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'भारत में हमेशा से उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रवृत्ति'

श्रीनगर में नैनो प्रौद्योगिकी पर पांच दिनी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

नैनो प्रौद्योगिकी में अनुसंधानों पर प्रस्तुति और चर्चा की गई

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 8 September 2021 12:56:24 PM

five day international conference on nanotechnology in srinagar

श्रीनगर। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर में बेहतर जीवन केलिए नैनो प्रौद्योगिकी पर पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन का 7 वां संस्करण है और अन्ना विश्वविद्यालय, शेर-ए कश्मीर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-कश्मीर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान मिजोरम, एसएसएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, एसकेआईएमएस, एमजी विश्वविद्यालय केरल और भारत की सामग्री अनुसंधान सोसायटी के तत्वावधान में नैनोस्केल रिसर्च फैसिलिटी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। हाइब्रिड मोड में आयोजित सम्मेलन में देशभर से लगभग 300 प्रतिभागी शामिल होंगे।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है, भारत में हमेशा से ही उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रवृत्ति रही है, किंतु अतीत में इसे लागू करने की इच्छा का अभाव था पर अब इस कमी को पूरा कर दिया गया है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने वैज्ञानिक दूरी को मिटा दिया है और निजी क्षेत्र के उद्यमियों और स्टार्ट-अप केलिए इस क्षेत्र को खोल दिया है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र गोपनीयता के पर्दे के पीछे बंद किया हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के विस्तार की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि भारत एक अग्रणी वैश्विक खिलाड़ी के रूपमें उभर रहा है, क्योंकि अब निजीकरण को संभव बना दिया गया है। डॉ जितेंद्र सिंह ने युवा और उभरते वैज्ञानिकों को तैयार करने एवं कम उम्र में वैज्ञानिक क्षमता और प्रवृत्ति का दोहन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने एक 11 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी लड़की का उल्लेख किया, जिसे कार्बन नैनो-ट्यूब का उपयोग करके सीसा (लेड) से दूषित पानी का पता लगाने केलिए एक त्वरित, कम लागत वाले परीक्षण का आविष्कार करने केलिए अमेरिका के शीर्ष युवा वैज्ञानिक के रूपमें सम्मानित किया गया है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल के वर्ष में नाक के अंदर दवाई डालकर (इंट्रानैसल) प्रविधि से श्लेष्मिक (म्यूकोसल) क्षेत्र में आनेवाली विभिन्न वाली विभिन्न विषमताओं को दूर करने केलिए नैनो तकनीक आधारित दवा वितरण प्रणाली लागू की गई है और उस चरण तक प्रगति कर ली गई है, जहां तक दवा का प्रभावी वितरण संभव है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 को रोकने और इलाज केलिए नैदानिक व अनुप्रयोगों केलिए गैर-विषैले एंटीवायरल नैनोकणों का उपयोग विकसित किया गया है। सम्मेलन केलिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर को बधाई देते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह आयोजन नैनो प्रौद्योगिकी में अग्रणी अनुसंधान विचारों को प्रस्तुत करने और चर्चा करने केलिए एक जीवंत मंच प्रदान करेगा, शिक्षा और उद्योगों के बीच परस्पर संपर्क का एक माध्यम बनेगा। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि नैनो तकनीक की जानकारी भारतीयों को हजारों वर्षों से थी। उन्होंने कहा कि विज्ञान की कई विधाओं में नैनो प्रौद्योगिकी की उपयोगिता है और हाल के दिनों में इस विषय पर किए जा रहे शोध के परिमाण में कई गुना वृद्धि भी हुई है।

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