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संसदीय समूह करेंगे दुनिया से मैत्री संवाद!

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गठित किए संसदीय मैत्री समूह

मैत्री संवाद समूहों में सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता शामिल

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 23 February 2026 06:03:55 PM

om birla (file photo)

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दुनिया के देशों केसाथ भारत के संसदीय संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने के उद्देश्य से 60 से अधिक देशों केसाथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। ये कदम यह संकेत हैकि भारत की संसद विश्व की विभिन्न संसदों केसाथ प्रत्यक्ष और नियमित मैत्री संवाद बढ़ा रही है, ताकि पारंपरिक राजनय केसाथ-साथ संसदीय स्तरपर भी मजबूत संबंध बने रहें। मैत्री संवाद समूह सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे बात करने का अवसर मिलेंगे, अपने अनुभव साझा करेंगे, एकदूसरे से सीख सकेंगे और नियमित संपर्क के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाएंगे, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी और आपसी समझ बेहतर होगी। मैत्री समूहों में प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं। पहले चरण में जहां 60 देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन किया गया है, वहीं निकट भविष्य में कई अन्य देशों केसाथ इन समूहों के गठन के प्रयास किए जा रहे हैं।
मैत्री संवाद समूहों के नेताओं में रविशंकर प्रसाद, डॉ एम थंबीदुरई, पी चिदंबरम, प्रोफेसर रामगोपाल यादव, टीआर बालू, डॉ काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, डॉ शशि थरूर, डॉ निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डॉ डी पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लव कुमार देब, डॉ सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, डॉ सस्मित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, पीवी मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल सहित कई नेता शामिल हैं। जिन देशों से ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों, संस्कृति और आज की वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा इस बात पर जोर दिया हैकि संसदीय राजनय भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाता है। ओम बिरला के नेतृत्व में संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी की है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है, जो संवाद और सहयोग में विश्वास रखता है। संसद से संसद और जनता से जनता के बीच संपर्क बढ़ाती यह पहल विदेश संबंधों में एक व्यापक और भागीदारी आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है। ये मैत्री समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे। विश्वास किया जाता हैकि इस तरह भारत की संसद एक सेतु और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज़ के रूपमें अपनी भूमिका और मजबूत करेगी।
उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर केबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने केलिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे। अलग-अलग दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एकसाथ लाकर यह संदेश दिया गयाकि देश की सुरक्षा और हितों के मामले में भारत एकजुट है। इस पहल से संवाद, समावेश और सामूहिक जिम्मेदारी में विश्वास को दर्शाया गया, जो भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर भारत एक है। लोकसभा का 60 से अधिकदेशों केसाथ मैत्री संवाद समूह गठित करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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