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'जन-उत्सव के रूपमें मनाएंगे आज़ादी का महोत्सव'

प्रधानमंत्री ने साबरमती आश्रम से शुरु किया 'आज़ादी का अमृत महोत्सव'

आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर विभिन्न कार्यक्रम व डिजिटल पहलें लांच

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 12 March 2021 05:50:06 PM

pm narendra modi launches of the 'azadi ka amrit mahotsav'

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से स्वतंत्रता मार्च को झंडी दिखाते हुए ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ India@75 के पूर्वावलोकन कार्यकलापों का उद्घाटन किया। उन्होंने India@75 समारोहों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और डिजिटल पहलों को भी लांच किया। प्रधानमंत्री ने साबरमती आश्रम में जनसमूह को संबोधित करते हुए 15 अगस्त 2022 से 75 सप्ताह पूर्व आज़ादी का अमृत महोत्सव आरंभ करने की चर्चा की, जो 15 अगस्त 2023 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि आज़ादी का अमृत महोत्सव भारत की स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए भारत सरकार के कार्यक्रमों की एक श्रृंखला है और यह महोत्सव जनभागीदारी की भावना में एक जन-उत्सव के रूपमें मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी और उन महान महापुरुषों को श्रद्धासुमन अर्पित किए, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच स्तंभों-स्वतंत्रता संग्राम, 75 पर विचार, 75 पर उपलब्धियां, 75 पर कार्रवाईयां तथा 75 पर संकल्प को प्रेरणा मानते हुए उनके सपनों और दायित्वों को बनाए रखने तथा आगे बढ़ने के मार्गदर्शी बल के रूपमें दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी अमृत महोत्सव का अर्थ स्वतंत्रता की ऊर्जा का अमृत, स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं की प्रेरणाओं का अमृत, नए विचारों और संकल्पों का अमृत और आत्मनिर्भरता का अमृत है। नमक के प्रतीक की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल लागत के आधार पर नमक का मूल्य कभी भी नहीं आंका गया, भारतीयों के लिए नमक का अर्थ ईमानदारी, भरोसा, वफादारी, श्रम, समानता और आत्मनिर्भरता है। उन्होंने कहा कि उस समय नमक भारत की आत्मनिर्भरता का एक प्रतीक था, ब्रिटिश सरकार ने भारत के मूल्यों के साथ-साथ इस आत्मनिर्भरता को भी क्षति पहुंचाई, भारत के लोगों को इंग्लैंड से आनेवाले नमक पर निर्भर रहना पड़ता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीजी ने देश और जनमानस के इस दर्द को समझा तथा इसे एक आंदोलन में तब्दील कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1857 में भारतीय स्वतंत्रता के प्रथम युद्ध, विदेश से महात्मा गांधी के लौटने, सत्याग्रह की शक्ति का राष्ट्र को स्मरण कराने, लोकमान्य तिलक द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता का आह्वान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज का दिल्ली मार्च और दिल्ली चलो के नारे जैसे स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्षणों को याद किया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के इस अलख को निरंतर जगाए रखने का काम प्रत्येक क्षेत्र में, प्रत्येक दिशा में देश के कोने-कोने में हमारे आचार्यों, संतों तथा शिक्षकों ने किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रकार भक्ति आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी स्वाधीनता आंदोलन के लिए मंच तैयार किया, चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस, श्रीमंत शंकर देव ने एक राष्ट्रव्यापी स्वतंत्रता संग्राम की आधारशिला का निर्माण किया, इसी प्रकार देश के सभी क्षेत्रों के संतों ने राष्ट्र की चेतना और स्वाधीनता संग्राम में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि देशभर के ऐसे कई दलित, आदिवासी, महिलाएं और युवक थे, जिन्होंने अनगिनत कुर्बानियां दी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के 32 वर्षीय कोडी कठा कुमारन जैसे अज्ञात नायकों की कुर्बानियों को याद किया, जिसने ब्रिटिश सेना द्वारा सर में गोली लगने के बावजूद देश के झंडे को ज़मीन पर नहीं गिरने दिया, तमिलनाडु की वेलु नचियार पहली महारानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ीं। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि हमारे देश के जनजातीय समाज ने विदेशी शासन को झुकाने के लिए निरंतर बहादुरी और हिम्मत के साथ लड़ाई लड़ी, झारखंड में बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों को चुनौती दी तथा मुर्मु बंधुओं ने संथाल आंदोलन का नेतृत्व किया। नरेंद्र मोदी ने उल्लेख किया कि ओडिशा में चकरा बिसोई ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी तथा लक्ष्मण नायक ने गांधीवादी सिद्धांतों के जरिए जागरुकता फैलाई। उन्होंने आंध प्रदेश में मन्याम विरुडु अलुरी सिराराम राजू, जिसने राम्पा आंदोलन का नेतृत्व किया तथा पसाल्था खुंगचेरा जिसने मिजोरम की पहाड़ियों में अंग्रेजों का सामना किया जैसे अन्य अज्ञात जनजातीय नायकों का भी नाम लिया, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने गोमधर कोन्वार, लक्षित बोरफुकन तथा सेरात सिंह जैसे असम तथा पूर्वोत्तर के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने देश की आज़ादी में योगदान दिया है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश हमेशा गुजरात के जम्बुघोडा में नायक जनजातीयों के बलिदान तथा मानगाध में सैंकड़ों आदिवासियों के नरसंहार को याद रखेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश प्रत्येक राज्य तथा प्रत्येक क्षेत्र में इसके इतिहास को संरक्षित करने के लिए पिछले छह वर्ष से सजग प्रयास कर रहा है, दांडी यात्रा के साथ जुड़े स्थल का पुनरुत्थान दो वर्ष पहले ही कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि उस स्थान का भी पुनरुत्थान किया जा रहा है, जहां देश की प्रथम स्वतंत्र सरकार के निर्माण के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान में तिरंगा फहराया था। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के साथ जुड़े स्थानों को पंचतीर्थ के रूपमें विकसित किया जा रहा है, जालियांवाला बाग में स्मारक तथा पैका आंदोलन के स्मारक का भी विकास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने देश और विदेश दोनों ही जगह पर कड़ी मेहनत के साथ खुद को साबित किया है, हम अपने संस्थान और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गर्व करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की जननी भारत अभी भी लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाते हुए आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की उपलब्धियां समस्त मानवता को भरोसा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा आत्मनिर्भरता से भरी हुई है और यह पूरी दुनिया की विकास यात्रा को गति दे रही है। प्रधानमंत्री ने युवाओं और विद्वानों से हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास के दस्तावेजीकरण से देश के प्रयासों को पूरा करने की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने उनसे स्वतंत्रता आंदोलन की उपलब्धियों को विश्व के सामने प्रदर्शित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कला, साहित्य, थियेटर की दुनिया, फिल्म उद्योग तथा डिजिटल मनोरंजन से जुड़े लोगों से उन अनूठी कहानियों, जो हमारे अतीत में बिखरी हुई हैं की खोज करने और उनमें नया जीवन डालने का आग्रह किया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित थे।

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