वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कूनो में बने संगरोध बाड़ों में छोड़ा
प्रोजेक्ट चीता की मजबूत वैश्विक साझेदारियों में निरंतर प्रगतिस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 28 February 2026 04:36:39 PM
भोपाल। केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज बोत्सवाना से आए नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बने संगरोध बाड़ों में छोड़ा। भूपेंद्र यादव ने एक्स पोस्ट में बोत्सवाना से नौ चीतों (6 मादा और 3 नर) के मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आगमन की जानकारी साझा की। उन्होंने कहाकि कुनो में गुर्राहट और बढ़ गई है, नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को आठ चीते पहलीबार भारत लाए गए थे और फरवरी 2023 में साउथ अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण केप्रति जागरुक नेतृत्व में चीता परियोजना को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहाकि भारत में अब 39 चीतों की अच्छी-खासी आबादी है, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं। उन्होंने कहाकि प्रोजेक्ट चीता को मजबूत वैश्विक साझेदारियों और ठोस वैज्ञानिक निगरानी केसाथ निरंतर प्रगति प्राप्त हो रही है, बोत्सवाना के चीतों का आगमन भारत के इस संकल्प को और मजबूत करता हैकि वह एक स्थायी, स्वतंत्र रूपसे विचरण करने वाली चीता आबादी का निर्माण करे और वैश्विक संरक्षण प्रयासों में सार्थक योगदान दे।
वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बतायाकि दिसंबर 2024 में भारत सरकार ने चीतों की खरीद केलिए बोत्सवाना गणराज्य की सरकार केसाथ औपचारिक बातचीत शुरू की थी, ताकि भारत के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट चीता' को और मजबूत किया जा सके। यह प्रस्ताव बोत्सवाना के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री बोइपुसो विंटर ममोलोत्सी के परामर्श से भूपेंद्र यादव ने प्रस्तुत किया था। वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बतायाकि भारत की चीता पुनर्प्रवेश योजना को ध्यान में रखते हुए बोत्सवाना ने भारत केसाथ साझेदारी करने पर सहमति जताई। उन्होंने कहाकि यह सहयोग वैश्विक चीता संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और अफ्रीका में इसके पारंपरिक क्षेत्रसे बाहर इस प्रजाति की एक अतिरिक्त सुरक्षित आबादी बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे इसकी दीर्घकालिक सहनशीलता में वृद्धि होगी।
भूपेंद्र यादव ने बतायाकि इस साझेदारी को क्रियांवित करने केलिए एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सितंबर 2025 में बोत्सवाना का दौरा किया था। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव स्थानांतरण मानकों के अनुरूप परिचालन तौरतरीकों, परिवहन व्यवस्था और नियामक स्वीकृतियों का प्रारूप तैयार करना था। भूपेंद्र यादव ने बतायाकि उचित वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद बोत्सवाना के ग़ांज़ी क्षेत्र से आठ चीतों की पहचान करते हुए उन्हें पकड़ा गया, बादमें पशु चिकित्सा की निरंतर निगरानी में चीतों को लगभग 700 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से गैबोरोन ले जाया गया। भूपेंद्र यादव ने बतायाकि नवंबर 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की बोत्सवाना यात्रा के दौरान आठ चीतों को औपचारिक रूपसे भारत सरकार को सौंप दिया गया, उन्हें मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य में संगरोध बाड़ों में छोड़ दिया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2025 में संगरोध व्यवस्था की समीक्षा करने, बाड़ों की स्थिति का आकलन करने और अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण की तैयारियों को सुनिश्चित करने केलिए बोत्सवाना का दौरा किया था।
बोत्सवाना प्रतिनिधिमंडल ने दिसंबर 2025 में अंतिम रसद संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने और मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जारी चीता संरक्षण प्रयासों का अवलोकन करने केलिए भारत का दौरा किया था। चीतों को मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य से 27 फरवरी 2026 को गैबोरोन हवाई अड्डे तक ले जाया गया। भारतीय वायुसेना के सहयोग से चीतों को नियंत्रित और निगरानी वाले वातावरण में भारत के ग्वालियर ले जाया गया, ताकि यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित हो सके। भारत पहुंचने पर चीतों को हेलीकॉप्टर से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित कर दिया गया है। एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में भूपेंद्र यादव ने भारतीय वायुसेना की निर्बाध समन्वय, सटीक उड़ान और अटूट प्रतिबद्धता केलिए सराहना की, जिसने इन चीतों की भारत तक सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की। बोत्सवाना से आए चीतों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने से पहले अनुकूलन और स्वास्थ्य निगरानी के चरण से गुजरना होगा।