राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन
'भारत के वैश्विक एजेंडों में विकासशील देशों की प्राथमिकताएं सर्वोपरि'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 15 January 2026 06:04:20 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन कहा हैकि भारत में लोकतंत्र सफल रहा है, क्योंकि यहां जनता सर्वोपरि है। उन्होंने कहाकि भारत में जनता की आकांक्षाओं और सपनों को प्राथमिकता दी गई है और यह सुनिश्चित करने केलिए कि उनके रास्ते में कोई बाधा न आए, प्रक्रियाओं से लेकर प्रौद्योगिकी तक हर चीज का लोकतंत्रीकरण किया गया है। उन्होंने कहाकि यह लोकतांत्रिक भावना भारत की रगों और मन में बसी है। नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण दिया, जब दुनिया इस महामारी से जूझ रही थी और देश के भीतर चुनौतियों के बावजूद भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहाकि जनता के हितों, कल्याण और खुशहाली केलिए काम करना भारत का मूलमंत्र है और इस मूलमंत्र को भारत के लोकतंत्र ने पोषित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका अद्वितीय होती है। उन्होंने कहाकि अध्यक्ष को बोलने का अधिक अवसर नहीं मिलता, लेकिन उनकी जिम्मेदारी दूसरों की बात सुनने और यह सुनिश्चित करने में निहित हैकि सभीको अपनी बात कहने का मौका मिले। उन्होंने कहाकि धैर्य अध्यक्षों का सबसे आम गुण है, जो शोर मचाने वाले और अति उत्साही सांसदों को भी मुस्कुराते हुए संभाल लेते हैं। उन्होंने कहाकि आप जिस स्थान पर बैठे हैं, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलायाकि औपनिवेशिक शासन के अंतिम वर्ष में जब भारत की स्वतंत्रता निश्चित थी, संविधान सभा ने इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान का मसौदा तैयार किया था। प्रधानमंत्री ने उल्लेख कियाकि स्वतंत्रता केबाद 75 वर्ष तक यह भवन भारत की संसद के रूपमें कार्य करता रहा, जहां राष्ट्र के भविष्य को आकार देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय और चर्चाएं हुईं। प्रधानमंत्री ने बतायाकि देश ने अब इस ऐतिहासिक स्थल को संविधान सदन नाम देकर लोकतंत्र को समर्पित कर दिया है। उन्होंने कहाकि हालही में देश ने अपने संविधान के कार्यांवयन के 75 वर्ष पूरे किए हैं। प्रधानमंत्री ने बतायाकि राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन चौथी बार भारत में हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के मुख्य विषय 'संसदीय लोकतंत्र का प्रभावी क्रियांवयन' पर प्रकाश डाला और याद दिलायाकि जब भारत को आजादी मिली थी, तब यह आशंका व्यक्त की गई थीकि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा। उन्होंने कहाकि भारत ने इसी विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत बना लिया है। उन्होंने कहाकि भारत ने यह सिद्ध कर दिया हैकि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थायित्व, गति और व्यापकता प्रदान करती हैं। उन्होंने बतायाकि आज भारत विश्व की सबसे तेजीसे बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, भारत में यूपीआई से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली है, भारत सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परितंत्र, तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार, चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क, सबसे बड़ा दूध उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना और भारत जनकल्याण की भावना से काम करता है एवं यह सुनिश्चित करता हैकि लाभ बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बतायाकि इसी कल्याणकारी भावना के कारण हाल के वर्ष में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि दुनियाभर में कई लोग भारत को सबसे बड़े लोकतंत्र के रूपमें जानते हैं, लेकिन भारत के लोकतंत्र का पैमाना वास्तव में असाधारण है। उन्होंने 2024 में हुए आम चुनावों का जिक्र करते हुए कहाकि ये मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था, लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने मतदान केलिए पंजीकरण कराया था, जो कुछ महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। उन्होंने बतायाकि 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहे थे और इन चुनावों में महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी भी देखी गई। प्रधानमंत्री ने कहाकि आज भारतीय महिलाएं मतदान में न केवल भाग ले रही हैं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। उन्होंने बतायाकि भारत की राष्ट्रपति, जो देश की सर्वोच्च नागरिक हैं, एक महिला हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला हैं, जहां यह सम्मेलन हो रहा है। उन्होंने बतायाकि ग्रामीण और स्थानीय सरकारी निकायों में भारत में लगभग 15 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, यह जमीनी स्तर के नेताओं का लगभग 50 प्रतिशत है, जो विश्वस्तर पर अद्वितीय है। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारतीय लोकतंत्र विविधता से समृद्ध है, यहां सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं, विभिन्न भाषाओं में 900 से अधिक टेलीविजन चैनल हैं, हजारों समाचार पत्र और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि बहुत कम समाज इतनी व्यापक विविधता का प्रबंधन कर पाते हैं, लेकिन भारत इस विविधता का जश्न मनाता है, क्योंकि यहां के लोकतंत्र की नींव मजबूत है। भारत के लोकतंत्र की तुलना गहरी जड़ों वाले एक विशाल वृक्ष से करते हुए नरेंद्र मोदी ने भारत की वाद-विवाद, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की लंबी परंपरा पर बल दिया और याद दिलायाकि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। उन्होंने कहाकि भारत के 5,000 वर्ष से अधिक पुराने पवित्र ग्रंथों और वेदों में उन सभाओं का उल्लेख है, जहां लोग मुद्दों पर चर्चा करने और विचार-विमर्श एवं सहमति केबाद निर्णय लेने केलिए एकत्रित होते थे। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है, जहां बौद्ध संघ खुली और सुनियोजित चर्चाएं करता था और सर्वसम्मति या मतदान से निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने तमिलनाडु के एक 10वीं शताब्दी के शिलालेख का भी उल्लेख किया, जिसमें एक ग्राम सभा का वर्णन है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर काम करती थी, जिसमें जवाबदेही और निर्णय लेने केलिए स्पष्ट नियम थे। प्रधानमंत्री ने कहाकि समय-समय पर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कसौटी पर परखा गया है, विविधता ने इन्हें सहारा दिया है और पीढ़ी दर पीढ़ी ये मजबूत होते गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि राष्ट्रमंडल की जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रमंडल के सतत विकास लक्ष्यों में चाहे वह स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास या नवाचार के क्षेत्र हों, भारत पूरी जिम्मेदारी केसाथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहाकि भारत अपने सहयोगी देशों से सीखने केलिए निरंतर प्रयासरत है और यहभी सुनिश्चित करता हैकि भारत के अनुभव राष्ट्रमंडल देशों केलिए लाभकारी हों। प्रधानमंत्री ने कहाकि ऐसे समय में जब दुनिया अभूतपूर्व बदलाव से गुजर रही है, यह विकासशील देशों केलिए नए रास्ते तलाशने का भी सही समय है। उन्होंने कहाकि भारत हर वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की चिंताओं को मजबूती से उठा रहा है। उन्होंने याद दिलायाकि जी20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक एजेंडा के केंद्र में विकासशील देशों की चिंताओं को रखा था। नरेंद्र मोदी ने प्रकाश डालाकि भारत लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा हैकि नवाचारों से पूरे विकासशील देशों और राष्ट्रमंडल देशों को लाभ मिले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत ओपन सोर्स प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, ताकि विकासशील देशों के भागीदार देश अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के विकासशील देश, भारत में स्थापित प्रणालियों के समान प्रणालियां विकसित कर सकें। नरेंद्र मोदी ने बतायाकि सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र के ज्ञान और समझ को बढ़ावा देने के विभिन्न तरीकों का पता लगाना है। उन्होंने कहाकि इस प्रयास में अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इससे लोग अपने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक निकटता से जुड़ पाते हैं। उन्होंने कहाकि भारतीय संसद पहले सेही इस तरह की पहल कर रही है, अध्ययन यात्राओं, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और इंटर्नशिप से नागरिकों को संसद को अधिक गहराई से समझने के अवसर दे रही है। उन्होंने कहाकि भारत ने बहसों और सदन की कार्यवाही का क्षेत्रीय भाषाओं में तत्क्षण अनुवाद करने केलिए एआई का उपयोग शुरू किया है, एआई की सहायता से संसद से संबंधित संसाधनों को भी लोगों के अनुकूल बनाया जा रहा है, इससे युवा पीढ़ी को संसद के कामकाज को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रमंडल से जुड़े 20 से अधिक देशों का दौरा करने के अवसर का उल्लेख करते हुए बतायाकि वहां उन्हें कई संसदों को संबोधित करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहाकि वे जहां भी गए, बहुत कुछ सीखा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहाकि उन्हें जोभी सर्वोत्तम अभ्यास देखने को मिलता है, उसे वे लोकसभा अध्यक्ष केसाथ-साथ राज्यसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष केसाथ साझा करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन सीखने और साझा करने की प्रक्रिया को और समृद्ध करेगा। सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, अंतर संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ तुलिया एकसन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ क्रिस्टोफर कलीला और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।