कोबा तीर्थ आध्यात्मिक शांति से परिपूर्ण दिव्य स्थान-प्रधानमंत्री
'असंख्य जैन मुनियों और संतों की तपस्या की अध्यात्म अभिव्यक्ति'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 31 March 2026 04:26:49 PM
गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान महावीर जयंती पर कोबा तीर्थ गांधीनगर में सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया और देशवासियों को भगवान महावीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि कोबा तीर्थ आध्यात्मिक शांति से परिपूर्ण है, एक ऐसा स्थान जहां असंख्य जैन मुनियों और संतों की तपस्या को अभिव्यक्ति मिलती है, जहां सृजन और सेवा स्वाभाविक रूपसे फलती-फूलती है। कोबा तीर्थ की चिरस्थायी परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि वर्षों से इस पवित्र स्थल पर अध्ययन, साधना और आत्म अनुशासन की परंपराएं फल-फूल रही हैं। उन्होंने कहाकि मूल्यों का संरक्षण, संस्कारों का पोषण और ज्ञान का संवर्धन ही त्रिवेणी का निर्माण करते हैं, जो भारतीय सभ्यता की नींव है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि इस त्रिवेणी को निर्बाध रूपसे प्रवाहित रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त कीकि जैन धर्म का शाश्वत ज्ञान और भारत की समृद्ध विरासत अब जैन विरासत संग्रहालय के माध्यम से सदियों तक संरक्षित की जा रही है। उन्होंने कहाकि संतों ने इस संग्रहालय की जो कल्पना प्राचीन ज्ञान को नई और आधुनिक शैली में अगली पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से की थी, आज वह सम्राट संप्रति संग्रहालय के रूपमें साकार हुई है, जो जैन दर्शन, भारतीय संस्कृति और हमारी प्राचीन विरासत का एक पवित्र केंद्र है। प्रधानमंत्री ने इस कार्य में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सभी जैन मुनियों, संतों और समर्पित व्यक्तियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने विरासत संरक्षण में नवाचार के महत्व को रेखांकित कियाकि जब प्राचीन ज्ञान नए तरीकों से प्रस्तुत किया जाता है तो विरासत समृद्ध होती है और आनेवाली पीढ़ियों को नई प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहाकि सम्राट संप्रति संग्रहालय भारत के करोड़ों लोगों का है और हमारे गौरवशाली अतीत का प्रमाण है।
सम्राट संप्रति के ऐतिहासिक महत्व पर प्रधानमंत्री ने कहाकि जहां अनेक सभ्यताओं ने महान विचारकों और दार्शनिकों को जन्म दिया, वहीं विश्व के कई हिस्सों में शासकों ने सत्ता के प्रश्न का सामना करते हुए आदर्शों का त्याग कर दिया, जिससे विचार और शासन केबीच एक खाई पैदा हो गई। उन्होंने कहाकि सम्राट संप्रति मात्र एक ऐतिहासिक राजा नहीं थे, बल्कि भारत के दर्शन और व्यवहार को जोड़ने वाले सेतु थे। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत में सम्राट संप्रति जैसे शासकों ने सत्ता को सेवा और साधना के रूपमें माना, सिंहासन से अहिंसा का विस्तार किया और पूर्ण वैराग्य और नि:स्वार्थ सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह का प्रचार किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि संग्रहालय सुविचारित ढंग से डिजाइन किया गया है, जिसमें भारत की भव्यता झलकती है, इसकी सात दीर्घाएं राष्ट्र की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का बखान करती हैं। उन्होंने नवपद, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु और सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और सम्यक तप के चार सिद्धांतों को प्रदर्शित करने वाली पहली दीर्घा और तीर्थंकरों की कथाओं और शिक्षाओं को कलात्मक रूपसे प्रस्तुत करने वाली तीसरी दीर्घा का विशेष रूपसे उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि जब ज्ञान सम्यक यानी धार्मिक होता है तो वह समभाव और सेवा का आधार बनता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह संग्रहालय जैन धर्म केसाथ-साथ भारत की अन्य धार्मिक परंपराओं जैसे-वैदिक, बौद्ध और अन्य परंपराओं का भी शानदार प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने भारत की सबसे बड़ी ताकत यानी विविधता और विविधता में एकता को उजागर किया। उन्होंने कहाकि जहां दुनिया ने धर्म और संप्रदाय के नाम पर संघर्ष देखे हैं, वहीं यह संग्रहालय सभी परंपराओं को एक इंद्रधनुष की तरह एकसाथ प्रस्तुत करता है, जहां वेद, पुराण, आयुर्वेद, योग और दर्शन सद्भावपूर्वक एकसाथ मौजूद हैं। उन्होंने कहाकि ऐसा केवल भारत में ही संभव है। मौजूदा वैश्विक अस्थिरता और अशांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि इस संग्रहालय में निहित विरासत और संदेश न केवल भारत