स्वतंत्र आवाज़
word map

'इग्नू समावेशी एवं सुलभ उच्च शिक्षा का स्तंभ'

उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में इग्नू के अनुकरणीय योगदान को सराहा

इग्नू के दीक्षांत समारोह में स्नातकों को दिए डिग्री डिप्लोमा प्रमाण पत्र

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 7 April 2026 05:34:41 PM

vice president lauds ignou for its exemplary contribution to higher education

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली के 39वें दीक्षांत समारोह में ऑफलाइन और ऑनलाइन 32 लाख से अधिक स्नातकों को डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान किए। उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में इग्नू के अनुकरणीय योगदान को सराहते हुए इसे देश की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का स्तंभ बताया, जिसने देशभर में उच्चशिक्षा को सबके लिए महत्वपूर्ण रूपसे सुलभ बनाया है। उन्होंने इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए कहाकि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि इस विश्वविद्यालय के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, जो शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने केलिए प्रोत्साहित किया। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि इग्नू अपने दूरस्थ शिक्षा मॉडल के कारण सुदृढ़ बना हुआ है। उन्होंने कहाकि इसने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करके स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है और यह प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा में अग्रणी बनकर उभरा है। उपराष्ट्रपति ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए कहाकि इग्नू ने कई निकास विकल्पों यानी स्नातक कार्यक्रम के दौरान बीचमें प्रमाणपत्र केसाथ पाठ्यक्रम छोड़ने केसाथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र केंद्रित हो गई है।
उपराष्ट्रपति ने आधुनिक शिक्षा केसाथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण की भी सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहाकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उपकरण सीखने के अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को बेहतर सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सक्षम कर सकते हैं। उन्होंने कहाकि आधुनिक विकास से डरने की कोई जरूरत नहीं है, जब देशमें कंप्यूटर आए थे, तब आशंकाएं थींकि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे, हालांकि कंप्यूटर आने से अधिक रोज़गार सृजित हुए और राष्ट्रीय विकास में योगदान बढ़ा। उपराष्ट्रपति ने कहाकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों कोभी इसी तरहसे अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसी तकनीकों के जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग की जरूरत पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने कहाकि भारत की सबसे बड़ी ताकत नैतिक मूल्यों में उसका विश्वास है, आधुनिक विकास हमारी परंपराओं केसाथ हो और वैज्ञानिक प्रगति नैतिक मूल्यों से निर्देशित हो।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहाकि व्यक्तिगत प्रयास जब संयुक्त रूपसे किए जाएंगे तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत निर्माण में इससे काफी मदद मिलेगी। उपराष्ट्रपति ने देशभर के छात्रों की सुगमता केलिए राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार केतहत डिजिलॉकर पर प्रमाणपत्र जारी किए। उन्होंने इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने देशभर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का भी शुभारंभ किया। इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, इग्नू की कुलपति प्रोफेसर उमा कांजीलाल और त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा अपने-अपने राज्य के क्षेत्रीय इग्नू केंद्र से ऑनलाइन उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]