उपराष्ट्रपति ने किया निडर और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता का कीर्तिगान
रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता केलिए पुरस्कार प्रदान किएस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 28 March 2026 11:50:23 AM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा हैकि द इंडियन एक्सप्रेस समूह के रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार केवल पेशेवर उपलब्धियों केलिए ही नहीं हैं, बल्कि निडर और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता की स्थायी भावना का भी कीर्तिगान करते हैं, ये रामनाथ गोयनका की विरासत को सम्मानित करते हैं, जिनमें विशेषकर भारत के इतिहास के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में साहस, स्वतंत्रता और सत्य केप्रति अडिग प्रतिबद्धता से परिभाषित होती है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि ऐसे समय में जब मीडिया शक्तिशाली भी है और गहन जांच के दायरे में भी है, रामनाथ गोयनका के आदर्श आजभी मार्गदर्शक बने हुए हैं।
रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार की स्थापना को 20 वर्ष हो चुके हैं और उपराष्ट्रपति इन पुरस्कारों के वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान रामनाथ गोयनका की भूमिका को रेखांकित किया, जब उन्होंने ब्रिटिश सेंसरशिप के विरोध में द इंडियन एक्सप्रेस समाचारपत्र को बंद करने का निर्णय लिया था। उपराष्ट्रपति ने संविधान सभा के सदस्य के रूपमें रामनाथ गोयनका के योगदान को भी याद किया, जिसमें समाचार पत्रों पर कराधान जैसे मुद्दों पर उनके हस्तक्षेप शामिल थे। भारत में आपातकाल का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि रामनाथ गोयनका ने खाली संपादकीय प्रकाशित करके मौन की शक्ति का प्रदर्शन किया, जो प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार का सशक्त प्रतीक बना।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि संपादकों की गिरफ्तारी, बिजली आपूर्ति में बाधा, आर्थिक नुकसान और उत्पीड़न जैसी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद रामनाथ गोयनका लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केप्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहे। उपराष्ट्रपति ने कहाकि रामनाथ गोयनका के जीवन की यात्रा दरभंगा से चेन्नई तक और बादमें विदिशा से सांसद के रूपमें भारत की विविधता में एकता की भावना को दर्शाती है। उन्होंने इस बात काभी उल्लेख कियाकि रामनाथ गोयनका ने व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने केलिए द इंडियन एक्सप्रेस समूह के अंग्रेज़ी केसाथ और भी कई क्षेत्रीय भाषाओं में समाचारपत्र प्रकाशित किए, जो आजभी द इंडियन एक्सप्रेस को निष्पक्षता, साहस और स्वतंत्रता को परिभाषित करते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहाकि चर्चा, बहस और यहां तककि असहमति का परिणाम भी अंतत: राष्ट्रहित में निर्णय लेना होना चाहिए, न कि व्यवधान उत्पन्न करना।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने के प्रधानमंत्री के आह्वान को भी याद किया और कहाकि वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाक्रमों को देश के सभ्यतागत मूल्यों से जुड़े भारतीय नज़रिए से दिखाने में द इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उपराष्ट्रपति ने प्रगति, नवाचार और जमीनी स्तरपर हो रहे परिवर्तन की कहानियों को प्रमुखता से उजागर करने के महत्व पर जोर देते हुए कहाकि संतुलित दृष्टिकोण में चुनौतियों केसाथ-साथ उपलब्धियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और पत्रकारिता में उत्कृष्टता को सम्मानित करने की परंपरा को बनाए रखने केलिए आयोजकों की सराहना की।