'भगवतगीता और महात्मा गांधी का स्वदेशी मॉडल अपनाएं'
आत्मनिर्भरता से भारत की प्रगति का मार्गदर्शन-उद्योग मंत्रीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 29 November 2025 12:14:07 PM
नई दिल्ली। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम और चार देशों के ईएफटीए समूह केसाथ संतुलित और न्यायसंगत व्यापार समझौते किए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बतायाकि भारत अभी अमेरिका, यूरोपीय संघ, खाड़ी सहयोग परिषद में शामिल देशों और न्यूजीलैंड, इस्राइल, यूरेशिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका तथा मर्कोसुर समूह सहित लगभग 50 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 14 देशों केसाथ बातचीत कर रहा है। पीयूष गोयल भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) की 98वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित कर रहे थे। पीयूष गोयल ने भगवद्गीता और महात्मा गांधी के स्वदेशी मॉडल पर ज़ोर का उल्लेख करते हुए कहाकि आत्मनिर्भरता का विचार भारत के सभ्यतागत लोकाचार का केंद्र बिंदु है। उन्होंने कहाकि आत्मनिर्भरता ने ऐतिहासिक रूपसे भारत की प्रगति का मार्गदर्शन किया है और यह देश की आर्थिक रणनीति का भी केंद्र बिंदु बनी हुई है। उन्होंने कहाकि आत्मनिर्भर भारत पर ध्यान केंद्रित करने से यह दृष्टिकोण और भी मज़बूत हुआ है।
पीयूष गोयल ने ईएफटीए समझौते का उल्लेख करते हुए कहाकि इस समूह ने नवाचार और सटीक विनिर्माण क्षेत्रमें भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार में भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रकाश डालते हुए कहाकि भारत में किए जानेवाले उच्चगुणवत्ता वाले नवाचार यूरोप या अमेरिका की तुलना में बहुत कम लागत पर हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत केलिए एक दूरदर्शी और वैश्विक रूपसे प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। पीयूष गोयल ने नवाचार और प्रौद्योगिकी में भारत की मजबूती पर प्रकाश डाला, जिसमें युवा जनसांख्यिकी, बढ़ते डिजिटल उपयोग और बढ़ती प्रतिभा का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहाकि भारत में बड़ी संख्या में एसटीईएम स्नातक, व्यापक इंटरनेट पहुंच अप्लाइड एआई, स्वचालन, रोबोटिक्स और गहन तकनीकी नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रबल संभावनाएं पैदा करते हैं। वाणिज्य मंत्री ने कहाकि हालही में घोषित 12 अरब डॉलर के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष केसाथ स्टार्टअप्स और गहन तकनीकी उद्योगों को निरंतर समर्थन से भारत के नवाचार परितंत्र को और गति मिलेगी।
पीयूष गोयल ने देश के युवाओं को भावी अवसरों का लाभ उठाने योग्य बनाने केलिए कौशल विकास को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहाकि ढलती उम्र की आबादी से जूझ रही कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत भारत की युवा आबादी उभरती हुई तकनीकों को तेज़ीसे अपना रही है और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म केसाथ पहलेही तेजी से जुड़ चुकी है। उन्होंने कहाकि यह तत्परता देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य में एक प्रमुख भूमिका निभाने केलिए तैयार करती है। पीयूष गोयल ने कहाकि हालकी भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों ने विश्वसनीय साझेदारों और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहाकि भारत के एफटीए और आर्थिक साझेदारियों के बढ़ते नेटवर्क का उद्देश्य निष्पक्षता, पारदर्शिता और पारस्परिक लाभ पर आधारित दीर्घकालिक सहयोग का निर्माण करना है। पीयूष गोयल ने पीईएसटीएलई ढांचे के जरिए देश की खूबियों को रेखांकित किया और कहाकि राजनीतिक रूपसे न्यूनतम सरकार अधिकतम काम केलिए प्रतिबद्ध एक स्थिर और विश्वसनीय सरकार ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।
उद्योग मंत्री ने कहाकि आर्थिक क्षेत्रमें राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन और 25000 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन जैसी पहल भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद कर रही है। उन्होंने कहाकि सामाजिक मोर्चे पर चार श्रम संहिताएं बेहतर वेतन और सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, जबकि अंत्योदय दृष्टिकोण ने बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति में मदद की है। पीयूष गोयल ने प्रौद्योगिकी क्षेत्रमें बाहरी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों का उल्लेख किया, इन पहलों में सेमीकंडक्टर मिशन (76000 करोड़ रुपये) और स्थायी चुंबक उत्पादन केलिए 7000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम शामिल है, जो घरेलू विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को मज़बूत करता है। उन्होंने जन विश्वास 3.0 की दिशा में प्रगति सहित चल रहे सुधारों का उल्लेख किया, जिसे व्यापार सुगमता बढ़ाने केलिए डिज़ाइन किया गया है।
पीयूष गोयल ने विश्वास व्यक्त कियाकि परमाणु ऊर्जा विधेयक-2025 परमाणु क्षेत्र को खोलकर ऊर्जा संप्रभुता को मज़बूत करेगा और ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक बनकर उभरेगा। केंद्रीय मंत्री ने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ से नवाचार को बढ़ावा देने, अनुसंधान और विकास को गहन करने, उद्योग अकादमिक संबंधों को मजबूत करने और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में देश की यात्रा में सहयोग करने केलिए एक मिशन संचालित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहाकि उद्योग, सरकार और नागरिकों के सामूहिक प्रयास भारत को एक सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूपमें उभरने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण होंगे।