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'लोकसेवक ईमानदार संवेदनशील व प्रतिबद्ध रहें'

प्रधानमंत्री के साथ वर्ष 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षुओं का संवाद

'नागरिककेंद्रित शासन केसाथ राष्ट्र निर्माण में बढ़चढ़कर योगदान दें'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 23 June 2026 04:39:22 PM

interaction of ias probationers of the year 2024 batch with the prime minister

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु अधिकारियों से आज सुबह सेवा तीर्थ नई दिल्ली में मुलाकात की। इन प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूपमें नियुक्त किया गया है। प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रधानमंत्री केसाथ संवाद में अपने क्षेत्र से संबंधित प्रशिक्षण और मंत्रालयों से जोड़े जाने केबाद कामकाज के अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहाकि विभागों में दो वर्ष के कामकाज के अनुभव और प्रशासनिक प्रशिक्षण केबाद वे अब एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, जहां उनके निर्णय न केवल उनके अपने करियर, बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी आकार देंगे। उन्होंने कहाकि लोकसेवकों की असली परीक्षा वास्तविक परिस्थितियों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता केसाथ निपटने से प्रारंभ होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासनिक अधिकारियों से दृढ़ संकल्प, नवाचार और नागरिककेंद्रित शासन केसाथ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों से हमेशा यह याद रखने का आग्रह कियाकि प्रशासन से संबंधित प्रत्येक फाइल के पीछे मानवीय पहलू छिपे होते हैं। उन्होंने कहाकि प्रत्येक फाइल अनगिनत नागरिकों की आकांक्षाओं, चिंताओं और उनके जीवन का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने नागरिक देवो भव के मंत्र पर बल देते हुए अधिकारियों से हर निर्णय के केंद्र में नागरिकों को रखने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान कियाकि शासन सहानुभूतिपूर्ण, उत्तरदायी और समावेशी बना रहे। प्रधानमंत्री ने सभी विभागों के समग्र रूपसे मिलकर काम करने के दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान करते हुए इसबात पर बल दियाकि विकास से संबंधित प्रमुख चुनौतियों का समाधान अलग-थलग रहकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहाकि सार्थक और स्थायी परिणाम प्राप्त करने केलिए विभागों केबीच प्रभावशाली समन्वय आवश्यक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहाकि विकसित भारत का निर्माण करना आनेवाले दशक में हर नीति और प्रशासनिक निर्णय का उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहाकि आज भारत की प्राथमिकताओं में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्रमें वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं केलिए अवसरों का सृजन शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में शासन व्यवस्था में आए परिवर्तनों पर कहाकि प्रशासन प्रक्रिया केंद्रित मॉडल से परिणामउन्मुख दृष्टिकोण की ओर अग्रसर हुआ है। उन्होंने सेवा वितरण में सुधार लाने और नागरिकों को सुगमता और पारदर्शिता केसाथ सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने में डिजिटल शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने आंकड़ों पर आधारित शासन के महत्व पर कहाकि आंकड़ों को केवल संख्या के रूपमें नहीं, बल्कि लाखों लोगों के सामूहिक जीवन, चुनौतियों और आकांक्षाओं के प्रतिबिंब के रूपमें देखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहाकि नीतियां जमीनी स्तरपर प्रभावी परिणाम दे रही हैं या नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया और बतायाकि वर्तमान बैच में 40 प्रतिशत से अधिक महिला अधिकारी हैं। प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान का निरंतर मूल्यांकन करने और पदों से नहीं, बल्कि कामकाज से मिले ठोस परिणामों से संतुष्टि प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त कियाकि उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और समर्पण भारत के विकास पथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, मंत्रिमंडल सचिव टीवी सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह, एलबीएसएनएए के निदेशक श्रीराम तरणिकांति और वरिष्ठ अधिकारी भी इस संवाद के दौरान उपस्थित थे।

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