पूर्वोत्तर के युवा भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व करें-ज्योतिरादित्य
'विकसित भारत की ओर भारत की सामूहिक यात्रा की सशक्त अभिव्यक्ति'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Sunday 29 March 2026 01:06:59 PM
नई दिल्ली। संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव-2026 की सराहना करते हुए इसे एक गतिशील मंच बताया, जो पूर्वोत्तर भारत की क्षमता, ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने पूर्वोत्तर सांस्कृतिक महोत्सव को केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि पहचान, आकांक्षा और विकसित भारत की ओर देश की सामूहिक यात्रा की सशक्त अभिव्यक्ति बताया, जिसे भारत की 'अष्टलक्ष्मी' के रूपमें जाना जाता है। उन्होंने कहाकि दो वर्ष में डीओएनईआर मंत्री के रूपमें उनके कार्यकाल ने पूर्वोत्तर क्षेत्रकी अपार क्षमताओं के बारेमें उनकी समझ को न केवल देश, बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया एवं वैश्विक परिदृश्य केलिए एक रणनीतिक सेतु के रूपमें भी और व्यापक किया है। हिंदू कॉलेज में पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव का यह 15वां संस्करण था। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कार्यक्रम के आयोजकों और छात्रों को निमंत्रण केलिए धन्यवाद दिया।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने पूर्वोत्तर की असाधारण मानव पूंजी और साक्षरता दर को उल्लेखनीय कहा, जो औसतन लगभग 93 प्रतिशत है। उन्होंने कहाकि उत्तर पूर्वी क्षेत्र के खासतौर पर युवाओं को सभी क्षेत्रोंमें भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने पूर्वोत्तर से अपने गहरे व्यक्तिगत जुड़ाव को याद करते हुए इस क्षेत्र से अपने पारिवारिक संबंधों और आठों राज्यों की अपनी लगातार यात्राओं के बारेमें बताया, जो इसके विकास केलिए उनके दृष्टिकोण को प्रेरित और ऊर्जावान बनाए रखती हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक गहराई पर प्रकाश डाला और असम व दूसरे राज्यों के प्रदर्शनों को मंत्रमुग्ध बताया, जहां हर हावभाव और गतिविधि में पीढ़ियों की परंपरा और अर्थ समाहित है। उन्होंने असम के संगीतज्ञ भूपेन हजारिका और जुबीन गर्ग जैसे सांस्कृतिक दिग्गजों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहाकि पूर्वोत्तर अद्वितीय कलात्मक और सांस्कृतिक संपदा का भंडार है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत और वैश्विक दक्षिण केबीच एक प्राकृतिक सेतु बताया, जो वैश्विक स्तरपर आर्थिक और सांस्कृतिक आदान प्रदान को बढ़ावा देने में सक्षम हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर के युवाओं को सशक्त बनाने केलिए सरकार के केंद्रित प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर केप्रति दृष्टिकोण के इरादे से यह सुनिश्चित हो रहा हैकि अवसरों को पहुंच और समावेशन से परिभाषित किया जाए। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर के भविष्य को आकार देने में युवाओं की बड़ी भूमिका की सराहना करते हुए कहाकि चर्चा इस क्षेत्रकी वर्तमान स्थिति से हटकर इस बातपर केंद्रित होनी चाहिएकि यह क्या बन रहा है और यहां के युवा इसे क्या बनाने में सक्षम हैं। उन्होंने एनई स्पार्क्स कार्यक्रम, अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम और एनईआर पोर्टल के बारेमें बात की। इसरो के सहयोग से कार्यांवित एनई स्पार्क्स कार्यक्रम प्रतिवर्ष 800 छात्रों यानी प्रत्येक पूर्वोत्तर राज्य से 100 छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से परिचित होने का अवसर प्रदान करता है, इसके आठ बैच पहले ही पूरे हो चुके हैं।
पूर्वोत्तर और देश के दूसरे हिस्सों के छात्रों केबीच संवाद को बढ़ावा देने वाली एक सुनियोजित सांस्कृतिक आदान-प्रदान पहल है अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम। इसके तहत 32 बैचों में कुल 1280 छात्र शामिल हैं और 2030 तक इसका विस्तार करके 8000 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। अप्रैल 2026 में शुरू होने वाला पूर्वोत्तर क्षेत्र पोर्टल राष्ट्रीय कैरियर सेवा केसाथ एकीकृत होकर पूर्वोत्तर क्षेत्रमें 1000 से अधिक रोज़गार के अवसर, 300 से अधिक कैरियर मार्ग, 200 से अधिक प्रवेश परीक्षाएं, 3,000 से अधिक पाठ्यक्रम और 800 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंच प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य कौशल और रोज़गार के अवसरों केबीच की खाई को कम करना है। पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ के सांस्कृतिक उत्सव में छात्रों, कलाकारों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक जीवंतता और आकांक्षाओं का जश्न मनाया।