलबीएसएनएए) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहाकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों ने संतुलित और बिना किसी उकसावे के जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी शिविरों को नष्ट कर दिया, लेकिन पड़ोसी देश के दुर्व्यवहार के कारण ही सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं हो पाई। उन्होंने अपने सैनिकों की वीरता और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों की भी सराहना की। रक्षामंत्री ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने केलिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा केबीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' और 'सुधार प्रदर्शन एवं परिवर्तन' मंत्र का उल्लेख करते हुए कहाकि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने में नागरिक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहाकि जब वर्ष 2014 में हमारी सरकार बनी थी, तब आर्थिक मामले में भारत 11वें स्थान पर था, पिछले 9-10 वर्ष में हम चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहाकि यहां तककि मॉर्गन स्टेनली जैसी अत्यधिक प्रतिष्ठित वित्तीय फर्म भी अब कहती हैकि भारत अगले दो-तीन वर्ष में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। उन्होंने नागरिक सेवकों से कहाकि आप केवल आदर्शवादी संरक्षक नहीं, बल्कि लोगों के सेवक हैं, आप केवल प्रदाता ही नहीं, बल्कि सशक्तिकरण के सूत्रधार भी हैं, आपका चरित्र भ्रष्ट न हो, आपका आचरण सत्यनिष्ठा से परिपूर्ण होना चाहिए, आपको एक ऐसी संस्कृति बनानी है, जहां सत्यनिष्ठा न तो कोई गुण हो और न ही अपवाद, बल्कि यह दैनिक जीवन का एक सामान्य हिस्सा हो। उन्होंने अधिकारियों से उत्तरदायी और सार्वजनिक जवाबदेही की भावना केसाथ कार्य करने को कहा। इससे पहले राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अकादमी परिसर में एक ओडीओपी मंडप का भी उद्घाटन किया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नागरिक सेवकों से प्रौद्योगिकी संचालित युग में नवोन्मेषी तरीके से कार्य करने और लोगों की समस्याओं का समाधान खोजने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आयकर विभाग की फेसलेस असेसमेंट योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए कहाकि प्रौद्योगिकी आज एक सक्षमकर्ता की भूमिका निभा रही है। उन्होंने बतायाकि एआई संचालित स्वचालन प्रणाली रक्षा खरीद और भुगतान का पारदर्शी तरीके से विश्लेषण करती है। उन्होंने कहाकि प्रौद्योगिकी एक माध्यम होनी चाहिए, साध्य नहीं। रक्षामंत्री कहा ने अधिकारियों से कहाकि आपको जन पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने केलिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहाकि नागरिक सेवकों के रूपमें प्रत्येक नागरिक केसाथ सहानुभूति और समझदारी से पेश आएं। उन्होंने कहाकि जब अधिकारी समाज के वंचित या कमज़ोर वर्गों केसाथ संवाद करते हैं तो उन्हें यह समझना चाहिएकि लोगों के संघर्ष न केवल उनके प्रयासों से, बल्कि व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होते हैं, यही बात एक प्रशासक को वास्तव में जनकेंद्रित और करुणामय बनाती है।
रक्षामंत्री ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की निरंतर प्रगति को स्वीकार करते हुए कहाकि नवीनतम यूपीएससी परीक्षा में एक महिला ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है और शीर्ष पांच उम्मीदवारों में से तीन महिलाएं थीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि वर्ष 2047 तक कई महिलाएं कैबिनेट सचिव के पदों तक पहुंचेंगी और भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व करेंगी। राजनाथ सिंह ने फाउंडेशन कोर्स को केवल एक प्रशिक्षण मॉड्यूल नहीं, बल्कि एक कुशल, सक्षम और संवेदनशील शासन प्रणाली के निर्माण की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने एलबीएसएनएए की व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना की, जो इसे एक संपूर्ण संस्थान बनाती है और देश की प्रशासनिक क्षमताओं को मज़बूत बनाती है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की विरासत पर रक्षामंत्री ने कहाकि उनके नाम पर स्थापित अकादमी साहस, सरलता और सत्यनिष्ठा की प्रतीक है। उन्होंने 1965 के युद्ध में शास्त्रीजी के नेतृत्व, हरित क्रांति में उनकी भूमिका और ‘जय जवान जय किसान’ संदेश को याद किया और अधिकारियों से उनसे प्रेरणा लेने को कहा। उन्होंने कहाकि यूपीएससी और एलबीएसएनएए केबीच साझेदारी ने प्रशासकों की कई पीढ़ियों को आकार दिया है और विश्वास हैकि यह भारत के शासन ढांचे को मज़बूत करती रहेगी।