भारत की सहस्राब्दियों पुरानी आध्यात्मिक विरासत जीवंत-प्रधानमंत्री
'देश का युवा श्रीमद्भगवद्गीता की भावनाओं शिक्षाओं से जुड़ रहा'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 28 November 2025 06:36:18 PM
उडुपी (कर्नाटक)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उडुपी में श्रीकृष्ण मठ में एक लाख लोगों द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता गीता का सामूहिक पाठ आयोजन लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य दर्शन, श्रीमद्भगवद्गीता के मंत्रों का आध्यात्मिक अनुभव और बड़ी संख्या में कई पूज्य संतों एवं गुरुओं का सान्निध्य उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहाकि यह अनगिनत आशीर्वाद के समान है। नरेंद्र मोदी ने स्मरण कियाकि तीन दिन पहले ही वे गीता के उपदेश की धरती कुरुक्षेत्र गए थे और आज भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और जगद्गुरु श्रीमाधवाचार्य की महिमा से सुशोभित इस धरती पर पहुंचना उन्हें परम संतोष दे रहा है। उन्होंने उडुपी की पवित्र भूमि की यात्रा को सदा ही असाधारण बताते हुए कहाकि यद्यपि उनका जन्म गुजरात में हुआ फिरभी गुजरात और उडुपी केबीच हमेशा एक गहरा और विशेष संबंध है। नरेंद्र मोदी ने उस मान्यता काभी स्मरण कियाकि यहां स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा पहले द्वारका में माता रुक्मिणी करती थीं और बादमें जगद्गुरु श्रीमाधवाचार्य ने उडुपी में इस मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की, इसके दर्शन कर उन्हें जो गहन अनुभूति हुई, उसकी केवल कल्पना ही की जा सकती है और प्रभु के दर्शन से उन्हें असीम आध्यात्मिक आनंद प्राप्त हुआ। उन्होंने कहाकि पिछले वर्षही उन्हें समुद्र के नीचे श्रीद्वारका के दर्शन का दिव्य अनुभव प्राप्त हुआ था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मरण करायाकि 1968 में उडुपी के लोगों ने जनसंघ के वीएस आचार्य को नगर परिषद केलिए निर्वाचित किया था और एक नए शासन प्रारूप की नींव रखी थी। उन्होंने कहाकि आज राष्ट्रीय स्तरपर जो स्वच्छता अभियान देखा जा रहा है, उसे पांच दशक पहले उडुपी ने ही अपनाया था। उन्होंने कहाकि चाहे जल आपूर्ति हो या जल निकासी की व्यवस्था का नया मॉडल उडुपी ने 1970 के दशक में ही ऐसे कार्यक्रम आरंभ कर दिए थे, ये अभियान आज राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा बन गए हैं और देश की प्रगति में सहायक हैं। श्रीरामचरितमानस के शब्दों का स्मरण करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहाकि कलयुग में केवल भगवान के नाम के जाप से ही भवसागर से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहाकि समाज में मंत्रों और गीता के श्लोकों का पाठ सदियों से होता आ रहा है, लेकिन जब एक लाख लोग एकसाथ इन श्लोकों का पाठ करते हैं तो यह अनुभव विशिष्ट होता है। प्रधानमंत्री ने कहाकि इतने सारे लोगों के स्वर में गीता जैसे पवित्र ग्रंथ का पाठ और ऐसे दिव्य शब्दों की एक स्थान पर गूंज से एक विशेष ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो मन और मस्तिष्क को एक नया कंपन और एक नई शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहाकि यह ऊर्जा अध्यात्म की शक्ति केसाथ ही सामाजिक एकता की भी ताकत है। उन्होंने कहाकि आज एक लाख लोगों द्वारा गीता पाठ विशाल ऊर्जा क्षेत्र का अनुभव करा रहा है और यह विश्व को सामूहिक चेतना की शक्ति भी दिखा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि वे इस दिन विशेष रूपसे सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामी को नमन करते हैं, जिन्होंने लक्ष कंठ गीता के विचार को दिव्य रूपसे साकार किया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित कियाकि दुनियाभर के लोगों को स्वयं अपने हाथों से गीता लिखने को प्रेरित कर स्वामीजी ने कोटि गीता लेखन यज्ञ की शुरुआत की, जो अब सनातन परंपरा का एक वैश्विक जन आंदोलन बन गया है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि जिस तरह भारत का युवा श्रीमदभगवद्गीता की भावनाओं और शिक्षाओं से जुड़ रहा है, वह अपने आपमें ही बहुत बड़ा विकास है। उन्होंने स्मरण कियाकि भारत में सदियों से वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों के ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की परंपरा रही है और यह