'लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा जैसे योद्धा मोदी सरकार के प्रेरणास्रोत'
सीडीएस व रक्षामंत्री के जनरल एसके सिन्हा स्मृति व्याख्यान में उद्गारस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 8 January 2026 05:56:43 PM
नई दिल्ली। भारत अपनी संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और दृढ़ नीति केसाथ आगे बढ़ रहा है, ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल श्रीनिवास कुमार सिन्हा जैसी विभूतियां नरेंद्र मोदी सरकार की प्रेरणास्रोत हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा की जन्म शताब्दी पर स्मृति व्याख्यान में वीडियो संदेश में यह उद्गार व्यक्त किया। रक्षामंत्री ने लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्र केप्रति उनकी अटूट निष्ठा और अनुकरणीय समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा महान सैनिक, राजनयिक और राष्ट्राध्यक्ष थे, हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखा। राजनाथ सिंह ने उस समय का स्मरण किया, जब उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 1947 में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया, जब पाकिस्तान समर्थित बलों के कश्मीर की ओर बढ़ने के दौरान भारतीय सेना की श्रीनगर तक पहली एयरलिफ्ट के समन्वय में उन्होंने अहम योगदान दिया।
लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा की पेशेवर दक्षता और भारतीय एवं ब्रिटिश स्टाफ कॉलेजों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए रक्षामंत्री ने उन्हें असाधारण बुद्धि का धनी बहादुर अधिकारी बताया। ज्ञातव्य हैकि लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा भारतीय सेना के एक विशिष्ट अधिकारी थे, जिन्होंने बादमें नेपाल में राजदूत और असम व जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के रूपमें भी कार्य किया। रक्षामंत्री ने कहाकि लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा ने सैन्य खुफिया निदेशक, एडजुटेंट जनरल और विभिन्न कमान पदों पर रहते हुए भारतीय सेना को आधुनिक सोच और संस्थागत मजबूती प्रदान करने केलिए अथक प्रयास किए। उन्होंने कहाकि सेवानिवृत्ति केबाद भी उनका योगदान जारी रहा, नेपाल में भारत के राजदूत के रूपमें उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत किया। असम और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के रूपमें उन्होंने सुरक्षा और विकास केलिए काम किया। रक्षामंत्री ने लोगों से आग्रह कियाकि यदि भारत एक सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनना चाहता है तो लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा के आदर्शों से सीख लें।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा को एक सैनिक, राजनेता, विद्वान योद्धा और चरित्रवान व्यक्ति बताया। सीडीएस ने कहाकि वरिष्ठ नेतृत्व को एक ऐसी संस्कृति का निर्माण करना चाहिए, जहां पेशेवर सैन्य शिक्षा, विमर्श और सत्यनिष्ठा को वीरता के समान महत्व दिया जाए। उन्होंने कहाकि मध्यस्तर के अधिकारियों को अपने शारीरिक प्रशिक्षण केसाथ अपने दिमाग में भी उतना ही निवेश करना चाहिए। जनरल अनिल चौहान ने कहाकि युवा अधिकारियों और अन्य रैंकों को कड़ी मेहनत करनी चाहिए, अनुशासन को महत्व देना चाहिए, लेकिन आत्मचिंतन विकसित करना चाहिए, दृढ़ता केसाथ सहानुभूति केसाथ नेतृत्व करना चाहिए और याद रखना चाहिएकि साहस केवल युद्ध में ही नहीं, बल्कि नैतिक स्पष्टता में भी निहित है। उन्होंने कहाकि नागरिकों, सेना और मीडिया को युद्ध में जीत का जश्न मनाने केसाथ शांति के समय पेशेवर संयम, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण के शांत प्रयासों का सम्मान करके सशस्त्र बलों की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखने में मदद करनी चाहिए।
साइबर, स्पेस, इन्फॉर्मेशन और कॉग्निटिव डोमेन को शामिल करते हुए लगातार जटिल हो रहे युद्ध के संदर्भ में जनरल अनिल चौहान ने चिंतन और विश्लेषण में सक्षम सैनिक विद्वानों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सैनिकों केलिए लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा के वर्दीधारी साहस, उनकी जिज्ञासा और संविधान केप्रति उनके अटूट निष्ठा का आह्वान किया। उन्होंने कहाकि तभी भारतीय सैनिक न केवल सीमा और जनता की रक्षा कर सकेंगे, बल्कि भारत के भविष्य को आकार देने में भी बढ़चढ़कर योगदान दे सकेंगे। इस अवसर पर सेना के तीन पूर्व प्रमुख जनरल एनसी विजय, जनरल दीपक कपूर और जनरल दलबीर सिंह, उपसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीपी सिंह केसाथ उपस्थित थे। समारोह में लगभग 300 सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों और लेफ्टिनेंट जनरल सिन्हा के परिजन भी शामिल हुए।