केलिए बल्कि पूरी मानवता केलिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि दुनियाभर से आनेवाले जिज्ञासु आगंतुकों, छात्रों और शोधकर्ताओं की संख्या में निरंतर वृद्धि होगी। नरेंद्र मोदी ने आग्रह कियाकि यहां आनेवाले सभी लोग भारत और जैन धर्म की शिक्षाओं को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाएं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलायाकि कैसे भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय जैसे तक्षशिला और नालंदा कभी लाखों पांडुलिपियों से भरे हुए थे, जिन्हें धार्मिक संकीर्णता से प्रेरित विदेशी आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था। उन्होंने कहाकि उन कठिन समय में आम लोगों ने पीढ़ी दर पीढ़ी शेष पांडुलिपियों को संरक्षित रखा और आचार्य भगवंत श्रीपद्मसागर सूरीश्वर महाराज के असाधारण समर्पण की सराहना की, जिन्होंने साठ वर्ष देश के कोने-कोने में पांडुलिपियों की खोज में गांव-गांव और शहर-शहर की यात्रा की। नरेंद्र मोदी ने कहाकि ताड़ के पत्तों और बर्च की छाल पर खुदी हुई तीन लाख से अधिक पांडुलिपियां, जिनमें से कुछ सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं, आज कोबा में सुरक्षित रूपसे संकलित हैं, जो भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य केलिए एक महत्वपूर्ण सेवा का प्रतिनिधित्व करती हैं। पांडुलिपि संरक्षण केप्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर बतलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि पूर्व सरकारों की उपेक्षा को दूर करने केलिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया गया है। मिशन केतहत प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, वैज्ञानिक संरक्षण, स्कैनिंग, रासायनिक उपचार और डिजिटल संग्रह केलिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
नरेंद्र मोदी ने हालिया 'मन की बात' कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के बारेमें बताया था, जिसके तहत नागरिक अपने पास संरक्षित पांडुलिपियों को अपलोड कर सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहाकि यह अभियान देश के कोने-कोने में बिखरी पांडुलिपियों को एकत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नरेंद्र मोदी ने सरकारी स्तरपर ज्ञान भारतम मिशन के संयुक्त प्रयासों और कोबा तीर्थ के असाधारण योगदान को भारत के नए सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहाकि आज देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, समझने और प्रदर्शित करने के प्रयास हर स्तरपर जारी हैं, जिनमें प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार, तीर्थ स्थलों का विकास और आयुर्वेद एवं योग का प्रचार प्रसार शामिल है। लोथल में भव्य समुद्री संग्रहालय, वडनगर संग्रहालय और दिल्ली में बन रहे युग-युगीन भारत संग्रहालय जैसी चल रही महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहाकि पहलीबार भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सच्चे इतिहास को राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त करके सामने लाने केलिए सार्थक और व्यापक कार्य किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमने विरासत को राजनीतिक नजरिए से देखने की मानसिकता को समाप्त कर दिया है और 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र केसाथ आगे बढ़ रहे हैं, जो विकसित भारत की परिकल्पना का सार है। प्रधानमंत्री ने भारत की धरोहर को संरक्षित करने में संतों के अथक प्रयासों की सराहना की और दिल्ली में ऐतिहासिक नवकार महामंत्र दिवस कार्यक्रम को याद किया, जहां जैन धर्म के चारों संप्रदाय एकसाथ आए थे। भविष्य पर भरोसा जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत की एकता और सांस्कृतिक शक्ति राष्ट्र के व्यापक लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रेरक शक्ति होगी। उन्होंने कहाकि जब लोग व्यक्तिगत आकांक्षाओं से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लक्ष्यों केलिए काम करते हैं तो विकास की गति तेज हो जाती है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि मुझे विश्वास हैकि सम्राट संप्रति संग्रहालय ज्ञान, साधना और संस्कृति के केंद्र के रूपमें उभरेगा, जो आनेवाले समय में नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा और समाज को ऊर्जावान बनाएगा। इस अवसर पर आचार्य भगवंत पद्मसागर सुरीश्वर महाराज, गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, आचार्य भगवंत, साधुभगवंत, साध्वी भगवंत, आचार्य, मुनिभगवंत, दानवीर, विद्वतजन और उपस्थित थे।