कार्यक्रम भी अगली पीढ़ी को भगवद् गीता से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि तीन दिन पहले वे अयोध्या गए थे, जहां 25 नवंबर को विवाह पंचमी पर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वजा स्थापित की गई। उन्होंने कहाकि अयोध्या से लेकर उडुपी तक अनगिनत रामभक्तों ने इस दिव्य और भव्य उत्सव को देखा। उन्होंने कहाकि राम मंदिर आंदोलन में उडुपी ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, यह पूरा देश जानता है। उन्होंने स्मरण कियाकि दशकों पहले बैकुंठवासी विश्वेश तीर्थ स्वामीजी ने इस आंदोलन को दिशा दी थी और ध्वजारोहण समारोह उसी योगदान की पूर्ति का उत्सव बना। उन्होंने उल्लेख कियाकि उडुपी केलिए राम मंदिर का निर्माण एक और विशेष कारण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि नए मंदिर में जगद्गुरु माधवाचार्य के नाम पर एक भव्य द्वार निर्मित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त जगद्गुरु माधवाचार्य के एक श्लोक का अर्थ हैकि प्रभु श्रीराम छह दिव्य गुणों से विभूषित हैं तथा वे परमपिता परमेश्वर, अपार शक्ति और साहस के सागर हैं। उन्होंने कहाकि इसी के निहित राम मंदिर परिसर में उनके नाम पर एक द्वार होना कर्नाटक में उडुपी और पूरे देश के लोगों केलिए अत्यंत गौरव की बात है। जगद्गुरु माधवाचार्य को भारत के द्वैत दर्शन के प्रणेता और वेदांत का प्रकाश पुंज बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि उनके स्थापित उडुपी के अष्ट मठों की व्यवस्था, संस्था निर्माण और नई परंपराओं की स्थापना का एक जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहाकि यहां भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, वेदांत का ज्ञान और हज़ारों लोगों को भोजन कराने का संकल्प निहित है और एक तरह से यह स्थान ज्ञान, भक्ति और सेवा का पावन संगम है। नरेंद्र मोदी ने स्मरण कियाकि जिस कालखंड में जगद्गुरु माधवाचार्य का अवतरण हुआ, उस समय भारत कई आंतरिक और बाह्य चुनौतियों का सामना कर रहा था, उस समय उन्होंने भक्ति का ऐसा मार्ग दिखाया, जिसने समाज के हर वर्ग और हर आस्था को जोड़ा। उन्होंने कहाकि उनके मार्गदर्शन के कारण ही सदियों बादभी उनके द्वारा स्थापित मठ हर दिन लाखों लोगों की सेवा में लगे हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि जनसेवा की यही सनातन परंपरा उडुपी की सबसे बड़ी विरासत है।
प्रधानमंत्री ने कहाकि पुरंदर दास और कनक दास जैसे महान संतों ने सरल, मधुर और सुलभ कन्नड़ भाषा में भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया। नरेंद्र मोदी ने कहाकि ये रचनाएं मौजूदा पीढ़ी केलिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, आज जब युवा सोशल मीडिया रीलों पर पुरंदर दास की रचना चंद्रचूड़ा शिव शंकर पार्वती देखते-सुनते हैं तो वे आध्यात्मिक भावना में सराबोर हो जाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहाकि जब उडुपी में उनके जैसे भक्त एक छोटी सी खिड़की से भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करते हैं तो यह कनक दासजी की भक्ति से जुड़ने काभी एक अवसर होता है। नरेंद्र मोदी ने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा को प्रत्येक युग में व्यावहारिक और गीता के शब्दों को व्यक्तियों केसाथ ही राष्ट्र की नीतियों में मार्गदर्शक बताते हुए स्मरण करायाकि भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कहा हैकि हमें सबके कल्याण केलिए कार्य कैसे करना चाहिए और जगद्गुरु माधवाचार्य ने आजीवन इन्हीं भावनाओं को प्रचारित प्रसारितकर भारत की एकता सुदृढ़ की। नरेंद्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास, सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीतियों के पीछे भगवान श्रीकृष्ण के श्लोकों को मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहाकि भगवान श्रीकृष्ण ने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण का ज्ञान दिया, इसी ज्ञान ने राष्ट्र को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के ऐतिहासिक निर्णय लेने को प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के मैदान में गीता का संदेश दिया था और इस बात पर ज़ोर दियाकि भगवद् गीता हमें सिखाती हैकि शांति और सत्य स्थापना केलिए अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहाकि राष्ट्र