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धर्म परिवर्तन के विरुद्ध देशवासी एकजुट हों-शाह

सिख संतों व गुरूओं ने मुगलों की कई पीढ़ियों से हिंदू धर्म को बचाया

मुंबई में श्रीगुरु तेगबहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर संगत में संवाद

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 2 March 2026 12:22:54 PM

home minister amit shah

मुंबई। गृहमंत्री अमित शाह ने श्रीगुरु तेगबहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस पर नवी मुंबई में हुए समागम समारोह में श्रीगुरु साहिब को नमनकर संगत से संवाद किया। अमित शाह ने कहाकि सिख पंथ के दसों गुरुओं ने एक ऐसी परंपरा बनाई है, जो न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया केलिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहाकि दसों गुरुओं के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म परिवर्तन के विरुद्ध देशवासियों को एकजुट होना चाहिए। गृहमंत्री ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्तरपर श्रीगुरु तेगबहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस को मनाने का निर्णय लिया, जो भारतवासियों केलिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने यह भी कहाकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पूरे महाराष्ट्र में श्रीगुरु तेगबहादुर की जीवनी को युवाओं तक पहुंचाने केलिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए है।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि अगर नौवें श्रीगुरु तेगबहादुर हिंदू धर्म और हिंदुओं को बचाने केलिए शहादत न देते तो विश्व में एकभी हिंदू नहीं बचता। उन्होंने कहाकि पूरे भारत और विश्वभर में सनातन धर्म के अनुयायी श्रीगुरु तेगबहादुर केप्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैंकि उन्होंने हिंदू धर्म बचाने केलिए यातनाएं झेलते हुए अपनी शहादत दे दी। अमित शाह ने कहाकि सिख परंपरा का मूल एकता, बंधुत्व, समावेश और वीरता रहा है और श्रीगुरु ग्रंथसाहिब में इसी तत्व का समावेश किया गया है। उन्होंने कहाकि संत नामदेव, नरसी मेहता, संत कबीर, संत रविदास जैसे कई नामी संतों के पदों को श्रीगुरु ग्रंथ साहिब में जगह देने का काम दशम पिता ने किया है। उन्होंने कहाकि महाराष्ट्र सरकार ने कई समाज को श्रीगुरु तेगबहादुर केसाथ जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है। गृहमंत्री ने कहाकि श्रीगुरु नानकदेव ने मानवता के 3 सरल व गहरे सिद्धांत दिए हैंकि नाम जपो, कीरत करो और वंड छको, इसका अर्थ है-ईश्वर के नाम का जाप करते रहिए, उनका कीर्तन करें और साथमें भोजन कीजिए। उन्होंने कहाकि यह आपसी साझेदारी को बताता है, यही परंपरा आगे जाकर लंगर और साझा चूल्हा में परिवर्तित हुई और मुगलों के सामने लड़ने की बहुत बड़ी ताकत मिली।
अमित शाह ने कहाकि भारत की हज़ारों साल पुरानी परंपरा को श्रीगुरु नानकदेव महाराज ने एक नया जीवन देने का काम किया और श्रीगुरु तेगबहादुर भी इसी परंपरा के अनुयायी रहे। उन्होंने कहाकि धर्म केलिए अपने पूरे परिवार का बलिदान देनेवाले ‘सरबंसदानी’ गुरु गोबिंद सिंह जैसा पराक्रमी इतिहास में दूसरा कोई नहीं है। अमित शाह ने कहाकि श्रीगुरु तेगबहादुर ने हिंदू धर्म और इसके अनुयायियों की रक्षा केलिए एक पल की भी देरी नहीं की और श्रीगुरु तेगबहादुर ने जो कहा वो कर दिखाया। उन्होंने कहाकि जब कश्मीरी पंडितों पर मुश्किलें आईं तब सारे कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधि एकत्रित होकर श्रीगुरु साहब के सामने आए और संरक्षण मांगा, तबसे पूरी दुनिया में रहने वाले कश्मीरी पंडित श्रीगुरु साहब केसाथ जुड़े हुए हैं। गृहमंत्री ने कहाकि श्रीगुरु तेगबहादुर ने हिंदुओं और भारत पर जो उपकार किए हैं, उसे कोई नहीं भुला सकता। उन्होंने कहाकि औरंगजेब के शासन के दौरान 1675 में एक ऐसा बलिदान देखा, जिसने देश की जनता की हिम्मत तो बढ़ाई ही औरंगजेब के अत्याचार करने की ताकत को तोड़ने का काम भी किया। उन्होंने कहाकि महाराष्ट्र और पंजाब में बहुत गहरा रिश्ता है और इसी भूमि को दशम पिता ने अपनी देहत्याग केलिए चुना।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि सिख गुरुओं की वाणी के संत नामदेवजी की भक्ति परंपरा आजभी श्रीगुरु ग्रंथ साहिब में उपस्थित है। अमित शाह ने कहाकि श्रीगुरु गोविंद सिंह महाराज ने खालसा पंथ की स्थापना की, उन्होंने एक हाथ में माला औऱ दूसरे हाथ में भाला लेकर औरंजगजेब के अत्याचारों के खिलाफ सिखों को संगठित कर एक बहुत बड़ी लड़ाई की शुरूआत की। गृहमंत्री ने कहाकि नानकदेव महाराज से लेकर गुरु गोविंद सिंह तक सिख संत-गुरूओं ने मुगलों की कई पीढ़ियों से हिंदू धर्म को बचाने केलिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रकार से समाज को ताकत देने का अनुकरणीय कार्य किया है। उन्होंने कहाकि श्रीगुरु नानकदेव महाराज ने ज्ञान का प्रचार प्रसार किया और कई कुरीतियों को समाप्त किया, शिक्षा का प्रचार प्रसार किया। गुरु अमरदास ने सामाजिक समरसता का प्रचार प्रसार किया, अनेक संस्थान स्थापितकर एक आधार दिया। गुरु अर्जनदेव ने सांस्कृतिक समावेशिता केलिए कार्य किया। गुरु हरगोविंद साहिब ने भक्ति और धर्म की रक्षा का दर्शन दिया। गुरु हरराय ने दया का भाव विश्व में प्रचारित किया। श्रीगुरु तेगबहादुर साहिब के शहीदी दिवस समागम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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