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नत्थनपुर में माधो सिंह भण्डारी किसान भवन

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देहरादून। मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को नत्थनपुर में किसान भवन का शिलान्यास किया और कृषि रथों को भी हरी झण्डी देकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने सरकार किसान के द्वार कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित किये जाने वाले दस दिवसीय कार्यक्रम कृषक महोत्सव का भी शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि कृषक महोत्सव के अवसर पर नत्थनपुर में ऐसे केन्द्र किसान भवन का शिलान्यास हुआ है, जहां कृषि से जुड़े विशेषज्ञ विचारों को संकलित कर इसका विस्तार कर सकते हैं। यह भवन शोध का महत्वपूर्ण केन्द्र होगा जो इंटरनेट के माध्यम से विकासखण्ड स्तर पर रह रहे किसानों को खेती के नये-नये तरीके एवं उपकरणों के बारे में जानकारी देगा। ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने भवन का नाम वीर माधो सिंह भण्डारी किसान भवन करने की घोषणा की। भंडारी ने खेतों की रक्षा के लिए अपने परिवार का बलिदान किया था, जो यहां के काश्तकारों के लिए प्रेरक प्रसंग है। मुख्यमंत्री ने कृषि क्रांति गीत कैसेट एवं कलेण्डर का विमोचन भी किया और काश्तकारों को ट्रेक्टर के लिए अनुदान के चेक दिए।
निशंक ने कहा कि किसान भवन प्रदेश ही नहीं, अपितु प्रदेश से बाहर के काश्तकारों के लिए आदर्श केन्द्र होगा। हमारा प्रदेश कृषि के क्षेत्र में अन्य प्रदेशों से अलग है। यहां का मौसम शंकर किस्म बीज के उत्पादन के लिए अनुकूल है। कृषि को काश्तकारों के लिए आर्थिकी का बेहतर संसाधन बनाने के लिए प्रदेश सरकार सम्भावनाएं तलाश कर रही है। उत्तराखण्ड सरकार ने फूलों की खेती, सगन्ध पौध उत्पादन, औद्यानिक विकास की अनेक सम्भावनाओं पर अभिनव प्रयोग किए हैं, जिनका लाभ किसानों को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जड़ी-बूटी उत्पादन के कार्य में 50 हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है। वर्तमान में 15 हजार किसानों को इस कार्य में जोड़ा गया है। स्थानीय काश्तकार 150 करोड़ रुपये आमदनी फूलों की खेती से प्राप्त कर रहे हैं। चीन से लगभग 62 प्रतिशत रेशम यहां आयात हो रहा है। उन्होंने रेशम विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिये कि वे रेशम उत्पादन में काश्तकारों को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि देश का सबसे बड़ा फार्मासिटी देहरादून में है, जहां डेढ़ हजार करोड़ वार्षिकी जड़ी-बूटी उत्पाद की खपत है। उन्होंने काश्तकारों से समय और श्रम का समुचित उपयोग करने का आह्वान किया और कृषि एवं उद्यान से जुड़े संस्थानों के वैज्ञानिकों से अपील की कि वे शोध करें और कृषि एवं जड़ी-बूटी उत्पादन में उसका क्रियान्वयन कराएं। उन्होंने कहा कि यहां पर परती भूमि को कृषि भूमि में बदलने की योजना संचालित है।
न्याय पंचायत स्तर तक चलने वाले इस कृषि महोत्सव में किसानों को उन्नत बीजों के साथ-साथ कृषि के आधुनिक तरीके, उपकरणों की जानकारी एवं उपलब्धता कराई जाती हैं। जनसंख्या के बढ़ते दवाब से यहां कृषि भूमि घटी है, जबकि कृषि उपज की मांग बढ़ी है। कृषि मंत्री ने किसानों को सुझाव दिया कि वे जंगली जानवरों से रक्षा के लिए सगन्ध पौध खेती एवं अन्य फसलों की खेती करें, जो जंगली जानवरों से सुरक्षित है। उन्होंने जानकारी दी कि देहरादून के तिमली मानसिंह में सहकारी खेती का प्रयोग किया गया है, जहां बाहर रह रहे उत्तराखण्ड वासियों ने एक साथ मिलकर संगन्ध पौधों का रोपण कर पैतृक भूमि में अपनी आस्था जताई है। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक चकबन्दी सगन्ध शासनादेश का अनूठा प्रयोग सरकार ने किया है जिसके शीघ्र परिणाम मिलने लगेंगे। सिंचाई मंत्री मातबर सिंह कंडारी, मसूरी विधायक जोत सिंह गुनसोला, कृषि सचिव ओम प्रकाश ने भी विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर राज्य और कल्याण परिषद उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, जड़ी-बूटी विकास परिषद उपाध्यक्ष डॉ आदित्य कुमार, राज्य मीडिया सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष डॉ देवेन्द्र भसीन, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष सुशील बलूनी, पेयजल निर्माण निगम अध्यक्ष बृज भूषण गैरोला, प्रधानमंत्री सड़क विकास अभिकरण उपाध्यक्ष भास्कर नैथानी, सैनिक कल्याण बोर्ड उपाध्यक्ष कर्नल पीडी कुड़ियाल, उपाध्यक्ष केएमबीएन रवी मोहन अग्रवाल, उपाध्यक्ष बागवानी बोर्ड आदित्य कोठारी, आवास विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश बंसल, ब्लॉक प्रमुख खेमपाल सिंह सहित अनेक गण्मान्य लोग उपस्थित थे।

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