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'युवा संसद नेतृत्व व राष्ट्र निर्माण का प्रशिक्षण मंच'

उपराष्ट्रपति ने नागपुर में भारतीय युवा संसद सत्र में व्यक्त किए उद्गार

युवा संसद का विषय था-'भारतीय भाषाएं और विकसित भारत 2047'

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Saturday 21 March 2026 04:36:49 PM

vice president at the indian youth parliament in nagpur

नागपुर। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज महर्षि व्यास सभागृह नागपुर में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय युवा संसद राष्ट्रीय न्यास के दो दशक से अधिक समय से कार्यों की सराहना करते हुए कहाकि संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है, इस प्रकार संगठन ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहाकि युवा संसद जैसे मंच सम्मानजनक बहस, विभिन्न दृष्टिकोणों को सुनने, चर्चा और आम सहमति से समाधान तक पहुंचने के महत्व को सिखाते हैं। उपराष्ट्रपति ने युवा संसद को नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का प्रशिक्षण मैदान बताया। उन्होंने छात्रों से ऐसे मंचों का उपयोग नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा की भावना विकसित करने केलिए कहा। युवा संसद के सत्र का विषय था-‘भारतीय भाषाएं और विकसित भारत 2047’।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि विश्व भारत की ओर देख रहा है और आजके युवा अमृत पीढ़ी हैं, जो 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूपमें उभरते हुए देखेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि युवा संसद इस राष्ट्रीय लक्ष्य में सार्थक योगदान देगी। उपराष्ट्रपति ने नागपुर के महत्व का उल्लेख करते हुए कहाकि यह शहर राष्ट्रीय चेतना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मभूमि है, जिसकी स्थापना डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में की थी। उन्होंने कहाकि एक छोटी पहल से राष्ट्रीय सेवा केलिए समर्पित एक विशाल आंदोलन तक संगठन की यात्रा ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना और राष्ट्र केप्रति समर्पण को दर्शाती है। उपराष्ट्रपति ने भारत की भाषाई विविधता को एक महान शक्ति बताया और कहाकि जब हम अपनी मातृभाषा में बोलते हैं तो हम क्षेत्रीय नहीं, बल्कि मौलिक होते हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि प्रत्येक भाषा अपनी विरासत समेटे रहती है और ये सभी मिलकर राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का निर्माण करती हैं। उन्होंने भारत के संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के हालिया प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहाकि भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और संरक्षित करना राष्ट्रीय विकास केलिए आवश्यक है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दूसरों के विचारों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है और भारत को अपनी मूल से नवाचार करना होगा, अपनी मूल भाषाओं लिपियों में सोचना होगा और अपनी सभ्यतागत पहचान पर विश्वास केसाथ आगे बढ़ना होगा। सीपी राधाकृष्णन ने संस्कृत और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की भूमिका की प्रशंसा की और कहाकि संस्कृत अनेक भारतीय भाषाओं को जोड़ती है और भारत की ज्ञान परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है।
लोकतांत्रिक समाज में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के अध्यक्ष के रूपमें अपने अनुभव और सत्रों में चर्चा की अवधि में बढ़ोतरी पर विचार करते हुए कहाकि मतभेद अंततः रचनात्मक संवाद और समाधान की ओर ले जाने चाहिएं, न कि संघर्ष की ओर। उपराष्ट्रपति ने इससे पहले दिन में नागपुर के डॉ हेडगेवार स्मृति भवन में आरएसएस के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ कृष्ण गोपाल, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी, भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष जोशी और देशभर से बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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