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श्रीनारायण गुरु का जीवन सीख और विरासत-थरूर

उपराष्ट्रपति ने की श्रीनारायण गुरु पर डॉ शशि थरूर की पुस्तक विमोचित

'मानव जाति केलिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर' का एक अमर संदेश

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 20 February 2026 12:00:20 PM

vice president releases shashi tharoor's book on sree narayana guru

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सांसद और लेखक डॉ शशि थरूर की पुस्तक ‘द सेज हू रीइमैजिंड हिंदूइज्म: द लाइफ, लेसंस एंड लेगेसी ऑफ श्रीनारायण गुरु’ का कल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली में विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहाकि श्रीनारायण गुरु ऐसे वक्त में आध्यात्मिक गुरु के रूपमें उभरे जब समाज में जातिगत विभाजन और सामाजिक भेदभाव गहराई से जड़े जमा चुके थे। उन्होंने कहाकि उनका अमर संदेश ‘मानव जाति केलिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ न केवल एक आध्यात्मिक उद्घोषणा थी, बल्कि समानता, गरिमा और सार्वभौमिक बंधुत्व केलिए एक क्रांतिकारी आह्वान भी था।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि श्रीनारायण गुरु ने समावेशी मंदिर की स्थापना और शिक्षा को बढ़ावा देने जैसी पहलों के ज़रिए ज्ञान और करुणा से अन्याय को चुनौती दी। पिछले वर्ष दिसंबर में शिवगिरि मठ की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने शिवगिरि को सबसे पवित्र स्थानों में से एक बताया, जो सभीको समानता और सम्मान केसाथ व्यवहार करने केलिए प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को उद्धृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि गुरुजी की शिक्षाएं सामाजिक न्याय केलिए मार्गदर्शक का काम करती हैं और भेदभाव को खत्म करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों का मार्गदर्शन करती रहती हैं। भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत पर उपराष्ट्रपति ने कहाकि आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और श्रीनारायण गुरु जैसे संतों और समाज सुधारकों ने अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं के ज़रिए समाज को नया रूप दिया, अन्याय को चुनौती दी, अंधविश्वास को दूर किया और प्रत्येक नागरिक को सम्मान दिलाया। उन्होंने कहाकि यदि आदि शंकराचार्य न होते तो आज भारत एकजुट न होता।
डॉ शशि थरूर के पुस्तक लेखन की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह पुस्तक भारत की सभ्यतागत विरासत की वैश्विक पहुंच का विस्तार करेगी। उन्होंने डॉ शशि थरूर को एक विशिष्ट राजनयिक, सांसद और लेखक बताया, जिन्होंने बेहद स्पष्टता व ऐतिहासिक गहराई केसाथ सार्वजनिक चर्चा को और समृद्ध किया है। उन्होंने आतंकवाद केप्रति शून्य सहिष्णुता के भारत के एकजुट और दृढ़ संदेश को दुनियाभर में फैलाने केलिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के डॉ शशि थरूर के नेतृत्व का भी उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह पुस्तक श्रीनारायण गुरु के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डालती है, जिन्होंने आत्मसम्मान, ईमानदारी से श्रम और सामाजिक परिवर्तन पर बल देकर वंचित समुदायों को सशक्त बनाया। उन्होंने 1903 में स्थापित श्रीनारायण धर्म परिपालन योगम का भी उल्लेख किया, जिसने शिक्षा, संस्था निर्माण, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के ज़रिए गुरुजी के मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि श्रीनारायण गुरु के आध्यात्मिक एवं सामाजिक सुधारकों के योगदान का दस्तावेजीकरण भारत की सभ्यतागत स्मृति की रक्षा केलिए बेहद ज़रूरी है। उन्होंने विश्वास जतायाकि यह पुस्तक विद्वानों को गहन शोध करने, युवाओं को आलोचनात्मक चिंतन करने और समाज केलिए जिम्मेदारी से कार्य करने केलिए प्रेरित करेगी। सभी से समानता, एकता और शिक्षा के आदर्शों केप्रति स्वयं को समर्पित करने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि एसएनडीपी आंदोलन से सुदृढ़ किए गए और इस पुस्तक जैसे विद्वतापूर्ण कार्यों से व्यक्त किया गया श्रीनारायण गुरु का दृष्टिकोण, न्याय, सद्भाव और मानवीय गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण केलिए राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ शशि थरूर, अलेफ बुक कंपनी के प्रबंध निदेशक डेविड डेविडर, प्रतिष्ठित विद्वान और विशिष्ट अतिथि शामिल थे।

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