की सुरक्षा नीति की यही मूल भावना है, भारत वसुधैव कुटुम्बकम की बात करता है और 'धर्मो रक्षति रक्षितः' का मंत्र भी दोहराता है। उन्होंने कहाकि लालकिले के प्राचीर से श्रीकृष्ण की करुणा का संदेश भी दिया जाता है और उसी प्राचीर से मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा भी की जाती है, मिशन सुदर्शन चक्र का अर्थ देश के प्रमुख स्थानों, औद्योगिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के चारों ओर एक ऐसी सुरक्षा दीवार निर्मित करना है, जिसे शत्रु भेद न सके और अगर उसने दुस्साहस किया तो भारत का सुदर्शन चक्र उसे नष्ट कर देगा। प्रधानमंत्री ने कहाकि ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में राष्ट्र ने इसी संकल्प को देखा। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख किया, जिसमें कर्नाटक के लोगों सहित कई देशवासियों की जान चली गई। प्रधानमंत्री ने कहाकि पहले जब ऐसे आतंकवादी हमले होते थे तो सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती थीं पर यह नया भारत है, जो न किसी के आगे झुकता है और न ही अपने नागरिकों की रक्षा के कर्तव्य से पीछे हटता है। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत शांति स्थापित करना जानता है और शांति की रक्षा करना भी उसे आता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि श्रीमद्भगवद्गीता हमें अपने कर्तव्यों और जीवन के दायित्वों का बोध कराती है। उन्होंने इसीसे प्रेरित होकर सबसे कुछ संकल्प लेने का आह्वान किया, ये नौ संकल्प वर्तमान और भविष्य केलिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहाकि हमारा पहला संकल्प जल संरक्षण, जल संचयन और नदियों की रक्षा का होना चाहिए। दूसरा संकल्प वृक्षारोपण, एक पेड़ मां के नाम का राष्ट्रव्यापी अभियान अब ज़ोर पकड़ रहा है। तीसरा संकल्प देश के कम से कम एक निर्धन व्यक्ति का जीवनस्तर उन्नत बनाने का प्रयास होना चाहिए। चौथा संकल्प स्वदेशी के उपयोग का होना चाहिए और एक दायित्वपूर्ण नागरिक होने के नाते हम सभीको स्वदेशी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहाकि आज देश आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के मंत्र केसाथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह पांचवां संकल्प बताया। प्रधानमंत्री ने छठे संकल्प में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आहार में मोटे अनाजों को शामिल करने और तेल का सेवन कम करने की बात कही। उन्होंने कहाकि सातवां संकल्प योग और उसे जीवन का हिस्सा बनाना होना चाहिए। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आठवां संकल्प पांडुलिपियों के संरक्षण में समर्थन देना है, क्योंकि भारत का बहुत सारा प्राचीन ज्ञान इन पांडुलिपियों में छिपा है, सरकार इस ज्ञान को संरक्षित करने केलिए ज्ञान भारतम मिशन पर काम कर रही है और जन सहयोग से इस अमूल्य धरोहर को बचाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौवें संकल्प के रूपमें देश में अपनी विरासत से जुड़े कम से कम 25 स्थानों के भ्रमण का आग्रह करते हुए सुझाव दियाकि तीन-चार दिन पहले ही हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने लोगों से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन केलिए इस केंद्र में जाने की अपील की। नरेंद्र मोदी ने कहाकि गुजरात में हर साल भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह को समर्पित माधवपुर मेला होता है, जिसमें देशभर विशेषकर पूर्वोत्तर से काफी लोग आते हैं। उन्होंने सभी से अगले वर्ष इसमें शामिल होने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन और गीता के प्रत्येक अध्याय कर्म, कर्तव्य और कल्याण का संदेश देते है। उन्होंने कहाकि भारतीयों केलिए 2047 का कालखंड न केवल अमृतकाल है, बल्कि यह विकसित भारत के निर्माण का कर्तव्य युग भी है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि प्रत्येक नागरिक, हर भारतीय की एक ज़िम्मेदारी है और प्रत्येक व्यक्ति और संस्था का भी अपना कर्तव्य है। उन्होंने कहाकि प्रत्येक प्रयास राष्ट्र केलिए ही समर्पित होना चाहिए और इसी कर्तव्यभावना का पालन करते हुए एक विकसित कर्नाटक और एक विकसित भारत का स्वप्न साकार होगा। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और साधु-संत एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।